DMK MP Dr A Mani Dharmapuri: जनसेवा यात्रा
धर्मपुरी (तमिलनाडु)। डॉ. ए. मणि, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के वरिष्ठ नेता और धर्मपुरी से सांसद, इन दिनों अपने जनसंपर्क, सादगी और दूरदृष्टि के कारण चर्चाओं में हैं। उन्होंने जून 2024 में 18वीं लोकसभा के लिए जीत दर्ज की और संसद में अपने कार्यकाल की शुरुआत उल्लेखनीय जनहित पहलों से की है।
धर्मपुरी में 31 अगस्त 1968 को जन्मे डॉ. मणि एक साधारण कृषक परिवार से आते हैं। उनके पिता आरिमुथु कुप्पुसामी गौंडर और माता सरोजा आरिमुथु ने उन्हें श्रम, अनुशासन और संवेदना के मूल्य सिखाए। पेशे से वकील और कृषक, ए. मणि ने मद्रास विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त की है।
साल 1994 में उन्होंने श्रीमती भुवनेश्वरी एस. से विवाह किया। एक पुत्र के पिता डॉ. मणि परिवार और समाज दोनों में संतुलन रखते हैं।
विशेष योगदान
लोकसभा में वे वर्तमान में श्रम, वस्त्र एवं कौशल विकास संबंधी समिति के सदस्य हैं। उनके राजनीतिक करियर के कई प्रेरणादायक पहलू रहे हैं—उन्होंने संसद के सेंट्रल हॉल में धूम्रपान पर प्रतिबंध लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और राष्ट्रीय ध्वज को 100 फीट ऊँचे ध्वजदंडों पर रात में फहराने की अनुमति दिलाने में भी अग्रणी रहे। इसके अलावा, उन्होंने लोकसभा की कार्य संचालन नियमावली के नियम 349 (XIV) में संशोधन कर सांसदों को राष्ट्रीय ध्वज का लैपल पिन पहनने की अनुमति दिलाने में भी योगदान दिया।
धर्मपुरी के मतदाताओं के बीच डॉ. मणि का छवि एक सजग, साहसी और जनसेवक प्रतिनिधि की है जो अपने क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए सतत प्रयासरत हैं।
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अभी तक ए. मणि का नाम किसी बड़े व्यक्तिगत घोटाले या आपराधिक विवाद में नहीं उभरा है और उनकी छवि एक अपेक्षाकृत साफ-सुथरे जनप्रतिनिधि की रही है। उनके संदर्भ से जुड़ी खबरों में ज्यादातर पार्टी की संगठनात्मक जिम्मेदारियाँ, स्थानीय कार्यक्रमों में भागीदारी और विकास संबंधी मुद्दे ही प्रमुख रहे हैं, न कि नकारात्मक विवाद।
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पार्टी के दूसरे नेता और पूर्व सांसद एस. सेंथिलकुमार ने, जिन्हें 2019–24 में धर्मपुरी से काम करने का श्रेय दिया जाता है, टिकट कटने के बाद भी सार्वजनिक रूप से ए. मणि के लिए शुभकामनाएँ दीं, जो यह दिखाता है कि अंदरूनी खेमेबाज़ी की बजाय सहयोग की भावना उनके साथ जुड़ी हुई है। इसके अलावा ए. मणि को ऐसा सांसद माना जाता है जो शिकायतें सुनकर तुरंत प्रशासन से कार्रवाई करवाने की कोशिश करता है; इस तरह की छवि आम तौर पर संगठन में “वर्किंग” और ज़मीनी नेता के रूप में स्वीकार्यता बढ़ाती है।








