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UNICEF MHPSS Programme: महाराष्ट्र के स्कूलों में अब बच्चों के मन की बात सुनेगी यूनिसेफ

UNICEF MHPSS Programme: किशोरावस्था हमारे जीवन का वह पड़ाव होता है जहां मन में तमाम तरह के बदलाव, सवाल और जाने अनजाने तनाव उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ऐसे समय में बच्चों को सही मार्गदर्शन और मानसिक संबल की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। अक्सर इस स्थिति को नजरअंदाज कर दिया जाता है और बच्चों के मन की गांठ मन ही में फंसी रह जाती है।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष यानी यूनिसेफ ने इस पर एक संवेदनशील अभियान की रूप रेखा बना है जिसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में महाराष्ट्र शुरू किया है।

इसे इस तरह भी कह सकते हैं यूनिसेफ ने स्कूलों में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक-भावनात्मक विकास को मजबूत करने के लिए एक बेहद संवेदनशील और जरूरी अभियान की शुरुआत की है।

क्या है मुहिम का उद्देश्य

इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य स्कूलों के भीतर एक ऐसा सुरक्षित और खुशहाल माहौल तैयार करना है, जहां बच्चे बिना किसी झिझक या डर के अपने दिल की बात कह सकें और मानसिक रूप से मजबूत बन सकें।

अक्सर देखा जाता है कि पढ़ाई के दबाव या घरेलू परिस्थितियों के कारण बच्चे मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं, लेकिन सामाजिक झिझक या जागरूकता की कमी के चलते वे किसी से अपनी परेशानी साझा नहीं कर पाते हैं।

इस कार्यक्रम के तहत स्कूलों के माध्यम से इस समस्या को जड़ से खत्म करने की तैयारी की जा रही है, क्योंकि स्कूल ही वह जगह है जहां बच्चे अपना सबसे ज्यादा वक्त बिताते हैं।

शिक्षकों को भी प्रशिक्षण

इस कार्यक्रम के तहत न केवल बच्चों को तनाव से जूझने और अपनी भावनाओं को सहेजने के तरीके सिखाए जाएंगे, बल्कि शिक्षकों को भी विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा।

शिक्षक इस प्रशिक्षण के जरिए बच्चों के व्यवहार में आने वाले शुरुआती बदलावों और उनके मानसिक तनाव के लक्षणों को पहचान सकेंगे और समय रहते उनकी मदद कर पाएंगे।

इस पूरे अभियान को धरातल पर उतारने के लिए राज्य स्तर पर नीतियों को मजबूत करने के साथ-साथ नासिक जिले को एक मॉडल के रूप में चुना गया है।

नासिक में इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू करके देखा जाएगा कि जमीनी स्तर पर इसके क्या परिणाम आते हैं। वहां की सफलताओं और अनुभवों से सीखकर बाद में इस बेहतरीन मॉडल को पूरे महाराष्ट्र के स्कूलों में विस्तार दिया जाएगा।

इस काम में शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग मिलकर कदम आगे बढ़ाएंगे ताकि अगर किसी बच्चे को गंभीर रूप से डॉक्टरी परामर्श या थेरेपी की जरूरत हो, तो उसे तुरंत सही जगह भेजा जा सके।

माता पिता भी जोड़े जाएँगे

यह पूरा प्रयास केवल स्कूल की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें माता-पिता और स्थानीय समुदाय को भी जोड़ा जाएगा।

जब घर और स्कूल दोनों जगह बच्चों को भावनात्मक रूप से समझने वाला माहौल मिलेगा, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे पढ़ाई के साथ-साथ जीवन की हर चुनौती का डटकर सामना कर सकेंगे।

यूनिसेफ की यह पहल सीधे तौर पर हमारे बच्चों के कल को संवारने और उन्हें एक संवेदनशील, जागरूक और मानसिक रूप से स्वस्थ नागरिक बनाने की दिशा में एक बड़ा और स्वागत योग्य कदम है।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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