Petrol price hike in India दुनिया भर में गहराते भू-राजनीतिक (Geopolitical) संकट का सीधा और खौफनाक असर अब भारत के आम नागरिकों की जेब पर दिखने लगा है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने सोमवार को एक बार फिर पेट्रोल की कीमतों में ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी कर दी है। पिछले दो हफ्तों से भी कम समय में यह चौथी बड़ी बढ़ोतरी है। 15 मई से शुरू हुए इस सिलसिले के बाद से अब तक दोनों ईंधनों के दामों में करीब ₹7.5 प्रति लीटर का संचयी इजाफा (Cumulative Increase) हो चुका है।
इस ताजा संशोधन के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹99.51 से उछलकर ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹92.49 से बढ़कर ₹95.20 प्रति लीटर पर पहुंच गया है। मुंबई में पेट्रोल ₹103.50 और कोलकाता में ₹105.40 के स्तर को छू रहा है।
प्रधानमंत्री की ‘भावनात्मक अपील’ और ₹150 का खतरा
जिस रफ्तार से ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं, उसे देखकर यह अंदेशा सच होता दिख रहा है कि साल 2026 की पहली छमाही में ही देश के कई हिस्सों में पेट्रोल-डीजल ₹150 प्रति लीटर के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू लेंगे। शायद इसी आगामी संकट और इसके पीछे की तपिश को भांपते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देश की जनता से पेट्रोल-डीजल की किफायत (Fuel Conservation) को लेकर एक भावनात्मक अपील की थी। सरकार की तरफ से वर्क फ्रॉम होम (Remote Working) को बढ़ावा देने और गैर-जरूरी यात्राओं को कम करने का आग्रह किया गया है ताकि देश के घटते विदेशी मुद्रा भंडार (FX Reserves) और बढ़ते चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) को संभाला जा सके। लेकिन हकीकत यह है कि आने वाले दिन उतने सहज और आसान नहीं होने वाले हैं, जितने हम अब तक बिता चुके हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम? ओएमसी पर ₹1,000 करोड़ रोज का बोझ
ओएनजीसी (ONGC) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) के शीर्ष अधिकारियों के अनुसार, यह बढ़ोतरी मजबूरी का परिणाम है। ओएनजीसी की निदेशक (अन्वेषण) सुषमा रावत और बीपीसीएल के पूर्व विपणन निदेशक सुखमाल कुमार जैन ने साफ किया है कि पश्चिम एशिया (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी और डॉलर के मुकाबले रुपये के 10% तक कमजोर होने से तेल कंपनियों की कमर टूट चुकी है।
“सरकार ने जनता को 76 दिनों तक वैश्विक कीमतों के असर से बचाकर राहत दी। लेकिन ओएमसी (OMCs) हर दिन करीब ₹1,000 करोड़ का नुकसान झेल रही थीं। कोई भी कंपनी इस स्थिति को कब तक संभाल सकती है?” — सुषमा रावत, निदेशक (अन्वेषण), ONGC
इस युद्ध के दौरान कच्चे तेल की कीमतें $65-70 प्रति बैरल से छलांग लगाकर $110-115 प्रति बैरल तक पहुंच गईं। भारत अपनी जरूरत का 85% क्रूड ऑयल इम्पोर्ट करता है, इसलिए रुपये की कमजोरी ने इस बोझ को दोगुना कर दिया है।
आंकड़ों का मायाजाल और ब्रेकईवन का सच
ग्लोबल मार्केट में हालांकि रविवार को शांति समझौते की उम्मीदों के बीच ब्रेंट क्रूड 5.1% गिरकर $98.22 पर आया है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा समझौते में जल्दबाजी न करने के बयान ने अनिश्चितता बरकरार रखी है।
केपलर (Kpler) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस भारी कीमत के कारण 2026 के उत्तरार्ध (Second Half) में भारत की ईंधन मांग की वृद्धि दर में 39% की भारी गिरावट आ सकती है। लेकिन सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा तेल कंपनियों के ब्रेकईवन स्तर (Breakeven Levels) का है।
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वर्तमान में पेट्रोल भले ही ₹103 (राष्ट्रीय औसत) बिक रहा हो, लेकिन तेल कंपनियों की लागत के हिसाब से इसका वास्तविक दाम ₹125 प्रति लीटर होना चाहिए।
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इसी तरह ₹94 पर बिक रहे डीजल का ब्रेकईवन स्तर ₹115-120 प्रति लीटर है।
यानी कंपनियां अभी भी घाटे में हैं, जिसका सीधा मतलब है कि यदि आने वाले दिनों में कच्चा तेल और महंगा हुआ या रुपया और कमजोर हुआ, तो पेट्रोल-डीजल का ₹150 प्रति लीटर पहुंचना तय है।
डिजिटल सत्याग्रह और युवाओं का आक्रोश
इस सांख्यिकीय मायाजाल (Statistical Illusion) और लगातार बढ़ती महंगाई के बीच देश के युवाओं और आम जनता में भारी आक्रोश है। सोशल मीडिया पर सरकार की आर्थिक नीतियों और बेरोजगारी (Unemployment Crisis) को लेकर ‘डिजिटल सत्याग्रह’ छिड़ गया है। जहां एक तरफ आंकड़ों में बेरोजगारी दर को सीमित दिखाया जाता है, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर पढ़ा-लिखा युवा काम के लिए संघर्ष कर रहा है। ईंधन के इन बढ़ते दामों ने आग में घी डालने का काम किया है, जिससे माल ढुलाई महंगी होगी और आम जरूरत की हर चीज के दाम बढ़ेंगे।
रूस से मिल रहे डिस्काउंटेड कच्चे तेल (करीब 1.9-2 मिलियन बैरल प्रति दिन) ने भारत की अर्थव्यवस्था को एक ढाल तो दी है, लेकिन पश्चिम एशिया का संकट इस ढाल को भी भेद रहा है। प्रधानमंत्री की अपील अपनी जगह है, लेकिन जब तक वैश्विक स्तर पर युद्ध विराम नहीं होता या सरकार टैक्स में कटौती कर जनता को सीधी राहत नहीं देती, तब तक आने वाले दिनों की राह बेहद पथरीली और महंगी होने वाली है।








