Hamirpur Bridge Collapse: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल का एक हिस्सा देर रात आए तेज आंधी-तूफान और बारिश के दौरान ढह जाने से कम से कम छह मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य के मलबे में दबे होने की आशंका के बीच राहत एवं बचाव कार्य जारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए अधिकारियों को युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्य संचालित करने के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार मोराकांदर और कंदौर गांवों के बीच बेतवा नदी पर पुल निर्माण का कार्य चल रहा था। गुरुवार और शुक्रवार की दरम्यानी रात करीब दो बजे तेज बारिश और आंधी के दौरान पुल का एक स्लैब अचानक भरभराकर गिर गया। बताया जा रहा है कि कई मजदूर पुल के एक हिस्से पर सो रहे थे, जो मलबे में दब गए।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अरविंद कुमार वर्मा ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच गईं। अब तक छह मजदूरों के शव निकाले जा चुके हैं और राहत कार्य लगातार जारी है। अधिकारियों को आशंका है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।
मुख्यमंत्री योगी ने जताया शोक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि हमीरपुर जिले में बेतवा नदी पर हुए इस दुखद हादसे में लोगों की मृत्यु अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन को एसडीआरएफ के साथ समन्वय बनाकर तेजी से राहत एवं बचाव कार्य चलाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने घायलों के समुचित उपचार और मृतकों के परिजनों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए हैं।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
हादसे के बाद निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था और प्रतिकूल मौसम के दौरान निर्माण कार्य की निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि तेज आंधी और बारिश के पूर्व पर्याप्त एहतियाती कदम उठाए जाने चाहिए थे। प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं।
हाल के वर्षों में पुल हादसों ने बढ़ाई चिंता
हमीरपुर की घटना ऐसे समय सामने आई है जब उत्तर प्रदेश में पुलों और निर्माणाधीन संरचनाओं की गुणवत्ता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। अप्रैल 2026 में मिर्जापुर में गंगा नदी पर बना एक पीपा पुल उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद क्षतिग्रस्त हो गया था। हालांकि उस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई थी, लेकिन निर्माण गुणवत्ता को लेकर बहस छिड़ गई थी।
इसके अलावा विभिन्न जिलों में बीते वर्षों के दौरान कई पुलों, पुलियाओं और एप्रोच मार्गों के धंसने या क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट, मौसम आधारित सुरक्षा प्रोटोकॉल और निर्माण गुणवत्ता की कड़ी निगरानी आवश्यक है।
जारी है राहत अभियान
एसडीआरएफ, पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त टीमें मलबा हटाने और संभावित रूप से फंसे श्रमिकों की तलाश में जुटी हुई हैं। प्रशासन ने आसपास के अस्पतालों को अलर्ट पर रखा है तथा घायलों के उपचार की विशेष व्यवस्था की गई है।
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फिलहाल पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है और मृतकों की पहचान तथा उनके परिजनों को सूचना देने की प्रक्रिया जारी है।
(इनपुट: आईएएनएस)








