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UAE Barakah Nuclear Plant Drone Attack: यूएई के बराकाह न्यूक्लियर प्लांट पर ड्रोन हमला सुरक्षा पर सवाल, खाड़ी में लड़ाई का नया मोड़

UAE Barakah Nuclear Plant Drone Attack:   संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अल धफरा क्षेत्र स्थित बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट परिसर में ड्रोन हमले के बाद आग लगने की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। भारत ने इस हमले को “खतरनाक उकसावा” बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है और सभी पक्षों से संयम बरतने तथा कूटनीतिक संवाद की राह अपनाने की अपील की है। कतर ने भी चिंता जताई है।

खाड़ी क्षेत्र पहले से कई स्तरों पर तनाव झेल रहा है —

  • ईरान और पश्चिम समर्थित देशों के बीच टकराव
  • ड्रोन और मिसाइल युद्ध का बढ़ता इस्तेमाल
  • समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर खतरा
  • तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता

ऐसे माहौल में यूएई जैसे देश के परमाणु संयंत्र परिसर तक ड्रोन पहुंचना सुरक्षा ढांचे पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। यदि भविष्य में किसी हमले से वास्तविक परमाणु क्षति होती है, तो उसका असर केवल यूएई तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे पश्चिम एशिया, वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा।

भारत की तीखी प्रतिक्रिया भी इसी कारण महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत आमतौर पर पश्चिम एशिया विवादों पर संतुलित भाषा इस्तेमाल करता है, लेकिन इस बार विदेश मंत्रालय ने “अस्वीकार्य” और “खतरनाक उकसावा” जैसे शब्दों का प्रयोग किया। यह संकेत है कि नई दिल्ली इस घटना को सामान्य सीमा तनाव से कहीं अधिक गंभीर मान रही है।

हालांकि अभी तक किसी पक्ष की आधिकारिक जिम्मेदारी तय नहीं हुई है। इसलिए यह भी संभव है कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने की कोशिशें तेज हों। लेकिन यदि ऐसे हमले जारी रहते हैं, तो खाड़ी क्षेत्र में “शैडो वॉर” खुली क्षेत्रीय टकराव की दिशा में बढ़ सकती है।

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने रविवार को जारी बयान में कहा,

“यूएई के बराकाह परमाणु संयंत्र को निशाना बनाकर किया गया हमला बेहद चिंताजनक है। ऐसे कदम अस्वीकार्य हैं और क्षेत्रीय तनाव को खतरनाक स्तर तक ले जा सकते हैं। भारत सभी पक्षों से संयम और बातचीत की अपील करता है।”

ड्रोन हमले के बाद लगी आग

यूएई के अबू धाबी मीडिया कार्यालय के अनुसार, बराकाह न्यूक्लियर प्लांट के बाहरी सुरक्षा क्षेत्र में स्थित एक इलेक्ट्रिकल जनरेटर में ड्रोन हमले के कारण आग लग गई। घटना के तुरंत बाद आपातकालीन टीमें मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पा लिया गया।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ और रेडियोलॉजिकल सुरक्षा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। यूएई की फेडरल अथॉरिटी फॉर न्यूक्लियर रेगुलेशन (FANR) ने भी पुष्टि की कि परमाणु संयंत्र पूरी तरह सुरक्षित है और सभी यूनिट सामान्य रूप से कार्य कर रही हैं।

हमले के पीछे कौन?

यूएई प्रशासन ने अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी देश या संगठन का नाम नहीं लिया है। हालांकि हाल के हफ्तों में यूएई और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए क्षेत्रीय स्थिति बेहद संवेदनशील मानी जा रही है।

इस महीने की शुरुआत में यूएई ने दावा किया था कि उसके कई इलाकों की ओर ईरान से मिसाइल और ड्रोन दागे गए। हालांकि ईरान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उसने यूएई के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई नहीं की।

यूएई रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 3 अप्रैल से अब तक उसकी एयर डिफेंस प्रणाली सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और हजारों ड्रोन को इंटरसेप्ट कर चुकी है।

क्यों अहम है बराकाह न्यूक्लियर प्लांट?

बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट अरब दुनिया का पहला संचालनरत परमाणु ऊर्जा संयंत्र है। यह यूएई की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा करता है और देश की रणनीतिक ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक परमाणु सुरक्षा मानकों के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करते हैं।

भारत की चिंता क्यों महत्वपूर्ण?

भारत के यूएई और खाड़ी देशों के साथ गहरे आर्थिक, ऊर्जा और रणनीतिक संबंध हैं। लाखों भारतीय नागरिक यूएई में रहते और काम करते हैं। ऐसे में खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा पर सीधा असर डाल सकता है।

भारत ने अपने बयान में साफ संकेत दिया है कि वह पश्चिम एशिया में किसी भी बड़े सैन्य टकराव के खिलाफ है और कूटनीतिक समाधान को ही एकमात्र रास्ता मानता है।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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