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विनोद साहनी हत्याकांड पर सियासी संग्राम, सपा के , विपक्ष के धरने में BJP विधायक और मंत्री संजय निषाद!

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ती दिखाई दे रही है। कानून-व्यवस्था और अपराध का मुद्दा एक बार फिर राजनीति के केंद्र में आने लगा है। गोंडा में समाजवादी पार्टी से जुड़े बर्तन व्यापारी विनोद कुमार साहनी की गोली मारकर हत्या के मामले ने अब ऐसा राजनीतिक मोड़ ले लिया है, जिसने सत्तारूढ़ BJP और विपक्ष के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान को नई दिशा दे दी है।

विनोद कुमार साहनी को गोंडा में गोली मारी गई थी। गंभीर हालत में उन्हें इलाज के लिए लखनऊ लाया गया, जहां KGMU में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद पोस्टमॉर्टम हाउस पर धरना शुरू कर दिया गया। परिवार और समर्थकों की ओर से मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की जा रही है।

मामले को लेकर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार एक्स पर पोस्ट कर सरकार और पुलिस पर सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच गोंडा में जिस तरह का राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, उसने पूरे मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है।

विपक्ष के धरने में BJP के मंत्री और विधायक

गोंडा में विनोद साहनी की हत्या के विरोध में चल रहे धरने में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद का पहुंचना अपने आप में बड़ी राजनीतिक घटना है। इतना ही नहीं, करनैलगंज से BJP विधायक अजय कुमार सिंह भी संजय निषाद के साथ धरने पर बैठे।

संजय निषाद ने गोंडा पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि विनोद साहनी की हत्या फेसबुक पर किए गए एक पोस्ट की वजह से की गई। उन्होंने मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

एक तरफ विपक्ष इस हत्याकांड को लेकर सरकार पर हमलावर है, वहीं दूसरी तरफ BJP के ही मंत्री और विधायक का धरने में शामिल होना बताता है कि मामला केवल विपक्ष बनाम सरकार की राजनीति तक सीमित नहीं रह गया है।

अखिलेश के पोस्ट के बाद बढ़ा दबाव

विनोद साहनी हत्याकांड को लेकर अखिलेश यादव लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। उन्होंने इसे उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था से जोड़ते हुए BJP सरकार पर निशाना साधा है।

सपा की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि BJP शासन में अपराध और अराजकता चरम पर है और पुलिस पर भी राजनीतिक दबाव है। हालांकि ये विपक्ष के राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि अलग से किया जाना जरूरी है।

मामले में संजय निषाद का सरकार के मंत्री रहते हुए विपक्ष के धरने में पहुंचना इस पूरे घटनाक्रम को असामान्य राजनीतिक रंग देता है। इसके साथ BJP विधायक का भी धरने पर बैठना सरकार और स्थानीय पुलिस के लिए राजनीतिक तौर पर असहज स्थिति पैदा करता है।

हापुड़ में भी कानून-व्यवस्था को लेकर सियासत तेज

इसी बीच हापुड़ जिले के बदनौली गांव में दलित युवक दीपक की गोली मारकर हत्या का मामला भी राजनीतिक मुद्दा बन गया है। मृतक दीपक के परिवार से मिलने जा रहे सपा सांसद और राष्ट्रीय महासचिव रामजीलाल सुमन को भारी पुलिस फोर्स द्वारा रास्ते में रोके जाने के बाद विरोध प्रदर्शन किया गया।

समाजवादी पार्टी इसे BJP सरकार में PDA समाज के खिलाफ बढ़ते अत्याचार से जोड़ रही है। पार्टी का आरोप है कि चुनाव नजदीक आने के साथ PDA समाज के लोगों पर अत्याचार बढ़ रहा है।

यानी एक तरफ गोंडा में हत्या के मामले ने BJP के भीतर से ही सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं दूसरी तरफ हापुड़ में दलित युवक की हत्या और सपा सांसद को रोके जाने को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है।

2027 से पहले एक्टिव हो चुकी हैं पार्टियां

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। कानून-व्यवस्था, अपराध, PDA, पिछड़ा, दलित और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आते दिखाई दे रहे हैं।

लेकिन इस पूरी राजनीतिक हलचल के बीच समाजवादी पार्टी के सामने भी अपना घर व्यवस्थित करने की चुनौती है। पार्टी का नेतृत्व फिलहाल अखिलेश यादव के हाथों में है, लेकिन संगठन और परिवार से जुड़े कई सवाल अभी राजनीतिक चर्चा में बने हुए हैं।

कुनबे पर लगी हैं निगाहें

चाचा शिवपाल यादव की भूमिका क्या होगी, रामगोपाल यादव किस तरह सक्रिय होंगे और आजम खान की आने वाले चुनाव में क्या भूमिका होगी—इन सवालों पर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है।

ऐसे में BJP के मंत्री संजय निषाद और BJP विधायक अजय कुमार सिंह का विपक्ष के धरने में पहुंचना समाजवादी पार्टी के लिए भी एक संकेत है। यह संकेत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनाव से पहले सामाजिक और राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते हैं।

क्या यह बदलते समीकरण की शुरुआत है?

गोंडा का विनोद साहनी हत्याकांड अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है। एक ओर अखिलेश यादव लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं, दूसरी ओर BJP के ही मंत्री और विधायक धरने में पहुंचकर मामले में कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

यह घटनाक्रम बताता है कि 2027 के चुनाव की राजनीतिक जमीन तैयार होने लगी है। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि किसी एक घटना से चुनावी समीकरण बदल जाएंगे, लेकिन इतना जरूर है कि BJP के भीतर से उठने वाली आवाजें और विपक्ष के साथ खड़े होने वाले सत्तापक्ष के नेता आने वाले चुनाव में सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।

क्या है खास बात

गोंडा का घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि चुनावी राजनीति में जब सत्ता पक्ष का कोई मंत्री या विधायक विपक्ष के किसी आंदोलन में खड़ा दिखाई देता है, तो वह सिर्फ तत्कालीन मुद्दे का विरोध नहीं रह जाता। वह राजनीतिक संदेश भी बन जाता है।

2027 में मुकाबला केवल दलों के बीच नहीं होगा, बल्कि सामाजिक समीकरणों, स्थानीय असंतोष, कानून-व्यवस्था और उम्मीदवारों के प्रति जनता की प्रतिक्रिया भी बड़ी भूमिका निभाएगी। ऐसे में गोंडा से निकला यह राजनीतिक संदेश कितना दूर तक जाता है, यह आने वाले दिनों में देखने वाली बात होगी।

Ram Krishna
Author: Ram Krishna

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