ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने रविवार (28 जून, 2026) को बहरीन और कुवैत की ओर ड्रोन और मिसाइलें दागीं। ईरान ने इसे अपने ठिकानों पर हुए अमेरिकी हवाई हमलों का जवाब बताया। साथ ही चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई जारी रखी, तो युद्ध समाप्त करने के लिए चल रही सभी वार्ताएं पूरी तरह ठप हो जाएंगी।
इस वजह से बढ़ गई बात
यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिकी नौसेना की निगरानी में काम करने वाले एक बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा संगठन ने शनिवार (27 जून) को घोषणा की थी कि ओमान के निकट होर्मुज जलडमरूमध्य में वैकल्पिक समुद्री मार्ग का विस्तार किया जाएगा, ताकि जहाजों की आवाजाही दोनों दिशाओं में सुचारु रूप से हो सके। इस फैसले को ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का नया कारण माना जा रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम युद्धविराम समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बहाल करने पर सहमति बनी थी। यह वही रणनीतिक जलमार्ग है, जहां से कभी दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस का परिवहन होता था। हालांकि, ईरान ने ओमान मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर दो बार हमला किया है। तेहरान का कहना है कि अमेरिकी और खाड़ी देशों के विरोध के बावजूद इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर उसका नियंत्रण होना चाहिए।
रविवार सुबह अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि शनिवार को समुद्र में एक तेल टैंकर पर हुए हमले के जवाब में उसने ईरान के सैन्य निगरानी ढांचे, संचार प्रणालियों, वायु रक्षा ठिकानों, ड्रोन भंडारण केंद्रों और बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमताओं को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया।
अमेरिका के अनुसार, पनामा के झंडे वाला तेल टैंकर ‘किकू’ (Kiku) कतर की सरकारी ऊर्जा कंपनी के लिए कच्चा तेल लेकर जा रहा था। कतर इस समय अमेरिका और ईरान के बीच प्रमुख मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
युद्ध विराम समझौते के उल्लंघन का आरोप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण स्थलों तथा तटीय रडार ठिकानों पर हमला किया है, क्योंकि ईरान ने एक बार फिर युद्धविराम समझौते का उल्लंघन किया।
ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा, “एक समय ऐसा आ सकता है जब अमेरिका के लिए संयम बरतना संभव नहीं रहेगा और उसे व्यापक सैन्य कार्रवाई करनी पड़ेगी। अगर ऐसा हुआ, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का अंत हो जाएगा।”
25 जून के हमले का जवाब
यह घटनाक्रम गुरुवार (25 जून) को ओमान तट के पास एक व्यापारिक जहाज पर हुए ईरानी ड्रोन हमले के कुछ दिनों बाद सामने आया है। उस हमले के जवाब में भी अमेरिकी सेना ने ईरानी ठिकानों पर कार्रवाई की थी।
जहाज ट्रैकिंग वेबसाइटों के अनुसार, किकू इस सप्ताह की शुरुआत में फारस की खाड़ी के मध्य स्थित कतर के एक तेल क्षेत्र से रवाना हुआ था और संयुक्त अरब अमीरात के एक बंदरगाह की ओर जा रहा था। बताया गया कि वह ओमान तट के पास बनाए गए वैकल्पिक समुद्री मार्ग का उपयोग कर रहा था, जिसे ईरान लगातार चुनौती देता रहा है।
अमेरिकी सेना ने कहा कि ईरान के पास युद्धविराम समझौते का पालन करने का अवसर था, लेकिन उसने तेल टैंकर पर हमला करके समझौते का उल्लंघन करने का रास्ता चुना।
अमेरिकी हमलों के कुछ घंटे बाद कुवैत की सेना ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान से दागे गए ड्रोन और मिसाइलों को सफलतापूर्वक मार गिराया। हालांकि, किसी प्रकार के नुकसान की तत्काल सूचना नहीं मिली। कुवैत में अमेरिका का एक बड़ा सैन्य अड्डा भी स्थित है।
खतरनाक तनाव वृद्धि
वहीं, बहरीन के विदेश मंत्रालय ने इस हमले को “खतरनाक तनाव वृद्धि” करार देते हुए कहा कि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता तथा उसके नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा के खिलाफ ईरान की सुनियोजित और बार-बार की जा रही आक्रामक कार्रवाई है।
उधर, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने बयान जारी कर कहा कि यदि दुश्मन ने युद्धविराम का उल्लंघन जारी रखा, तो संघर्ष समाप्त करने के लिए चल रही सभी प्रक्रियाएं पूरी तरह बंद कर दी जाएंगी।
ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम की कमान संभालने वाली रिवोल्यूशनरी गार्ड सीधे सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई के प्रति जवाबदेह है। माना जा रहा है कि हालिया सैन्य घटनाक्रम के बाद इस्लामिक गणराज्य की सत्ता व्यवस्था में उसका प्रभाव और अधिक बढ़ गया है।








