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JP Nadda Big Statement 140 करोड़ भारतीयों के लिए हेल्थ एआई के फायदे और सावधानियां जानिए

JP Nadda Big Statement जिनेवा में स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का बड़ा बयान: 140 करोड़ भारतीयों के लिए ‘हेल्थ एआई’ ला रहा भारत, जानिए आपके लिए इसके क्या हैं फायदे और खतरे

जिनेवा/नई दिल्ली। दुनिया भर में ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बड़ी बहस छिड़ी है। इसी बीच, जिनेवा में आयोजित 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा (World Health Assembly) में भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जेपी नड्डा ने एक बेहद महत्वपूर्ण विज़न दुनिया के सामने रखा है।

उन्होंने बताया कि भारत कैसे अपनी 140 करोड़ की विशाल आबादी को बेहतर और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए एआई (AI) का इस्तेमाल कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ के सपने को आगे बढ़ाते हुए भारत ने एआई के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए ‘एसएएचआई’ (SAHI – स्वास्थ्य सेवा में एआई रणनीति) और ‘बीओडीएच’ (BODH) जैसे मजबूत निगरानी तंत्र तैयार किए हैं।

लेकिन एक आम नागरिक के तौर पर आपके लिए इस तकनीकी बदलाव का क्या मतलब है? आइए इसे बहुत आसान शब्दों में समझते हैं:

आम नागरिकों के लिए इसका क्या महत्व है? (फायदे)

जब देश की स्वास्थ्य प्रणाली में एआई (AI) पूरी तरह कदम रखेगा, तो आम जनता के जीवन में ये बड़े बदलाव आएंगे:

  • दूर-दराज के गांवों तक पहुंचेगी बेहतरीन डॉक्टरी सलाह: भारत में 22 आधिकारिक भाषाएं हैं और कई ग्रामीण इलाकों में अच्छे डॉक्टरों की कमी है। एआई भाषा की बाधा को दूर करेगा और गांवों में बैठे मरीजों को भी बड़े शहरों के डॉक्टरों जैसी सटीक शुरुआती जांच और सलाह मिल सकेगी।

  • बीमारियों का पहले ही लग सकेगा पता: एआई एल्गोरिदम इंसानी आंखों से भी तेजी से एक्स-रे, सीटी स्कैन या मेडिकल डेटा को पढ़कर कैंसर या दिल की बीमारियों का बेहद शुरुआती दौर में पता लगा सकता है, जिससे समय रहते इलाज संभव होगा।

  • आयुष्मान भारत से जुड़ेगा पूरा सिस्टम: वर्ष 2021 में शुरू हुए ‘आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन’ के साथ मिलकर एआई आपकी मेडिकल हिस्ट्री (पुरानी बीमारियों का रिकॉर्ड) को सुरक्षित रखेगा, जिससे आपको हर बार पुरानी पर्चियां लेकर अस्पताल नहीं भटकना पड़ेगा।

JP Nadda Big Statement (image Social Media) (2).jpg
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एआई से आम नागरिकों के लिए क्या खतरे हैं?

स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने वैश्विक मंच पर चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एआई को जिम्मेदारी से डिजाइन और नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह समाज में असमानता को और बढ़ा सकता है। आम लोगों के लिए इसके मुख्य खतरे ये हैं:

  • गलत डेटा से गलत इलाज का डर: एआई पूरी तरह कंप्यूटर को दिए गए डेटा पर काम करता है। यदि इसे भारत के लोगों के वास्तविक और सही डेटा पर नहीं परखा गया, तो यह गलत बीमारी का अनुमान लगा सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।

  • मेडिकल डेटा चोरी होने का खतरा: आपका स्वास्थ्य रिकॉर्ड (Health Data) बेहद निजी होता है। डिजिटल होने के कारण इसके लीक होने या हैकर्स के हाथ लगने का जोखिम हमेशा बना रहता है।

  • मानवीय संवेदना की कमी: एआई एक मशीन है। यह बीमारी की गणना कर सकता है, लेकिन एक डॉक्टर की तरह मरीज के दर्द और उसकी मानसिक स्थिति को महसूस नहीं कर सकता।

क्या सावधानियां रख रहा है भारत?

इन खतरों से देश के नागरिकों को बचाने के लिए भारत सरकार ने कड़े निगरानी तंत्र (Regulatories) बनाए हैं:

  1. SAHI (साही रणनीति): यह ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) की पहली ऐसी नीति है जो यह तय करती है कि स्वास्थ्य में एआई का उपयोग पूरी तरह नैतिक, पारदर्शी और इंसानों के हित में हो।

  2. BODH (बोध प्लेटफॉर्म): यह एक ऐसा जांच मंच है जो यह पक्का करता है कि किसी भी एआई सॉफ्टवेयर को मरीजों पर इस्तेमाल करने से पहले भारत के असली और जमीनी डेटा पर अच्छी तरह टेस्ट (बेंचमार्क) कर लिया जाए, ताकि वह हर भारतीय के लिए पूरी तरह सुरक्षित हो।

“स्वास्थ्य सेवा में एआई का भविष्य केवल कंप्यूटर कोडिंग या एल्गोरिदम से तय नहीं होगा, बल्कि सरकारों और समाजों के सामूहिक इंसानी फैसलों से तय होगा। भारत केवल एआई नहीं, बल्कि ‘सर्व-समावेशी बुद्धिमत्ता’ (सबका साथ, सबका विकास वाली तकनीक) पर काम कर रहा है।” — श्री जेपी नड्डा, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री

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Author: Tesari Aankh

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