वेब स्टोरी

ई-पेपर

लॉग इन करें

हे राम! फर्जी दस्तावेजों के सहारे बिकती रही सरकारी जमीन, 60 साल बाद मिला इंसाफ

Sambhal News: संभल-मुरादाबाद मार्ग स्थित गांव तख्त गोसाईं की करीब 101 करोड़ रुपये मूल्य की 5.06 एकड़ ग्राम सभा की जमीन को आखिरकार 60 साल से अधिक लंबे कानूनी विवाद के बाद सरकार ने वापस अपने नाम दर्ज करा लिया। फर्जी पट्टों और कथित कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर निजी नाम पर दर्ज हुई इस जमीन को लेकर उपसंचालक चकबंदी (डीडीसी) न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व में पारित आदेश को निरस्त कर दिया और पूरी जमीन दोबारा ग्राम सभा के नाम दर्ज करने के निर्देश दिए।

न्यायालय ने अपने आदेश में माना कि सईदुल रहमान के पक्ष में पहले जो आदेश पारित हुआ था, वह न्यायालय को गुमराह कर हासिल किया गया था। इसलिए उस आदेश को निरस्त करते हुए जमीन को उसके मूल स्वरूप में ग्राम सभा के खाते में दर्ज करने का आदेश दिया गया।

जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने बताया कि सरकारी जमीन को अवैध तरीके से खुर्दबुर्द कर बेचा जा रहा था। विस्तृत जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब पूरी जमीन फिर से सरकार के नाम दर्ज हो गई है।

इसे भी पढ़ें- https://tesariaankh.com/lucknow-weather-heatwave-fire-incidents-monsoon-delay-june-2026/

1954 से शुरू हुआ था विवाद

शासन ने 11 अगस्त 1954 को जारी गजट अधिसूचना के जरिए मौजा तख्त गोसाईं को गैर-आबाद घोषित करते हुए उसका प्रबंधन तत्कालीन नगर पालिका परिषद, संभल को सौंप दिया था। गाटा संख्या 206, 207, 233, 242/378 और 279 की कुल 5.06 एकड़ जमीन को लेकर वर्षों से विवाद चला आ रहा था।

चकबंदी के दौरान सामने आया मामला

संभल में वर्ष 1995 में गांव में चकबंदी शुरू हुई तो यह जमीन ग्राम सभा के खाते में दर्ज मिली। इसी दौरान सईदुल रहमान ने दावा किया कि तत्कालीन नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष साहू चिरंजीलाल ने उन्हें इस जमीन का पट्टा दिया था। वहीं अमीर चंद्र नामक एक अन्य व्यक्ति ने भी इस जमीन पर अपना अधिकार जताया।

प्रारंभिक जांच में दोनों दावों को खारिज कर दिया गया था, लेकिन मामला उपसंचालक चकबंदी (डीडीसी) न्यायालय पहुंचा, जहां बाद में सईदुल रहमान के पक्ष में आदेश पारित हो गया।

जमीन बेचने के भी लगे आरोप

आरोप है कि आदेश मिलने के बाद सईदुल रहमान और उनके सहयोगियों ने इस जमीन के बड़े हिस्से की बिक्री विभिन्न लोगों को शुरू कर दी। बाद में मामले की दोबारा जांच हुई, जिसमें फर्जी दस्तावेजों और तथ्यों को छिपाकर आदेश प्राप्त किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद डीडीसी न्यायालय ने पहले का आदेश निरस्त करते हुए पूरी जमीन फिर से ग्राम सभा के नाम दर्ज करने का फैसला सुनाया।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

Leave a Comment

और पढ़ें
और पढ़ें