Strait of Hormuz Conflict and India’s Oil Strategy: पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र से उठी चिंगारियां अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के ‘पावर हाउस’ कहे जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) तक पहुँच चुकी हैं। इज़राइल-ईरान संघर्ष के 30वें दिन भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता रणनीतिक नहीं, बल्कि ‘अस्तित्वगत’ है। यदि दुनिया की 20% तेल आपूर्ति का यह रास्ता बंद होता है, तो भारत के लिए यह केवल ऊर्जा संकट नहीं, बल्कि एक पूर्ण आर्थिक युद्ध जैसी स्थिति होगी।
रणनीतिक सक्रियता: फाइलों से निकलकर एक्शन मोड में सरकार
कल की रक्षा मंत्रालय की आपातकालीन बैठक और आज सुबह राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई ‘अनौपचारिक मंत्री समूह’ (IGoM) की बैठक ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब किसी ‘चमत्कार’ के भरोसे नहीं बैठा है। सरकार का पूरा ध्यान इस समय स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) के विवेकपूर्ण उपयोग और ‘डिस्ट्रेस मैनेजमेंट’ पर है। कच्चे तेल के आयात के लिए रूस और अन्य वैकल्पिक मार्गों को सक्रिय करना इसी कड़ी का हिस्सा है, ताकि खाड़ी देशों पर निर्भरता को कम से कम जोखिम पर लाया जा सके।
आर्थिक मोर्चे पर अग्निपरीक्षा: रुपया और शेयर बाजार का गणित
इस संकट का सबसे गहरा घाव भारतीय वित्तीय बाजारों पर पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल सीधे तौर पर हमारे आयात बिल को बढ़ा रहा है, जिससे ‘चालू खाता घाटा’ (CAD) बढ़ने का खतरा है।
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शेयर बाजार की अस्थिरता: विदेशी निवेशकों की निकासी ने सेंसेक्स और निफ्टी में डर का माहौल बना दिया है। बाजार को इस समय सरकारी हस्तक्षेप और ठोस आर्थिक संकेतों की दरकार है।
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रुपये की मजबूती: डॉलर के मुकाबले रुपये को थामे रखना आरबीआई के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। यदि तेल की कीमतें अनियंत्रित हुईं, तो रुपये का अवमूल्यन घरेलू महंगाई को और अधिक भड़का सकता है।

पीएम मोदी का ‘अनुशासन’ मंत्र बनाम लॉकडाउन का डर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘कोरोना काल’ की याद दिलाकर देश को किसी बड़े संकट के लिए मानसिक रूप से तैयार रहने का जो संकेत दिया है, वह दूरदर्शिता का परिचायक है। हालांकि गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि लॉकडाउन जैसा कोई कदम नहीं उठाया जाएगा, लेकिन ‘कोरोना प्रोटोकॉल’ जैसा अनुशासन अब संसाधनों के उपयोग में दिखाना होगा। सरकार की योजना लॉकडाउन की नहीं, बल्कि ‘संसाधन प्रबंधन’ की है, ताकि आपूर्ति श्रृंखला टूटने न पाए।
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ईंधन नियंत्रण: ‘इवन-ऑड’ और ‘वर्क फ्रॉम होम’ का नया दौर
ऊर्जा बचाने के लिए सरकार के तरकश में दो बड़े तीर हैं—’इवन-ऑड’ और ‘वर्क फ्रॉम होम’।
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इवन-ऑड: निजी वाहनों के सीमित उपयोग से रोजाना लाखों बैरल तेल की बचत की जा सकती है। यह व्यवस्था न केवल ईंधन बचाएगी, बल्कि युद्ध काल में रसद आपूर्ति के लिए सड़कों को खाली भी रखेगी।
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वर्क फ्रॉम होम: डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करके परिवहन की मांग को न्यूनतम स्तर पर लाना सरकार की प्राथमिकता में है। इससे दफ्तरों और परिवहन में होने वाली अनावश्यक ऊर्जा खपत पर तत्काल रोक लगेगी।
फेक न्यूज और पैनिक बाइंग: सबसे बड़ा आंतरिक खतरा
IGoM की बैठक में यह बात उभर कर आई है कि दुश्मन की मिसाइलों से ज्यादा खतरनाक सोशल मीडिया पर फैलने वाली ‘फेक न्यूज’ है। तेल की कमी या महंगाई की अफवाहें जनता में अफरा-तफरी पैदा कर सकती हैं, जिससे बाजार का संतुलन बिगड़ सकता है। सरकार ने सख्त निर्देश दिए हैं कि केवल आधिकारिक बुलेटिन पर ही भरोसा किया जाए, ताकि कृत्रिम किल्लत (Artificial Scarcity) की स्थिति पैदा न हो।
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निष्कर्ष: संयम ही सबसे बड़ी शक्ति
भारत के लिए आने वाले दिन परीक्षा की घड़ी हैं। ऊर्जा संकट से निपटने के लिए सरकार की रणनीति और जनता का सहयोग—दोनों का मिलना अनिवार्य है। प्रधानमंत्री का आह्वान इसी राष्ट्रीय एकता की मांग करता है। हमें यह समझना होगा कि होर्मुज का रास्ता बंद होना एक वैश्विक आपदा है, लेकिन भारत अपनी सुदृढ़ रणनीति, डिजिटल सामर्थ्य और अनुशासित जीवनशैली के दम पर इस चक्रव्यूह को भेदने की क्षमता रखता है।








