Ex IAS Dhanendra Kumar Death: भारत के पहले Competition Commission of India (CCI) अध्यक्ष और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी धनेंद्र कुमार का 28 मई, गुरुवार देर रात दिल्ली के हौज खास स्थित आवास में आग लगने की घटना में निधन हो गया। प्रारंभिक जांच के अनुसार आग एयर कंडीशनर (एसी) के इनडोर यूनिट में हुए संभावित विस्फोट के बाद लगी। हादसे में उनके पुत्र घायल हुए हैं और उनका अस्पताल में उपचार चल रहा है।
दिल्ली पुलिस के अनुसार गुरुवार रात लगभग 11:18 बजे दक्षिण दिल्ली के हौज खास स्थित उनके आवास में अचानक आग लग गई। उस समय घर में परिवार के सदस्यों और घरेलू कर्मचारियों समेत पांच लोग मौजूद थे। सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की कई टीमें मौके पर पहुंचीं और तत्काल बचाव अभियान शुरू किया गया।
दमकल कर्मियों ने धनेंद्र कुमार और उनके पुत्र को घर से सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन 80 वर्षीय धनेंद्र कुमार को बचाया नहीं जा सका। बताया जा रहा है कि धुएं के कारण उनकी हालत गंभीर हो गई थी। पुलिस और फोरेंसिक टीम मामले की जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में किसी साजिश या आपराधिक पहलू के संकेत नहीं मिले हैं।
प्रशासनिक सेवा का शानदार सफर
1946 में जन्मे धनेंद्र कुमार 1968 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी थे। हरियाणा कैडर से जुड़े कुमार ने अपने लंबे प्रशासनिक करियर में केंद्र और राज्य सरकार के कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।
उन्होंने रक्षा मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा संस्कृति मंत्रालय में सचिव के रूप में सेवाएं दीं। इसके अलावा वे ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (REC) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भी रहे। हरियाणा सरकार में उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव, वित्त आयुक्त तथा हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (HSIIDC) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।
विश्व बैंक में भारत का प्रतिनिधित्व
नवंबर 2005 से जनवरी 2009 तक धनेंद्र कुमार विश्व बैंक में भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान के कार्यकारी निदेशक रहे। इस दौरान उन्होंने दक्षिण एशिया के आर्थिक विकास और वित्तीय सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों में भूमिका निभाई।
भारत के पहले सीसीआई अध्यक्ष
फरवरी 2009 में उन्हें Competition Commission of India का पहला अध्यक्ष नियुक्त किया गया। जून 2011 तक अपने कार्यकाल में उन्होंने भारत में प्रतिस्पर्धा कानून की संस्थागत नींव मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके नेतृत्व में आयोग ने निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने, एकाधिकारवादी प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाने और बाजार में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में प्रतिस्पर्धा नियमन की वर्तमान व्यवस्था की आधारशिला रखने वालों में धनेंद्र कुमार अग्रणी रहे।
नीति निर्माण में सक्रिय भूमिका
सेवानिवृत्ति के बाद भी वे सार्वजनिक नीति और आर्थिक सुधारों से जुड़े रहे। कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा नीति (National Competition Policy) तैयार करने के लिए उनके नेतृत्व में समिति गठित की थी। इसके अतिरिक्त आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय ने उन्हें रियल एस्टेट परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए गठित SAPREP समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया था।
वे Competition Advisory Services India LLP (COMPAD) के संस्थापक अध्यक्ष भी थे तथा भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA) में School of Competition Law के प्रधान सलाहकार और मुख्य मार्गदर्शक के रूप में जुड़े रहे।
सम्मान और विरासत
औद्योगिक विकास में योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रीय नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया था। सार्वजनिक प्रशासन और नीति निर्माण में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी प्रदान की गई थी।
धनेंद्र कुमार उन चुनिंदा नौकरशाहों में गिने जाते हैं जिन्होंने प्रशासन, आर्थिक सुधार, प्रतिस्पर्धा कानून और संस्थागत विकास के क्षेत्र में स्थायी छाप छोड़ी। भारत के पहले सीसीआई अध्यक्ष के रूप में उनका योगदान देश के आर्थिक और नियामकीय इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा।
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