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Five State Elections: ECI के नए कदमों से दलों की बढ़ी मुश्किल

Five State Elections: चुनाव आयोग के नए कदम, प्रत्याशियों और दलों के लिए कितनी बड़ी चुनौती?

Five State Elections: असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनाव केवल राज्य सरकारों के गठन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये भारतीय लोकतंत्र की कार्यप्रणाली की परीक्षा भी हैं। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा 1,444 केंद्रीय पर्यवेक्षकों की तैनाती और सख़्त ब्रीफिंग यह संकेत देती है कि इस बार चुनाव पहले से कहीं अधिक निगरानी, अनुशासन और पारदर्शिता के साथ कराए जाएंगे।

केंद्रीय पर्यवेक्षक: निगरानी से आगे की भूमिका

इन चुनावों में 714 सामान्य, 233 पुलिस और 497 व्यय पर्यवेक्षकों की तैनाती यह साफ़ करती है कि आयोग अब केवल पर्यवेक्षण नहीं, बल्कि तत्काल हस्तक्षेप की नीति पर काम कर रहा है।

इसका असर क्या होगा?

  • आचार संहिता उल्लंघन पर त्वरित कार्रवाई

  • स्थानीय प्रशासन पर राजनीतिक दबाव की गुंजाइश कम

  • प्रत्याशियों की हर गतिविधि पर सीधी नजर

सबसे ज़्यादा असर सत्तारूढ़ दलों और प्रभावशाली प्रत्याशियों पर पड़ेगा।

चुनावी खर्च पर सख़्त पहरा

व्यय पर्यवेक्षकों की संख्या में वृद्धि बताती है कि चुनाव आयोग इस बार खर्च नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।

नए सख़्त संकेत

  • डिजिटल भुगतान और बैंक ट्रांजैक्शन की निगरानी

  • सोशल मीडिया विज्ञापन और पेड न्यूज़ को खर्च में शामिल करना

  • थर्ड पार्टी कैंपेन की जवाबदेही प्रत्याशी पर

दिक्कत उन दलों को होगी जिनकी रणनीति अब तक कैश और अनौपचारिक नेटवर्क पर टिकी रही है।

सोशल मीडिया और आईटी पर आयोग की पैनी नजर

ब्रीफिंग में आईटी और मीडिया पर विशेष सत्र इस बात का संकेत है कि डिजिटल प्रचार अब पूरी तरह आचार संहिता के दायरे में है।

संभावित बदलाव

  • फेक न्यूज़ और भ्रामक कंटेंट पर त्वरित संज्ञान

  • सोशल मीडिया पोस्ट पर कार्रवाई

  • राजनीतिक विज्ञापनों की पूर्व स्वीकृति

आक्रामक डिजिटल कैंपेन चलाने वाले दलों के लिए यह बड़ा झटका हो सकता है।

शिकायत निवारण: भरोसे की राजनीति

चुनाव आयुक्तों ने स्पष्ट किया है कि शिकायतों और आपत्तियों का शीघ्र समाधान आयोग की प्राथमिकता है।

क्यों है यह अहम?

  • जनता और राजनीतिक दलों का भरोसा बढ़ेगा

  • बाहुबल और दबाव की राजनीति पर अंकुश

  • निष्पक्ष चुनाव की धारणा मजबूत

ईवीएम पर फिर से भरोसा कायम करने की कोशिश

ईवीएम की कार्यप्रणाली पर विशेष प्रशिक्षण यह दर्शाता है कि आयोग चुनाव के बाद उठने वाले विवादों को पहले ही निष्प्रभावी करना चाहता है।

हार के बाद ईवीएम को मुद्दा बनाने की रणनीति अब कमजोर पड़ सकती है।

https://x.com/KamalikaSengupt/status/2016848265250312640?s=20

निष्कर्ष: राजनीति की परीक्षा, लोकतंत्र का लाभ

चुनाव आयोग के नए कदम भले ही राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के लिए चुनौतीपूर्ण हों, लेकिन इससे स्वच्छ, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की संभावना बढ़ेगी।

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फायदा किसे?

  • स्वच्छ छवि वाले प्रत्याशी

  • मुद्दा-आधारित राजनीति करने वाले दल

  • मतदाता, जिनका विश्वास लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मजबूत होगा

नुकसान किसे?

  • धनबल, बाहुबल और डिजिटल भ्रम पर आधारित राजनीति को

कुल मिलाकर, ये चुनाव सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि यह तय करेंगे कि भारतीय लोकतंत्र नियमों से चलेगा या रसूख से।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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