Cognitive Decline With Age: जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर में बदलाव आना स्वाभाविक है—और दिमाग भी इससे अछूता नहीं रहता। 60 वर्ष की उम्र के बाद कई लोग महसूस करने लगते हैं कि उनकी याददाश्त पहले जैसी तेज नहीं रही, नई चीजें सीखने में अधिक समय लग रहा है और निर्णय लेना कठिन होता जा रहा है। इसे कॉग्निटिव डिक्लाइन कहा जाता है, जो भारत में तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी के साथ एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है।
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट अपरिहार्य नहीं है। सही जीवनशैली और समय पर देखभाल से इसे धीमा किया जा सकता है।
उम्र के साथ दिमाग क्यों कमजोर होता है?
नई दिल्ली स्थित इंडियन स्पाइनल इंजरीज़ सेंटर की न्यूरोलॉजी विभाग की एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. अपर्णा गुप्ता के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क की संरचना में प्राकृतिक बदलाव आते हैं।
न्यूरॉन्स (तंत्रिका कोशिकाएं) सिकुड़ने लगती हैं और उनके बीच के कनेक्शन कमजोर हो जाते हैं। इसके अलावा, दिमाग में रक्त प्रवाह भी कम हो जाता है, खासकर उन हिस्सों में जो याददाश्त और तेज सोच से जुड़े होते हैं।
डॉ. गुप्ता बताती हैं,
“इसी वजह से बुजुर्गों को नई जानकारी जल्दी समझने में दिक्कत होती है, हालांकि उनका अनुभव और जीवन ज्ञान बना रहता है।”
कुछ मामलों में यह सामान्य गिरावट गंभीर बीमारियों जैसे अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया का रूप भी ले सकती है। भारत में करीब 7.4% बुजुर्ग इन बीमारियों से प्रभावित हैं, जिनका कारण दिमाग में जहरीले प्रोटीन का जमाव और ब्रेन रिपेयर की धीमी प्रक्रिया है।
भारत के सामने बढ़ती उम्र की चुनौती
ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा केयर हेल्थसिटी के न्यूरोसाइंसेज़ विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. रविंद्र श्रीवास्तव बताते हैं कि भारत की बुजुर्ग आबादी 2050 तक दोगुनी से भी ज्यादा हो सकती है।
उनके अनुसार,
“कॉग्निटिव डिक्लाइन सिर्फ याददाश्त को ही नहीं, बल्कि व्यक्ति की स्वतंत्रता, आत्मविश्वास और समग्र स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। इससे परिवारों और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ता है।”
दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
विशेषज्ञों का कहना है कि उम्र बढ़ने को रोका नहीं जा सकता, लेकिन उसके असर को जरूर कम किया जा सकता है।
शारीरिक रूप से सक्रिय रहें
रोज़ाना टहलना, योग या डांस जैसी हल्की एक्सरसाइज दिमाग की क्षमता बढ़ाने में मदद करती है।
एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर भोजन लें
रंग-बिरंगे फल और सब्जियां दिमाग को पोषण देती हैं। अधिक चीनी और प्रोसेस्ड फूड से बचें।
अच्छी नींद लें
पर्याप्त और गहरी नींद दिमाग को आराम और मरम्मत का समय देती है।
दिमाग को व्यस्त रखें
पढ़ना, पहेलियां हल करना, नई चीजें सीखना और सामाजिक बातचीत दिमागी कनेक्शन को मजबूत बनाते हैं।
बीमारियों को नियंत्रण में रखें
ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल का सही प्रबंधन बेहद जरूरी है।
https://x.com/CharleySanchuk/status/2013440995090649379?s=20
नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं
समय पर स्क्रीनिंग से डिमेंशिया जैसी बीमारियों को शुरुआती चरण में पहचाना जा सकता है।
स्वस्थ दिमाग, बेहतर जीवन
डॉ. श्रीवास्तव कहते हैं,
“ब्रेन हेल्थ को सिर्फ बुजुर्गों का मुद्दा नहीं समझना चाहिए। यह परिवारों और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।”
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विशेषज्ञ मानते हैं कि सही आदतों और समय पर इलाज से 70 की उम्र के बाद भी व्यक्ति स्वतंत्र, सक्रिय और मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकता है।








