डिजिटल दुनिया जितनी तेजी से लोगों की जिंदगी आसान बना रही है, साइबर ठगी का खतरा भी उतनी ही तेजी से बढ़ रहा है। GSMA की India Consumer Scam Report 2026 के मुताबिक, पिछले 12 महीनों में भारत में सर्वे में शामिल 12 फीसदी लोगों ने बताया कि वे किसी न किसी स्कैम का शिकार हुए हैं। छह प्रमुख आसियान देशों में यह आंकड़ा 8 फीसदी रहा।
भारत में ऑनलाइन ठगी का सबसे बड़ा माध्यम ऑनलाइन शॉपिंग स्कैम बनकर सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 33 फीसदी भारतीय उपभोक्ताओं ने ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़े स्कैम का सामना किया। आसियान-6 देशों में यह आंकड़ा 32 फीसदी रहा।
इसके बाद प्राइज, लॉटरी और विरासत से जुड़े स्कैम का नंबर है। भारत में 31 फीसदी लोगों ने इस तरह की ठगी का सामना किया, जबकि आसियान-6 में यह आंकड़ा 25 फीसदी रहा। वहीं, नौकरी और आय से जुड़े स्कैम भारत में 30 फीसदी और आसियान-6 देशों में 32 फीसदी रहे।
QR कोड और पेमेंट लिंक भी ठगी का नया हथियार
डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के साथ QR कोड और पेमेंट लिंक के जरिए होने वाली ठगी भी चिंता बढ़ा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 27 फीसदी स्कैम QR कोड या पेमेंट लिंक के जरिए किए गए। आसियान-6 में यह आंकड़ा 18 फीसदी रहा, जबकि थाईलैंड में 23 फीसदी लोगों ने इस तरह के स्कैम का सामना किया।
रिपोर्ट में मैसेजिंग ऐप को स्कैम का सबसे आम माध्यम बताया गया है। भारत में 42 फीसदी स्कैम में मैसेजिंग ऐप की भूमिका रही, जबकि आसियान-6 देशों में यह आंकड़ा 41 फीसदी था।
डेटा साझा करने में भी भारतीय उपभोक्ता आगे
GSMA की रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू उपभोक्ताओं के डेटा को लेकर भी है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय उपभोक्ता संस्थानों को अपना डेटा इस्तेमाल करने की अनुमति देने के मामले में अपेक्षाकृत ज्यादा उदार हैं। यही वजह है कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा की सुरक्षा और उसके गलत इस्तेमाल का खतरा भी गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है।
GSMA के चीफ रेगुलेटरी ऑफिसर जॉन गिउस्टी ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा कि डिजिटल अर्थव्यवस्था में फ्रॉड की चुनौती दुनियाभर में बढ़ रही है। उनके मुताबिक, भारत में टेलीकॉम ऑपरेटर और सरकारी एजेंसियां इस खतरे से निपटने के प्रयासों में आगे हैं।
गिउस्टी ने कहा कि 2024 में दुनिया भर में स्कैम के कारण करीब एक ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ और वैश्विक स्तर पर लगभग आधे उपभोक्ताओं ने स्कैम के संपर्क में आने की बात कही।
उन्होंने कहा कि स्कैम अब केवल फोन कॉल तक सीमित नहीं हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दिखने वाले विज्ञापनों से लेकर वित्तीय सेवाओं तक, ठगी करने वाले लगातार नए रास्ते तलाश रहे हैं। ऐसे में इस चुनौती से निपटने के लिए टेलीकॉम कंपनियों, टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म, वित्तीय संस्थानों और सरकारों को मिलकर काम करना होगा।
सर्वे में करीब 500 भारतीय शामिल
GSMA ने यह अध्ययन भारत और छह आसियान बाजारों में वयस्कों के बीच किए गए क्रॉस-सेक्शनल ऑनलाइन सर्वे के आधार पर तैयार किया है। भारत में करीब 500 लोगों का ऑनलाइन इंटरव्यू 29 जुलाई से 3 अगस्त 2026 के बीच किया गया।
रिपोर्ट के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारत में डिजिटल सेवाओं और ऑनलाइन भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर स्कैम से सुरक्षा की चुनौती भी लगातार बड़ी हो रही है। खासकर ऑनलाइन शॉपिंग, मैसेजिंग ऐप, QR कोड और पेमेंट लिंक जैसे रोजमर्रा के डिजिटल माध्यम अब ठगों के निशाने पर हैं। ऐसे में डिजिटल सुविधा के साथ डिजिटल सावधानी भी उतनी ही जरूरी हो गई है।








