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Big News: यूपी में स्कूलों का समय बदला, बच्चों के लिए नई गाइडलाइन जारी

Big News: भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप से बच्चों को राहत दिलाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी बोर्डों के स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक के समय में बदलाव कर दिया है। बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में अब सुबह 7 से दोपहर 12 बजे तक शिक्षण कार्य होगा। बीएसए राहुल पंवार ने बताया कि सीबीएसई, आइसीएसई, यूपी बोर्ड सहित सभी बोर्ड के स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है।
उत्तर प्रदेश के स्कूलों मैं शैक्षणिक कार्य को लेकर सरकार की ओर से एक और बड़ा आदेश भी जारी किया गया है। भीषण गर्मी जैसी स्थिति को देखते हुए स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई के समय पर नियमों को सख्त किया गया है। सभी प्रकार के सरकारी और निजी स्कूलों में सुबह 10:00 बजे तक आउटडोर एक्टिविटीज को समाप्त कर लिए जाने का निर्देश जारी किया गया है।

स्कूलों से कहा गया है कि वह प्रार्थना सभा, एक्सरसाइज, खेलकूद जैसी गतिविधियां सुबह 10:00 बजे से पहले पूरी कर लें। इसके बाद बच्चों को किसी भी स्थिति में स्कूल कक्ष के बाहर निकालने की अनुमति न दी जाए। साथ ही मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए भी बच्चों के आउटडोर एक्टिविटी को प्रतिबंधित किया गया है। सरकार ने साफ किया है कि बच्चों की सेहत के साथ किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।

अभिभावकों को शिक्षकों से अपील

इस संबंध में बाल रोग विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अपील की है कि छोटे बच्चों को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए बच्चों को थोड़ी थोड़ी देर में पानी पीने की हिदायत के साथ पानी की बोतल दें और उसमें इलेक्ट्राल भी घोल दें। ताकि बच्चों के शरीर में पानी की कमी न होने पाए। अध्यापकों से भी आग्रह किया है कि क्लास में बच्चों को पानी पीने से न रोकें। ताकि वह हाइड्रेट रहें।

स्कूली बच्चों को हाइड्रेट रखने के लिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि बच्चों को सिर्फ प्यास लगने पर ही नहीं, बल्कि हर 30-40 मिनट में पानी पीने की आदत डालें। सामान्य पानी के अलावा, उनके स्कूल बैग में ओआरएस (ORS) का घोल या नींबू पानी ज़रूर रखें। केवल सादा पानी पीने से पसीने के ज़रिए निकले मिनरल्स की भरपाई नहीं होती। बच्चों को इलेक्ट्रोलाइट्स और नमक की सही मात्रा देने के लिए पानी के साथ-साथ ओआरएस का घोल या नींबू-नमक-चीनी का पानी ज़रूर दें।

डाक्टरों का कहना है कि बच्चे अक्सर खेल या पढ़ाई में व्यस्त होकर पानी पीना भूल जाते हैं या प्यास को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। इसलिए उन्हें हर आधे घंटे में पानी पीने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। शिक्षकों को भी इसे बढ़ावा देना चाहिए।

निगरानी करें यदि बच्चा बहुत सुस्त महसूस कर रहा है, उसे सिरदर्द या चक्कर आ रहा है, या उसे उल्टी-दस्त हो रहे हैं, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें। यह लू (हीट स्ट्रोक) के लक्षण हो सकते हैं।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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