वेब स्टोरी

ई-पेपर

लॉग इन करें

2027 में अनिल प्रधान की राह आसान नहीं, कर्वी सीट पर भाजपा की बढ़ी चुनौती

भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट की कर्वी (सदर) विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव को लेकर अभी से सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी के विधायक अनिल प्रधान के सामने इस बार अपनी सीट बचाए रखना पिछली बार जितना आसान नहीं माना जा रहा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि मौजूदा हालात इसी तरह बने रहे तो कर्वी सीट पर भाजपा और सपा के बीच कांटे का मुकाबला देखने को मिल सकता है।

हालांकि अनिल प्रधान को अपने जनाधार और क्षेत्र में सक्रियता पर पूरा भरोसा है, लेकिन दूसरी ओर भाजपा भी इस सीट को दोबारा अपने कब्जे में लेने की तैयारी में जुटी हुई है। इसी वजह से कर्वी सीट को इस बार बुंदेलखंड की सबसे दिलचस्प सीटों में से एक माना जा रहा है।

2022 की जीत, लेकिन चुनौती अभी खत्म नहीं

2022 के विधानसभा चुनाव में अनिल प्रधान ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और तत्कालीन मंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय को करीब 21 हजार वोटों से हराया था। यह जीत सपा के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता थी। हालांकि चुनाव हारने के बाद भी चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे हैं। स्थानीय राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि भाजपा एक बार फिर उन्हें मैदान में उतारती है तो मुकाबला पहले से अधिक कड़ा हो सकता है।

भाजपा की रणनीति, सपा की परीक्षा

भाजपा इस सीट को वापस जीतने के लिए संगठन से लेकर बूथ स्तर तक तैयारी कर रही है। दूसरी ओर अनिल प्रधान के सामने अपनी पिछली जीत के वोट समीकरण को बनाए रखने की चुनौती होगी। खासकर तब, जब चुनावी माहौल में हर दल अपने सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को मजबूत करने में जुटा होगा।

जातीय समीकरण निभाएंगे अहम भूमिका

कर्वी विधानसभा सीट पर जातीय समीकरण हमेशा चुनावी नतीजों को प्रभावित करते रहे हैं। भाजपा अपने पारंपरिक ब्राह्मण मतदाताओं को एकजुट रखने की कोशिश करेगी, जबकि सपा के लिए पिछड़े, दलित और अन्य समर्थक वर्गों का भरोसा बनाए रखना अहम होगा। चुनाव नजदीक आते-आते इन समीकरणों का असर और साफ दिखाई दे सकता है।

स्थानीय मुद्दे भी बनेंगे बड़ा चुनावी हथियार

मेडिकल कॉलेज, किसानों की समस्याएं, सिंचाई, सड़क और विकास जैसे कई मुद्दे अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। विपक्ष इन मुद्दों को चुनाव में प्रमुखता से उठा सकता है। ऐसे में अनिल प्रधान पर विकास कार्यों को लेकर जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने का दबाव रहेगा।

अधिकारियों से टकराव भी बना रहता है चर्चा का विषय

अनिल प्रधान कई बार जनहित के मुद्दों को लेकर अधिकारियों से खुलकर भिड़ते नजर आए हैं। उनके और प्रशासन के बीच हुए विवाद अक्सर सुर्खियां भी बने हैं। समर्थकों का कहना है कि वह जनता की आवाज उठाते हैं, जबकि विपक्ष इसे उनकी टकराव वाली राजनीति बताकर निशाना बनाता है। चुनाव के दौरान यह मुद्दा भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकता है।

फिलहाल चुनाव में अभी समय है और राजनीतिक परिस्थितियां बदल भी सकती हैं। लेकिन मौजूदा माहौल को देखते हुए इतना जरूर कहा जा सकता है कि कर्वी विधानसभा सीट पर 2027 का मुकाबला बेहद रोचक रहने के संकेत मिल रहे हैं। आखिरकार किसे जीत मिलेगी और किसे हार, इसका फैसला हमेशा की तरह जनता अपने वोट से करेगी।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

और पढ़ें
और पढ़ें