नई दिल्ली। लखनऊ में अवैध रूप से बने कॉम्प्लेक्स में हुए भीषण अग्निकांड में 15 युवाओं की मौत की घटना को अभी ज्यादा समय नहीं बीता था कि दिल्ली में एक और दर्दनाक हादसे ने राजधानी में इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। यह इमारत छात्रों के लिए पीजी के रूप में इस्तेमाल हो रही थी। हादसे में अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं और करीब 15 से 20 लोगों के अभी भी मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। देर रात तक राहत और बचाव अभियान जारी रहा।
हादसा रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे सत्य निकेतन में हुआ। यह इलाका दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक है और यहां बड़ी संख्या में छात्र पीजी और हॉस्टल में रहते हैं। इमारत को ‘होस्टल डेज’ के नाम से संचालित पीजी के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। हादसे के बाद पूरे इलाके में धूल का गुबार छा गया और आसपास अफरा-तफरी मच गई।
मलबे के नीचे से आ रही थीं मदद की आवाजें
इमारत गिरने के बाद शुरुआती जानकारी में 30 से 50 लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई गई थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ छात्रों ने मलबे के नीचे से फोन कर मदद की गुहार लगाई। इसके बाद स्थानीय लोगों, छात्रों और बचाव दलों ने मिलकर मलबा हटाने का काम शुरू किया। संकरी गलियों के कारण राहत वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचाने में भी मुश्किल आई।
स्थानीय लोगों ने शुरुआती घंटों में अपने हाथों और उपलब्ध औजारों से मलबा हटाया। बाद में एनडीआरएफ, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, सिविल डिफेंस और अन्य एजेंसियों की टीमें बड़े स्तर पर बचाव अभियान में जुट गईं।
एनडीआरएफ की दो टीमों में करीब 70 कर्मियों को तैनात किया गया है। इनके साथ डॉग स्क्वॉड भी लगाया गया है। मलबे में फंसे लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर भी इस्तेमाल किए गए।
40-50 साल पुरानी थी इमारत, बेसमेंट में चल रहा था काम
दिल्ली पुलिस के अनुसार इमारत करीब 40 से 50 साल पुरानी थी। इसमें बेसमेंट के अलावा पांच ऊपरी मंजिलें थीं और इसे पीजी के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। हादसे के समय बेसमेंट में मरम्मत या निर्माण से जुड़ा काम चल रहा था।
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि पिछले कई दिनों से इलाके में बारिश हो रही थी और इमारत के बेसमेंट में पानी जमा होने की स्थिति भी बनी थी। हालांकि, पानी जमा होने और नींव कमजोर होने की बात अभी स्थानीय लोगों के दावे के स्तर पर है। हादसे का वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का जायजा लेने के बाद मामले में मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि घटना के लिए जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इमारत मालिक के खिलाफ एफआईआर
दिल्ली पुलिस ने इमारत के कथित मालिक हरिराम बंसल और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपियों का पता लगाने के लिए टीमें भी गठित की हैं।
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इमारत में निर्माण और मरम्मत का काम किस अनुमति के तहत किया जा रहा था और क्या बेसमेंट में चल रहे काम से भवन की संरचना प्रभावित हुई।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से भी कहा गया है कि जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।
अमित शाह ने दिल्ली के अधिकारियों से की बात
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हादसे पर दुख जताते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और एनडीआरएफ के महानिदेशक से बात कर स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन और एनडीआरएफ मिलकर राहत और बचाव अभियान चला रहे हैं तथा घायलों को आवश्यक चिकित्सा सहायता दी जा रही है।
इससे पहले अमित शाह ने दिल्ली में हुई घटना के बाद अपना गोवा दौरा भी बीच में छोड़ दिया था।
हादसे ने फिर खड़े किए पीजी और अवैध निर्माण पर सवाल
सत्य निकेतन की घटना सिर्फ एक इमारत गिरने का हादसा नहीं है। यह दिल्ली में छात्रों के लिए संचालित हो रहे पीजी, पुराने भवनों, अनधिकृत निर्माण और भवनों में किए जा रहे बदलावों की निगरानी को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
सत्य निकेतन और आसपास के इलाकों में पुराने मकानों को पीजी और छात्र हॉस्टल में बदलने का चलन तेजी से बढ़ा है। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक होने के कारण यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र पढ़ाई के लिए आते हैं। ऐसे में इन भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा सीधे हजारों छात्रों की जिंदगी से जुड़ा सवाल है।
लखनऊ के अग्निकांड के बाद दिल्ली का यह हादसा एक बार फिर यह सवाल सामने ला रहा है कि शहरों में नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई आखिर हादसे के बाद ही क्यों होती है? अगर पुराने भवनों, पीजी और अनधिकृत निर्माण की नियमित जांच हो, तो क्या ऐसी त्रासदियों को रोका जा सकता है?
फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। लेकिन राहत अभियान खत्म होने के बाद इस हादसे की जिम्मेदारी तय करना और दिल्ली के छात्र आवासों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करना भी उतना ही जरूरी होगा।








