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Iran Israel War Impact: अगले 168 घंटे में क्या रुकेगा ईरान-इजरायल युद्ध? ट्रंप की डील या महाविनाश का खतरा!

Iran Israel War Impact: दुनिया इस समय बारूद के ऐसे ढेर पर बैठी है जहाँ कूटनीति की एक छोटी सी चिंगारी महाविनाश का कारण बन सकती है। 28 फरवरी से शुरू हुई अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग अब उस निर्णायक मोड़ पर है, जिसे विशेषज्ञ ‘ग्रेट गेम ऑफ सर्वाइवल’ कह रहे हैं। अगले 7 दिन (168 घंटे) यह तय करेंगे कि हम शांति की ओर बढ़ रहे हैं या तीसरे विश्व युद्ध की आहट सुन रहे हैं।

1. महाशक्तियों का ‘पावर गेम’: कौन किसके साथ?

यह संघर्ष अब केवल तेहरान और यरूशलेम तक सीमित नहीं रहा। राष्ट्रपति ट्रंप की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ रणनीति और ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ ने ईरान के सैन्य ढांचे को सीधी चुनौती दी है। ट्रंप का 15-सूत्रीय प्रस्ताव एक ‘अल्टीमेटम’ है, जिस पर रूस और चीन की ‘खामोश’ नजरें जमी हैं। यदि युद्ध भड़का, तो रूस की S-400 मिसाइल प्रणाली और चीन की ऊर्जा कूटनीति इस आग में घी का काम कर सकती है।

https://x.com/gulf_intel/status/2036673654780838251?s=20

2. होर्मुज की घेराबंदी: आपकी जेब और वैश्विक बाजार पर सीधा वार

जियो-पॉलिटिक्स का सबसे बड़ा कांटा ‘तेल’ है। दो स्थितियां संभव हैं:

  • अमन का संकेत: यदि ट्रंप का ‘गिफ्ट’ समझौता सफल रहा, तो कच्चा तेल $80 के नीचे आ जाएगा। भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें ₹5-10 तक कम हो सकती हैं।

  • महासंग्राम का संकेत: यदि ईरान ने ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को ब्लॉक किया, तो तेल $150 के पार जा सकता है। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था पर किसी परमाणु हमले से कम नहीं होगा।

3. भारत का रुख: संतुलन की ‘तीसरी आंख’

भारत इस समय दुनिया की सबसे तार्किक आवाज बनकर उभरा है। एक तरफ हमारी ऊर्जा सुरक्षा और चाबहार बंदरगाह दांव पर है, तो दूसरी तरफ नई दिल्ली की शांति अपील वैश्विक नेताओं के लिए ‘मिडिल ग्राउंड’ तैयार कर रही है।

4. निर्णायक मोड़: ‘डील’ या ‘डिजास्टर’?

विशेषज्ञों का मानना है कि 60% संभावना शांति की है, क्योंकि ट्रंप युद्ध के बजाय ‘डील’ में भरोसा रखते हैं। वहीं 40% आशंका महायुद्ध की है, यदि ईरान के कट्टरपंथी गुटों ने अमेरिकी प्रस्ताव को ठुकरा दिया। जे.डी. वेंस के साथ ईरान की बातचीत की इच्छा यह संकेत देती है कि पर्दे के पीछे ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत समझौते की गुंजाइश अभी बची है।

https://tesariaankh.com/editoreal-iran-israel-war-india-oil-gas-crisis-impact/

अगले सप्ताह अगर ‘सीजफायर’ की खबर आती है, तो बाजार में ‘बूस्टर’ लगेगा। लेकिन अगर ‘मिसाइल टेस्ट’ की खबरें बढ़ीं, तो दुनिया को एक लंबे और काले संघर्ष के लिए तैयार रहना होगा।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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