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PM Modi Netherlands Visit Impact: भारत-डच सहयोग को मिला ‘पावर बूस्टर’, सेमीकंडक्टर और डिजिटल क्रांति को लगेंगे पंख

PM Modi Netherlands Visit Impact: नीदरलैंड की राजधानी द हेग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया यात्रा और वहाँ के शीर्ष व्यापारिक दिग्गजों व शाही परिवार के साथ हुई बैठकें भारत के वैश्विक और आर्थिक कूटनीति के इतिहास में एक नया मील का पत्थर साबित हुई हैं। इस दौरे ने न केवल द्विपक्षीय संबंधों को एक नई दिशा दी है, बल्कि भारत की सेमीकंडक्टर (चिप निर्माण), इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल क्रांति की महत्वाकांक्षाओं को वैश्विक स्तर पर एक बड़ा ‘पावर बूस्टर’ दिया है।

इस पूरी यात्रा और बैठकों के घटनाक्रम को अगर विश्लेषणात्मक नजरिए से देखें, तो भारत-नीदरलैंड संबंधों और भारत की आर्थिक प्रगति पर इसके चार सबसे बड़े इम्पैक्ट (प्रभाव) दिखाई देते हैं:

1. सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में ‘मास्टरस्ट्रोक’: टाटा और ASML डील

इस दौरे का सबसे बड़ा और गेम-चेंजिंग इम्पैक्ट सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में हुआ है। पीएम मोदी और नीदरलैंड के पीएम रॉब जेटन की मौजूदगी में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और डच कंपनी ASML (जो चिप बनाने वाली मशीनों की दुनिया की सबसे बड़ी और इकलौती सप्लायर है) के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ।

  • असर: इस समझौते के तहत ASML गुजरात के धोलेरा में टाटा की आगामी सेमीकंडक्टर फैसिलिटी की स्थापना और विस्तार में तकनीकी सहयोग देगी।

  • दूरगामी परिणाम: भारत अब चिप मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ेगा। यह न केवल देश के युवाओं के लिए हाई-टेक रोजगार पैदा करेगा, बल्कि भारत को चिप के लिए ताइवान या चीन जैसे देशों पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।

2. भारत के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर डच कंपनियों का बढ़ता भरोसा

सीईओ राउंडटेबल बैठक में नीदरलैंड्स की दिग्गज कंपनियों के प्रमुखों ने पिछले एक दशक में भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और लेबर मार्केट में आए बदलावों की खुलकर तारीफ की।

  • शिपिंग और पोर्ट्स में क्रांति: रोटरडम पोर्ट, रॉयल आईएचसी और एपीएम टर्मिनल्स जैसी लॉजिस्टिक्स और शिपिंग कंपनियों के प्रमुखों ने पीएम मोदी की पोर्ट-आधारित विकास (Port-led development) की समझ की सराहना की। डच कंपनियां अब भारतीय शिपयार्ड्स की मदद से बड़े ड्रेजिंग जहाज बनाने, मुंबई वर्कशॉप का विस्तार करने और कंटेनर उत्पादन को बढ़ाने पर बड़ा निवेश करने जा रही हैं।

  • एविएशन सेक्टर का विस्तार: डच एयरलाइन ‘केएलएम’ (KLM Royal Dutch Airlines) ने भारत में अपने 70 साल पुराने जुड़ाव को याद करते हुए हैदराबाद को देश में अपने चौथे बड़े डेस्टिनेशन के रूप में शामिल किया है, जो भारत के बढ़ते एविएशन मार्केट और डच भरोसे को दिखाता है।

3. एग्रीकल्चर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में नई साझेदारी

ग्लोबल वार्मिंग और फूड सिक्योरिटी के इस दौर में नीदरलैंड की कृषि तकनीक (Agritech) दुनिया में सबसे उन्नत मानी जाती है।

  • खाद्य सुरक्षा (Food Security): डच कृषि कंपनियों (जैसे रिज्क ज्वान और रॉयल एचजेडपीसी) ने साफ किया कि भारत का कृषि विकास और दोनों देशों का सहयोग वैश्विक खाद्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए जरूरी है।

  • भविष्य की तकनीक (AI): टेक्नोलॉजी निवेशक कंपनी ‘प्रोसेस’ (Prosus) के सीईओ ने स्पष्ट किया कि भारत की विकास गाथा पर उन्हें पूरा भरोसा है और वे भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल इकोसिस्टम के क्षेत्र में अपने निवेश को काफी बड़े स्तर पर बढ़ाने जा रहे हैं।

4. ‘सॉफ्ट पावर’ और कूटनीतिक संबंधों को नई ऊर्जा

आर्थिक मोर्चे के अलावा, कूटनीतिक स्तर पर भी यह दौरा बेहद सफल रहा। पीएम मोदी ने पैलेस हाउस टेन बॉश में नीदरलैंड के राजा विलेम-एलेक्जेंडर और महारानी मैक्सिमा से मुलाकात की। शाही परिवार द्वारा पीएम के सम्मान में दोपहर भोज का आयोजन करना भारत के प्रति उनके गहरे सम्मान को दर्शाता है।

इसके साथ ही, भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर डच कंपनियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में यूरोपीय संघ के साथ भारत का व्यापारिक मार्ग और आसान होने वाला है।

संक्षेप में कहें तो, पीएम मोदी का यह नीदरलैंड दौरा सिर्फ एक औपचारिक राजनयिक यात्रा नहीं थी, बल्कि यह “मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” को वैश्विक पूंजी और डच तकनीक से जोड़ने का एक ठोस आर्थिक प्रयास था। डच सीईओ के बयानों और टाटा-ASML की डील से साफ है कि वैश्विक मंदी की आशंकाओं के बीच दुनिया भारत को भविष्य के सबसे सुरक्षित और बढ़ते हुए निवेश केंद्र (Investment Hub) के रूप में देख रही है। डच सीईओ बौदेविज्न सीमन्स के शब्दों में कहें तो—“भारत के लिए सबसे अच्छा समय अभी आना बाकी है।”

भारत-नीदरलैंड के 400 साल पुराने ऐतिहासिक संबंध

पीएम मोदी की इस यात्रा के बीच हमारे पाठकों के लिए यह जानना भी बेहद दिलचस्प है कि नीदरलैंड (जिसे अक्सर ‘हॉलैंड’ भी कहा जाता है) और भारत का रिश्ता आज का नहीं, बल्कि सदियों पुराना है:

400 वर्षों से अधिक का इतिहास:

दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों की शुरुआत साल 1602 में ‘डच ईस्ट इंडिया कंपनी’ के भारत आगमन के साथ हुई थी। आजादी के बाद 1947 से दोनों देशों के बीच आधिकारिक राजनयिक संबंध हैं।

पानी को हराकर बसा देश:

नीदरलैंड अपनी अद्भुत इंजीनियरिंग के लिए दुनिया भर में मशहूर है। इस देश का लगभग एक-चौथाई (25%) हिस्सा समुद्र तल (Sea Level) से नीचे है, जिसे डच लोगों ने अपनी बेजोड़ तकनीक से पानी को पीछे धकेलकर इंसानों के रहने योग्य बनाया है। यही कारण है कि भारत आज जल प्रबंधन (Water Management) के लिए नीदरलैंड के साथ मिलकर काम कर रहा है।

वैश्विक शांति का केंद्र ‘द हेग’:

जहाँ पीएम मोदी ने डच शाही परिवार और पीएम से मुलाकात की, वही ‘द हेग’ शहर दुनिया में ‘शांति की राजधानी’ के रूप में जाना जाता है। यहाँ संयुक्त राष्ट्र का अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice) और पीस पैलेस स्थित हैं।

पर्यटन और संस्कृति का अनूठा संगम:

नहरों और पवनचक्कियों (Windmills) के लिए प्रसिद्ध इस देश में केउकेंहोफ गार्डन (यूरोप का बगीचा) है जहाँ वसंत में लाखों ट्यूलिप खिलते हैं, वहीं ‘गिथूर्न’ जैसा खूबसूरत कार-मुक्त गाँव भी है जिसे ‘नीदरलैंड का वेनिस’ कहा जाता है।

वर्तमान समय में ट्यूलिप और पवनचक्कियों का यह खूबसूरत देश भारत की सेमीकंडक्टर, एआई और आधुनिक बुनियादी ढांचे की महत्वाकांक्षाओं का सबसे मजबूत और भरोसेमंद ग्लोबल पार्टनर बनकर उभरा है।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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