आज के आपाधापी के युग में हर आदमी परेशान है। वह सबसे परेशान है। ये भाव बार बार मन में आता है कि कोई अपना नहीं है। एक क्लेश मन में हमेशा मचा रहता है। पति बेटे, बेटियां नात रिश्तेदार अड़ोस पड़ोस कुछ भी अच्छा नहीं लगता। जो अतृप्त इच्छाएं हैं वह पूरी नहीं हो रहीं। जो पूरी हो सकती हैं वह पूरी करने का मन नहीं कर रहा। खुद से भी खीझ होती है और जब ज्यादा मन विचलित होता है तो ये आक्रोश पति बच्चों पत्नी पर निकलता है। बचा खुचा अड़ोस पड़ोस नात रिश्तेदारी पर निकल जाता है। दोषी कौन है ये इस सवाल का जवाब भी आप हैं और सवाल भी आप हैं।
घर घरवालों से होता है पहला सबक
पहला सबक यही है कि इसे समझना पड़ेगा घर घरवालों से होता है। वरना ईंट गारे से बना मकान घर नहीं होता। गृहणी के बिना घर अधूरा है और गृहपति के बिना भी घर अधूरा है अगर बच्चे न हों तो भी घर अधूरा है। अगर अनाथ हो तो सब कुछ अधूरा है। फिर जिसको सब मिला वह क्यों अधूरा है। आपकी पूर्णता पर अज्ञानता की धूल की चादर इतनी मोटी हो गई है कि सब कुछ पाने के बाद भी सब कुछ अधूरा है। यही अधूरापन आपकी नियति बन गया है। तमाम लोग इसी अधूरेपन का अहसास लिए चले जाते हैं। जो रह जाते हैं वह भी चार दिन बाद फिर उसी अधूरेपन में डूब जाते हैं। आज हम चर्चा करेंगे कैसे आपके घर में सारी खुशियां आ सकती हैं। कैसे आपके घर में पाजिटिव वेबस आ सकती हैं। जो आपको अंधकार से तो निकालें ही साथी आपके घर में आने वाले को सकारात्मक ऊर्जा से भर दें
घर को पूर्ण करें- पूजाघर को बद्रीनाथ नाम दें
घर पूर्ण कैसे करें। पहली चीज हर घर में पूजा का स्थान होता है। उस पूजा के स्थान को नाम दें बद्रीनाथ न हो तो लिखकर टांग दें। एक सद्गृहस्थ सांसारिक जीवन जीने वाला व्यक्ति अपने घर के पूजा स्थल को ‘बद्रीनाथ’ के समान पवित्र और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण बना सकता है। इसके लिए मंदिर की भव्यता की बजाय भक्ति और नियमों के पालन को प्रमुख माना जाता है। इसमें थोड़ी मानसिक और थोड़ी शारीरिक शुद्धता आपके मन को शांत रखेगी।
रसोई को जगन्नाथ नाम दें
भगवान जगन्नाथ पूरे जगत के नाथ हैं। सबका भरण पोषण करते हैं आपकी रसोई भी जगन्नाथ का स्वरूप है। एक सद्गृहस्थ के घर में ‘रसोई जगन्नाथ’ का अर्थ है —अपनी गृहस्थी की रसोई को भगवान जगन्नाथ (विष्णु) का ही भोग कक्ष मानकर उसे पूर्णतः सात्विक, पवित्र और निस्वार्थ भाव से चलाना। इस परंपरा के अनुसार, घर की रसोई में माँ अन्नपूर्णा और महालक्ष्मी का वास माना जाता है। भोजन बनाते समय यह भाव रखें कि आप अपने लिए नहीं, बल्कि स्वयं भगवान के लिए रसोई तैयार कर रहे हैं। इसे पूर्णतः ‘सेवा’ और निष्काम कर्म के रूप में करें। भोजन करते समय परिवार में कोई भी व्यक्ति अन्न का अनादर न करे। कोई अतिथि आए तो उसे साक्षात जगन्नाथ मानकर प्रेम से भोजन कराएं। और शेष भोजन को प्रसाद रूप में ही ग्रहण करें।
ड्राइंगरूम को नाम दें द्वारकानाथ
भगवान श्रीकृष्ण की नगरी द्वारका सबके लिए खुली थी। हर व्यक्ति का वहां प्रवेश था। हर व्यक्ति की सुख सुविधाओं का वहां ध्यान रखा जाता था। आपका अतिथि गृह या ड्राइंगरुम ऐसा ही होना चाहिए।
राम नाथ आपके सोने का कक्ष
जहां आप सोते हैं उस कक्ष को नाम दें राम नाथ। एक सद्गृहस्थ का सोने का कमरा ‘राममय‘ (शांत, पवित्र और सकारात्मक) होना चाहिए। इसे व्यावहारिक और आध्यात्मिक रूप से ऐसा बनाया जाता है, जिससे दिनभर की थकान मिटे और पारिवारिक प्रेम व सात्विकता बनी रहे।








