Lifestyle Alert: प्रचंड गर्मी में कहीं आप ‘ज़हर’ तो नहीं खा रहे? सेहत बचानी है तो बदलें अपनी ये आदतें
कहते हैं ‘सेहत है तो सब कुछ है’, लेकिन यह सेहत केवल अच्छे कपड़ों से नहीं, बल्कि आपकी लाइफस्टाइल और खान-पान से बनती है। आजकल उत्तर भारत में प्रचंड गर्मी का प्रकोप है। हालांकि बीच-बीच में बारिश से राहत मिली है, लेकिन इस बदलते मौसम में खान-पान की जरा सी लापरवाही आपको अस्पताल पहुंचा सकती है।
1. सड़क किनारे के ‘लालच’ से बचें
घर से बाहर निकलते ही जब प्यास सताती है, तो गन्ने का रस या ठेलों पर कटे हुए फल (तरबूज, खीरा, ककड़ी) बड़े लुभावने लगते हैं। लेकिन सावधान! यह शीतलता बीमारियों का न्योता है।
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गन्ने का रस: मशीन के आसपास की गंदगी और मक्खियाँ टाइफाइड और पीलिया जैसी बीमारियाँ फैलाती हैं।
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कटे फल: ठेलों पर घंटों से कटे रखे तरबूज और खीरे धूल और बैक्टीरिया का घर होते हैं।
2. तरबूज का ‘खूनी’ खेल: क्या आप रंग खा रहे हैं?
हाल ही में तरबूज खाने से मौत की कुछ चौंकाने वाली खबरें आई हैं। अक्सर तरबूज को अंदर से लाल दिखाने के लिए उसमें खतरनाक केमिकल और रंगों का इंजेक्शन लगाया जाता है।
तीसरी आँख की टिप: बाहर से साबुत फल लाएं। उसे कुछ देर गर्म पानी में भिगोकर रखें, फिर अच्छे से धोकर फ्रिज में ठंडा करें। खुद काटकर खाना ही सुरक्षित है।
3. शिकंजी और बर्फ का ‘धोखा’
ठेलों पर सोडा और नींबू की शिकंजी पीते समय ध्यान दें। अगर आप केवल काला नमक और नींबू वाला सोडा पी रहे हैं, तो ठीक है। लेकिन खुली बर्फ और पहले से बना चीनी का घोल जानलेवा हो सकता है। यह बर्फ अक्सर गंदे पानी से बनी होती है और चीनी का घोल बासी हो सकता है।
4. बासी खाने को कहें ‘ना’
गर्मी में बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपते हैं। सुबह की बनी दाल या सब्जी कितनी भी स्वादिष्ट क्यों न हो, उसे शाम को खाने का जोखिम न लें। बासी खाना फूड पॉइजनिंग का सबसे बड़ा कारण है।
5. स्ट्रीट फूड: ज़ायका या बीमारी?
बच्चों को मैगी, नूडल्स, वेज रोल या पुलाव बहुत पसंद आते हैं। बाहर के पूड़ी-भटूरे भी हमें आकर्षित करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन्हें बनाने में कैसा पानी इस्तेमाल हो रहा है?
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पानी के बताशे (गोलगप्पे): बाहर के गंदे पानी के बताशे खाने से बचें।
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विकल्प: मन है तो बाहर से बताशे खरीद लाएं, घर पर मटर उबालें और साफ पानी से घर में ही मसाला तैयार करें। यह स्वाद भी देगा और सेहत भी।
निष्कर्ष
लाइफस्टाइल सुधारने का मतलब सिर्फ दिखावा नहीं, बल्कि अपनी आदतों में सुधार है। इस गर्मी में ‘घर का बना और ताज़ा’ ही आपका सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। याद रखिये, इलाज से बेहतर हमेशा बचाव होता है।
— सम्पादक, तीसरी आँख








