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पप्पू यादव फिर सुर्खियों में, भगवा चोले से प्रेस कॉन्फ्रेंस के ड्रामे तक

पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव, जिनका पूरा नाम राजेश रंजन है, एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनकी वह प्रेस कॉन्फ्रेंस है, जिसमें कथित तौर पर सनातन के अपमान का विरोध करने के लिए दो युवक पहुंच गए। आरोप है कि इनमें से एक युवक ने चप्पल फेंककर पप्पू यादव को निशाना बनाने की कोशिश की। इसके बाद उनके समर्थकों ने दोनों युवकों को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान एक युवक के पास से चाकू मिलने का भी दावा किया गया। आरोप लगाया गया कि युवक इसी चाकू से पप्पू यादव को निशाना बनाने की मंशा से वहां पहुंचा था।

आरोप गंभीर है और इसे पूरी तरह असंभव भी नहीं कहा जा सकता। जिस तरह से आज हिन्दुत्व और सनातन को लेकर समाज में एक नया उभार देखने को मिल रहा है, उसमें किसी सिरफिरे व्यक्ति द्वारा ऐसा कदम उठाया जाना संभव है। अब यह धारणा भी धीरे-धीरे धूमिल होती जा रही है कि हिन्दू आक्रामक नहीं हो सकता या सनातन धर्म को मानने वाला व्यक्ति हमेशा शांत स्वभाव का ही होगा। पिछले कुछ समय में जिस तरह से हिन्दुत्ववादी संगठनों और उनके समर्थकों की आक्रामक गतिविधियां सामने आई हैं, उन्हें देखते हुए इस तरह की किसी घटना की आशंका को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

पप्पू यादव की भूमिका को किस नजरिए से देखा जाए?

पप्पू यादव जिस तरह के राजनीतिक अंदाज के लिए जाने जाते हैं, उसमें नाटकीयता कोई नई बात नहीं है। संसद के बाहर भगवा चोला पहनकर मंदिरों में आने वाले चढ़ावे की कथित चोरी का स्वांग रचने के मामले में भी वह विरोधियों के निशाने पर आए थे। उनकी आलोचना हुई थी। भगवा रंग करोड़ों हिन्दुओं के लिए केवल एक रंग नहीं, बल्कि आस्था, त्याग और सनातन परंपरा का प्रतीक है। ऐसे में किसी राजनीतिक प्रदर्शन के लिए भगवा चोला पहनना स्वाभाविक रूप से विवाद खड़ा करता है।

कौन सही है और कौन गलत

इसका फैसला करना आसान नहीं है। लेकिन पप्पू यादव का राजनीतिक अतीत जरूर ऐसे सवाल खड़े करता रहा है, जिनसे वह आसानी से पीछा नहीं छुड़ा सकते। उन पर कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं। हालांकि, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं होता। अदालतों में कई मामलों में उन्हें राहत मिली है और कुछ चर्चित मामलों में उन्हें बरी भी किया जा चुका है।

पप्पू यादव के खिलाफ सबसे चर्चित मामले

सीपीआई (एम) विधायक अजीत सरकार की हत्या का मामला सबसे ज्यादा चर्चित रहा है। इस मामले में 2008 में निचली अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, 2013 में पटना हाईकोर्ट ने सबूतों की कमी का हवाला देते हुए उन्हें बरी कर दिया। यही वजह है कि उनके आपराधिक इतिहास की चर्चा करते समय अदालत के फैसलों और लंबित मामलों के बीच अंतर करना जरूरी है।

हाल के वर्षों में भी उनका नाम पुराने मामलों को लेकर सुर्खियों में आता रहा है। फरवरी 2026 में 1995 के एक पुराने मकान किराए और कथित धोखाधड़ी से जुड़े मामले में उनकी गिरफ्तारी की खबर सामने आई थी। इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद भी हुआ। तीन दशक पुराने इस मामले ने एक बार फिर पप्पू यादव के राजनीतिक और कानूनी अतीत को बहस के केंद्र में ला दिया।

बाहुबली और राजनीति का गठजोड़

1990 के दशक में कोसी और सीमांचल की राजनीति में पप्पू यादव का उभार बाहुबल और राजनीति के गठजोड़ के रूप में देखा गया। हालांकि, उनके समर्थकों की नजर में उनकी छवि बिल्कुल अलग रही है। समर्थक उन्हें गरीबों, जरूरतमंदों और आपदा पीड़ितों की मदद करने वाले ‘रॉबिनहुड’ या मसीहा के रूप में पेश करते रहे हैं। यही विरोधाभास पप्पू यादव की राजनीति की सबसे बड़ी पहचान भी रहा है।

एक तरफ उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों और पुराने विवादों का इतिहास है, तो दूसरी तरफ जनसेवा और गरीबों की मदद करने वाली उनकी छवि है। वह कई बार अलग-अलग क्षेत्रों से सांसद चुने जा चुके हैं और आज पूर्णिया का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनका राजनीतिक और कानूनी जीवन लगातार विवादों और बहसों के केंद्र में रहा है।

पप्पू यादव सटीक उदाहरण

भारत की राजनीति में अपराध और राजनीति का गठजोड़ कोई नई बात नहीं है। कई ऐसे नेता रहे हैं जिनका अतीत आपराधिक मामलों से जुड़ा रहा, लेकिन उन्होंने राजनीति में अपनी जगह बनाई और जनता ने उन्हें चुनावों में जीत भी दिलाई। पप्पू यादव भी इसी राजनीतिक वास्तविकता का एक उदाहरण हैं।

सनातन बनाम विरोध का मुद्दा

अब सवाल यह है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में कथित चप्पल कांड और चाकू मिलने के आरोपों के बाद पप्पू यादव इस पूरे घटनाक्रम को किस तरह राजनीतिक मुद्दा बनाते हैं। क्या वह इसे अपने खिलाफ साजिश बताकर सहानुभूति हासिल करने की कोशिश करेंगे या फिर इसे सनातन बनाम विरोध की राजनीति का नया चेहरा देंगे?

पप्पू यादव राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं। वह जानते हैं कि सुर्खियों में कैसे रहा जाता है और राजनीतिक माहौल को अपने पक्ष में कैसे मोड़ा जाता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सांसद पप्पू यादव अब राजनीति का कौन सा नया पैंतरा इस्तेमाल करते हैं।

Ram Krishna
Author: Ram Krishna

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