Delhi Groundwater Unfit: राजधानी दिल्ली में पानी की गुणवत्ता को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। Comptroller and Auditor General of India (CAG) की रिपोर्ट के अनुसार, शहर के 55% भूजल नमूने पीने के लिए असुरक्षित पाए गए हैं।
2017 से 2022 के बीच Delhi Jal Board (DJB) द्वारा जांचे गए 16,234 नमूनों में से 8,933 सैंपल फेल हो गए। यह स्थिति राजधानी में जल संकट और प्रशासनिक लापरवाही दोनों की ओर इशारा करती है।
टेस्टिंग में भारी लापरवाही
रिपोर्ट में बताया गया कि 43 जरूरी मानकों के बजाय केवल 12 पर ही पानी की जांच की गई। कई महत्वपूर्ण परीक्षण—जैसे जैविक, विषैले और रेडियोधर्मी तत्व—पूरी तरह नजरअंदाज किए गए।
ट्रीटमेंट प्लांट भी फेल
द्वारका और सोनिया विहार वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स में 60% से ज्यादा टेस्टिंग की कमी पाई गई। इससे साफ है कि पानी शुद्धिकरण प्रक्रिया भी भरोसेमंद नहीं है।
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बैक्टीरिया और गंदगी का खतरा
करीब 44% नमूनों में माइक्रोबायोलॉजिकल मानकों का उल्लंघन हुआ। कई सैंपल में ‘टोटल कोलीफॉर्म’ पाया गया, जो फीकल कंटैमिनेशन का संकेत है।
बिना ट्रीटमेंट पानी की सप्लाई
रिपोर्ट के अनुसार, 80–90 MGD पानी सीधे बोरवेल से बिना ट्रीटमेंट के सप्लाई किया गया, जो लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा है।
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पानी की बर्बादी और नुकसान
दिल्ली में 50% से ज्यादा पानी ‘नॉन-रेवेन्यू वॉटर’ के रूप में बर्बाद हो रहा है। कई इलाकों में पानी की उपलब्धता भी मानकों से काफी कम है।
दिल्ली का पानी संकट अब सिर्फ सप्लाई का नहीं, बल्कि गुणवत्ता का भी है। अगर समय रहते सुधार नहीं हुए, तो यह समस्या सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा में बदल सकती है।








