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पत्रकारिता के छात्रों के लिए ‘लीगल रिपोर्टिंग’ में छिपी हैं भविष्य की राहें: JIMMC में विशेषज्ञों का मंथन

कानपुर। वर्तमान मीडिया परिदृश्य में सामान्य रिपोर्टिंग से हटकर ‘स्पेशलाइज्ड जर्नलिज्म’ का महत्व बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में, जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन (JIMMC), साकेत नगर ने अपने छात्रों को किताबी ज्ञान से आगे ले जाते हुए “Legal Journalism as a Career: Skills, Scope & Real-World Insights” विषय पर एक व्यावहारिक कार्यशाला का आयोजन किया।

इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि एक शिक्षण संस्थान कैसे छात्रों को उद्योग (Industry) की जरूरतों के हिसाब से तैयार कर सकता है।

1. थ्योरी और प्रैक्टिकल का मेल

संस्थान के असिस्टेंट प्रोफेसरों—श्री राम जी बाजपेई और श्री दीपक नेगी—ने संस्थान के 20 वर्षों के सफर को ऑडियो-विजुअल के माध्यम से प्रस्तुत कर यह दिखाया कि कैसे पत्रकारिता शिक्षण समय के साथ तकनीकी रूप से उन्नत हुआ है। मंच का कुशल संचालन सुश्री आकृति अवस्थी ने किया।

2. विशेषज्ञता ही बनेगी करियर का आधार

दैनिक जागरण की असिस्टेंट एडिटर श्रीमती माला दीक्षित ने छात्रों को स्पष्ट किया कि कानूनी पत्रकारिता केवल अदालती कार्यवाही की रिपोर्टिंग नहीं है, बल्कि यह तथ्यों की सटीकता और समाज के प्रति जिम्मेदारी का परीक्षण है। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षण संस्थानों में ही छात्रों को ‘तथ्यों की शुद्धता’ का संस्कार मिलना चाहिए।

वहीं, वीएसएसडी पीजी कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. नीरू टंडन ने शिक्षा और नैतिकता के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वकालत और पत्रकारिता दोनों ही पेशे समाज को दिशा देने वाले हैं।

Jimmc-Kanpur

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3. ‘टॉक शो’ के जरिए रियल-वर्ल्ड इनसाइट्स

कोर्स कॉर्डिनेटर डॉ. संजय चंदानी द्वारा संचालित टॉक शो इस कार्यशाला का सबसे उपयोगी हिस्सा रहा। इसमें प्रवीन मोहता (NBT), अनंत शेखर मिश्रा (TOI) और महेश शर्मा जैसे अनुभवी पत्रकारों ने छात्रों के साथ फील्ड के असली अनुभव साझा किए।

  • सीख: छात्रों ने जाना कि कानूनी बारीकियों को सरल भाषा में आम जनता तक कैसे पहुँचाया जाए।

4. अकादमिक नेतृत्व की उपस्थिति

संस्थान के डायरेक्टर डॉ. उपेंद्र पांडे के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यशाला में शहर के अन्य प्रमुख शिक्षाविदों—डॉ. अस्मिता दुबे, डॉ. दिव्या चौधरी और श्री अमरदीप सिंह—ने भी शिरकत की। यह दर्शाता है कि संस्थान अपने छात्रों को एक ‘मल्टी-डिसिप्लिनरी’ वातावरण प्रदान कर रहा है।

निष्कर्ष: यह कार्यशाला इस बात का प्रमाण है कि पत्रकारिता शिक्षण संस्थान अब केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे छात्रों को ‘स्किल-बेस्ड लर्निंग’ के जरिए उस कठिन मीडिया जगत के लिए तैयार कर रहे हैं, जहाँ विशेषज्ञता (Specialization) ही सफलता की कुंजी है।

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विशेष आभार: कार्यक्रम के अंत में श्री धीरज शर्मा ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यशाला में श्री अखिलेश मिश्र, श्री देवेंद्र मणि मिश्र और श्री राजेश याग्निक सहित बड़ी संख्या में जिज्ञासु छात्र उपस्थित रहे।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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