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Kaamal Hasan: क्या अंडरवर्ल्ड की दहशत में कमल हासन ने बालीवुड छोड़ा, जानिये सबसे बड़ा खुलासा

तमिल सिनेमा ने कमल हासन को आज का मुकाम दिलाया, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि वह उन चुनिंदा भारतीय अभिनेताओं में शामिल हैं जिन्होंने लगभग हर भाषा के सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। तमिल के अलावा उन्होंने तेलुगु, मलयालम और हिंदी फिल्मों में यादगार अभिनय किया। वहीं कन्नड़ और बंगाली फिल्मों में उनकी सीमित मौजूदगी भी उनकी अभिनय क्षमता की गवाही देती है।

इस फिल्म से कमल हासन ने बालीवुड में एंट्री ली

कमल हासन ने 1974 में अपने गुरु के. बालाचंदर की हिंदी फिल्म ‘आईना’ से बॉलीवुड में कदम रखा। यह बालाचंदर की तमिल फिल्म ‘अरंगेट्रम’ (1973) का हिंदी रीमेक थी, जिसमें कमल ने छोटी-सी भूमिका निभाई थी। हालांकि हिंदी सिनेमा में उनकी असली पहचान करीब सात साल बाद बनी।

एक बार फिर के. बालाचंदर ने ही उनके लिए रास्ता तैयार किया। उन्होंने अपनी सुपरहिट तेलुगु फिल्म ‘मारो चरित्र’ (1978) का हिंदी रीमेक ‘एक दूजे के लिए’ (1981) बनाया और मुख्य भूमिका के लिए कमल हासन को ही चुना। तेलुगु संस्करण में सरिता थीं, जबकि हिंदी फिल्म में रति अग्निहोत्री उनकी नायिका बनीं।

फिल्म रिलीज होते ही जबरदस्त हिट साबित हुई और कमल हासन रातोंरात बॉलीवुड के बड़े सितारे बन गए। इसके बाद उन्होंने सनम तेरी कसम (1982), ये तो कमाल हो गया (1982) और ज़रा सी जिंदगी (1983) जैसी सफल फिल्मों में काम किया।

1983 में आई बालू महेंद्र की फिल्म सदमा ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी। यह उनकी तमिल फिल्म मूंद्राम पिरई (1982) का हिंदी रीमेक थी। तमिल संस्करण के लिए कमल हासन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। हिंदी फिल्म में कमल और श्रीदेवी की अभिनय जोड़ी को आज भी याद किया जाता है।

सागर बनी करियर का अहम पड़ाव

इसके बाद ये देश (1984), एक नई पहेली (1984), यादगार (1984), राज तिलक (1984) और करिश्मा (1984) जैसी फिल्मों ने भी बॉलीवुड में उनकी मजबूत मौजूदगी बनाए रखी। हालांकि 1985 में रिलीज हुई रमेश सिप्पी की सागर को उनके हिंदी करियर का सबसे अहम पड़ाव माना जाता है। फिल्म में कमल के अभिनय की इतनी सराहना हुई कि कई समीक्षकों ने उन्हें मुख्य अभिनेता ऋषि कपूर पर भारी बताया।

इसी दौर में उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ ‘गिरफ्तार’ (1985) और देखा प्यार तुम्हारा (1985) में भी काम किया। लेकिन इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक हिंदी फिल्मों से दूरी बना ली।

चाची 420 से बालीवुड में 12 साल बाद वापसी

करीब 12 साल बाद 1997 में उन्होंने अपनी तमिल फिल्म अव्वई शनमुगी का हिंदी रीमेक चाची 420 बनाकर बॉलीवुड में वापसी की। इसके बाद उन्होंने हे राम, अभय, मुंबई एक्सप्रेस, विश्वरूप और विश्वरूप-2 जैसी द्विभाषी फिल्मों में काम किया, लेकिन किसी विशुद्ध हिंदी फिल्म का हिस्सा नहीं बने।

बॉलीवुड में अपार सफलता और लोकप्रियता हासिल करने के बावजूद कमल हासन ने वहां स्थायी करियर नहीं बनाया। आखिर इसकी वजह क्या थी? इसका जवाब उन्होंने 2017 में इंडिया टुडे साउथ कॉन्क्लेव के दौरान दिया था।

गरीब रिश्तेदार की हैसियत

कमल हासन ने कहा, वह दौर अलग था। मैं हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एक गरीब रिश्तेदार जैसा था। मुझे अपने कपड़े तक खुद धोने पड़ते थे, जबकि वहां के कलाकार बेहद अमीर थे और एक साथ छह-छह फिल्में कर रहे थे। मुझे यह सब बहुत निराशाजनक लगता था। यही एक बड़ी वजह थी कि मैंने वहां ज्यादा समय तक काम नहीं किया।

उन्होंने बताया कि उस समय बॉलीवुड में काले धन और अंडरवर्ल्ड का प्रभाव भी काफी ज्यादा था, जिससे वह खुद को दूर रखना चाहते थे।

क्या ये था सबसे बड़ा खतरा

कमल ने कहा, बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड से बहुत सारे संबंध थे। मैं वहां न तो किसी का विरोध करने के लिए रहना चाहता था और न ही किसी धमकी के आगे झुकना चाहता था। मैंने और मेरे भाई ने बहुत पहले ही फैसला कर लिया था कि हमारा काले धन से कोई लेना-देना नहीं होगा। मैं इस फैसले से आज भी बेहद खुश हूं। उस दौर में भी बिना काले धन के काम करना संभव था और हमने वही रास्ता चुना।

वर्क फ्रंट की बात करें तो कमल हासन हाल ही में निर्देशक मणिरत्नम की फिल्म ठग लाइफ (2025) में नजर आए थे। हालांकि यह फिल्म समीक्षकों और बॉक्स ऑफिस, दोनों ही मोर्चों पर उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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