बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच बढ़ती तल्खी का असर अब प्रधानमंत्री तारिक रहमान के प्रस्तावित भारत दौरे पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच दौरे की तारीख को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन अभी तक कोई तारीख अंतिम रूप से तय नहीं हुई है। राजनयिक सूत्रों के मुताबिक तारिक रहमान के 20 से 25 अगस्त के बीच भारत आने की संभावना है। हालांकि, 21 अगस्त की तारीख को लेकर भी चर्चा है, लेकिन इसे अभी आधिकारिक कार्यक्रम नहीं माना जा सकता।
मामले की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भारत और बांग्लादेश के बीच एक तरफ द्विपक्षीय रिश्तों को पटरी पर लाने की कोशिश हो रही है, तो दूसरी तरफ ढाका लगातार भारत में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। हसीना के हालिया सार्वजनिक बयान ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है।
हसीना के बयान ने बढ़ाई मुश्किल
5 अगस्त को शेख हसीना ने नई दिल्ली से एक वर्चुअल मीडिया कार्यक्रम को संबोधित किया था। यह कार्यक्रम उनके सत्ता से बेदखल होने के दो साल पूरे होने के मौके पर हुआ। हसीना ने अपने भाषण में मौजूदा बांग्लादेश सरकार पर तीखे हमले किए और कहा कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का इरादा रखती हैं।
उन्होंने अपनी पार्टी अवामी लीग से प्रतिबंध हटाने की मांग भी की और अपने खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। बांग्लादेश सरकार ने हसीना के भारत से दिए गए इस संबोधन पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे दोनों देशों के संबंधों के लिए नुकसानदेह बताया।
यही बयान अब तारिक रहमान के संभावित भारत दौरे के लिए भी बड़ी कूटनीतिक चुनौती बन गया है। ढाका चाहता है कि भारत हसीना के प्रत्यर्पण के मामले में आगे बढ़े, जबकि भारत ने कहा है कि वह इस अनुरोध की कानूनी प्रक्रियाओं के तहत समीक्षा कर रहा है।
भारत और बांग्लादेश के बीच चल रही बातचीत
तारिक रहमान के भारत दौरे को लेकर दोनों देशों के बीच पिछले कई सप्ताह से संपर्क बना हुआ है। भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भारत आने का निमंत्रण दिया है। यह दौरा हुआ तो तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत की उनकी पहली आधिकारिक यात्रा होगी।
लेकिन यात्रा की तारीख तय करने के साथ-साथ दोनों देशों के सामने रिश्तों में आई खटास को कम करने की चुनौती भी है। बांग्लादेश की ओर से संकेत दिया गया है कि भारत के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए एक अनुकूल माहौल जरूरी है।
दूसरी ओर, भारत भी बांग्लादेश के साथ रिश्तों को सामान्य बनाने में दिलचस्पी रखता है। ऐसे में तारिक रहमान का संभावित दिल्ली दौरा सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच बिगड़े रिश्तों को संभालने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
पहले जून में जाना था भारत
तारिक रहमान की भारत यात्रा की चर्चा इससे पहले जून में भी हुई थी। लेकिन उस समय दोनों देशों के संबंधों में अवैध घुसपैठ और कुछ बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजे जाने के मुद्दे पर तनाव पैदा हो गया था।
इसके बाद तारिक रहमान चीन की यात्रा पर गए। जुलाई में भारत दौरे को लेकर नई दिल्ली और ढाका के बीच फिर बातचीत शुरू हुई और अब अगस्त में यात्रा की संभावनाएं एक बार फिर मजबूत हुई हैं।
हालांकि, ताजा घटनाक्रम ने पूरी कवायद को फिर संवेदनशील बना दिया है।
शेख हसीना ने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति पर उठाए सवाल
अपने हालिया संबोधन में शेख हसीना ने कहा कि उन्होंने पिछले दो वर्षों में अपने देश को कठिन दौर से गुजरते देखा है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा बांग्लादेश वह देश नहीं है जिसे उनकी सरकार ने बनाया था।
हसीना ने जुलाई-अगस्त 2024 के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने छात्रों की मांगों के मुद्दे को बातचीत, कानूनी प्रक्रिया और धैर्य के माध्यम से सुलझाने की कोशिश की थी। उनका आरोप था कि कुछ संगठित समूहों ने छात्रों की मांगों को हिंसक राजनीतिक हथियार में बदल दिया।
हालांकि, हसीना के इन दावों पर बांग्लादेश की मौजूदा सरकार और उनके विरोधियों का रुख अलग है। इसलिए उनके बयान को राजनीतिक पक्ष के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
हसीना की वापसी पर भी गरमाई राजनीति
हसीना के बांग्लादेश लौटने की घोषणा ने वहां की राजनीति को और गरमा दिया है। उन्होंने दिसंबर में वापस लौटने का इरादा जताया है, जबकि उन्हें बांग्लादेश में गंभीर आपराधिक मामलों का सामना करना पड़ रहा है और उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा भी सुनाई जा चुकी है।
हसीना के समर्थक इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहे हैं। वहीं बांग्लादेश सरकार और उनके विरोधियों का आरोप है कि 2024 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और मौतों के लिए उनकी सरकार जिम्मेदार थी।
यही विवाद अब भारत-बांग्लादेश संबंधों के केंद्र में आ गया है।
हसीना का मुद्दा तारिक के लिए कितना बड़ा?
तारिक रहमान के लिए भारत दौरे की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह ढाका की राजनीतिक अपेक्षाओं और नई दिल्ली के साथ व्यावहारिक संबंधों के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं।
बांग्लादेश की ओर से हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा लगातार उठाया जा रहा है। भारत के लिए यह सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि कानूनी और कूटनीतिक विषय भी है। ऐसे में तारिक की दिल्ली यात्रा में हसीना का मुद्दा बातचीत से बाहर रखना आसान नहीं होगा।
दिल्ली दौरा हुआ तो कई मुद्दों पर होगी बात
तारिक रहमान का भारत दौरा अंतिम रूप लेता है तो दोनों देशों के बीच व्यापार, सीमा प्रबंधन, जल बंटवारा, सुरक्षा और द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर बातचीत की संभावना है। लेकिन इन सभी मुद्दों पर हावी रहने वाला सवाल शेख हसीना और उनका प्रत्यर्पण ही हो सकता है।
फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और 20 से 25 अगस्त की संभावित समय-सीमा सामने आई है। लेकिन जब तक दोनों सरकारें आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं करतीं, तब तक तारिक रहमान के 21 अगस्त के दिल्ली दौरे को तय कार्यक्रम मानना जल्दबाजी होगी।
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यानी दिल्ली और ढाका रिश्ते सुधारने की कोशिश तो कर रहे हैं, लेकिन शेख हसीना का मुद्दा दोनों देशों के बीच ऐसा कांटा बन गया है जिसे हटाए बिना रिश्तों की राह आसान होती दिखाई नहीं दे रही।








