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Ayodhya जमीन और चढ़ावा घोटाला, हिली आस्था की नींव तो बिगड़े चुनावी समीकरण

राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और अयोध्या में भूमि घोटाले का जिन्न एक बार फिर बाहर आना भाजपा के लिए खतरे की घंटी है। इसके अलावा भाजपा के दिग्गज नेता नितिन गडकरी ई 20 पेट्रोल को लेकर मुसीबत में आ गए हैं। ई 20 पेट्रोल ने गाड़ियों का बाजा बजा दिया है। अमित शाह की यूपी राजनीति से इन दिनों अवकाश पर चल रहे हैं। धर्मेद्र प्रधान पेपरों के आउट होने की मार से लगी चोटों को ठीक कराने में जुटे हैं यानी घायल हैं। इसलिए मौन हैं। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रभावी सिपहसालार एक एक कर ढेर हो रहे हैं ऐसे में न सिर्फ 2027 के यूपी विधानसभा के चुनाव बल्कि 2029 का लोकसभा चुनाव भी भगवा पार्टी के लिए खतरे की आहट वाला बन गया है।

योगी चल रहे सही राह

हालांत को भांप कर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक बार फिर हिन्दू मुस्लिम का नैरेटिव सेट कर ने में जुट गए हैं। हालांकि कहते हैं न कि बार बार काठ की हांडी नहीं चढ़ती ऐसे में ये नेरेटिव सेट होगा या नहीं ये तो वक्त बताएगा लेकिन अयोध्या राम मंदिर से जुड़े दोनों मामलों ने भाजपा की चूलें जरूर हिला दी हैं। भाजपा की मैनेजमेंट टीम बहुत तेजी से इस मसले पर हीलिंग में जुटी है। कोई इस सब से बड़ा मुद्दा तलाशा जा रहा है जो इन सब विसंगतियों को गर्त में ले जाए और उसके सहारे चुनावी वैतरणी पार कर ली जाए। लेकिन अयोध्या का संदेश गांव गांव तक जितनी तेजी से फैला है और इस देश की आस्थावान जनता को जो सदमा लगा है उसकी भरपाई कैसे होगी ये एक बड़ा सवाल है।

सबकी नजरें एक बार फिर मोदी की ओर हैं क्या राष्ट्रवाद की लहर क्रिएट करने में हर बार की तरह वह फिर कामयाब हो पाएंगे या फिर हिन्दू मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण पर भरोसा करेंगे। लेकिन इन दोनों कांडों के बाद जनता के आक्रोश को देखकर लगता यही है कि यूपी में चुनाव इन्हें थोड़ा आगे खिसकाने पड़ेंगे। ताकि इन्हें तैयारी का पूरा मौका मिल सके। ऐसे में चुनाव मार्च अप्रैल के मध्य कराए जा सकते हैं।

एक नजर इतिहास पर

1984 के आम चुनावों में भाजपा को केवल 2 सीटें मिली थीं। इसके बाद, वीएचपी और आरएसएस के साथ मिलकर पार्टी ने राम मंदिर आंदोलन को अपनी मुख्य राजनीतिक पहचान बनाया, आंदोलन के चरम पर होने के कारण 1989 में भाजपा की सीटें 89 तक पहुँच गईं और 1991 में यह संख्या 120 हो गई, 2019 में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला राम मंदिर के पक्ष में आने से भाजपा के इस सांस्कृतिक और राजनीतिक मुद्दे को बड़ी सफलता मिली, जिसके बाद 2024 तक पार्टी का ग्राफ तेजी से ऊपर गया।

टल जाएंगे यूपी चुनाव

राम मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के तुरंत बाद, 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा फैजाबाद (अयोध्या) सीट हार गई। स्थानीय मुद्दों जैसे जमीन अधिग्रहण और मुआवजे को इसकी मुख्य वजह माना गया। कुछ लोगों के मुताबिक श्री राम जन्मभूमि परिसर से जुड़ा जमीन घोटाला भी इसकी बड़ी वजह बना। अब जून-जुलाई 2026 में मंदिर के दान पात्रों में कथित गबन और चोरी के मामले सामने आए, जिस पर उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी (SIT) का गठन किया है। ट्रस्टियों में चम्पत राय और अनिल मिश्र के इस्तीफे भी हुए हैं लेकिन जनता इससे संतुष्ट नहीं दिख रही। ऐसे में देखना ये होगा कि भाजपा अपने प्रति जनता के विश्वास को बहाल करने में कैसे सफल होगी।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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