Shanimol Osman Deputy Speaker: कांग्रेस विधायक शनीमोल उस्मान को मंगलवार को केरल विधानसभा का उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) चुना गया। इसके साथ ही वह 66 वर्षों में इस पद पर पहुंचने वाली कांग्रेस की पहली महिला नेता बन गई हैं। साथ ही, केरल के विधानसभा इतिहास में यह पद संभालने वाली वह चौथी महिला हैं।
विधानसभा अध्यक्ष तिरुवंचूर राधाकृष्णन ने सदन में मतदान के बाद शनीमोल उस्मान के निर्वाचन की घोषणा की। दो बार की विधायक शनीमोल ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के उम्मीदवार और तीन बार के विधायक मोहम्मद मुहास्सिन को हराया।
अध्यक्ष राधाकृष्णन के अनुसार, शनीमोल उस्मान को 99 वोट मिले, जबकि मोहम्मद मुहास्सिन को 34 मत प्राप्त हुए। चार विधायकों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया, जिनमें स्वयं विधानसभा अध्यक्ष भी शामिल थे।
चुनाव परिणाम के बाद शनीमोल उस्मान को विपक्षी बेंच की पहली सीट पर बैठने के लिए आमंत्रित किया गया, जहां उन्होंने नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन से शुभकामनाएं प्राप्त कीं।
60 वें जन्मदिन पर मिला तोहफा
140 सदस्यीय केरल विधानसभा में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के पास वर्तमान में 102 विधायक हैं। वहीं, माकपा (सीपीआई-एम) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के पास 25 सदस्य हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीन विधायक हैं, जिन्होंने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया।
अरूर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली शनीमोल उस्मान ने अपने 60वें जन्मदिन के महज तीन दिन बाद यह संवैधानिक पद संभाला है। उनका राजनीतिक सफर कई चुनावी संघर्षों और उतार-चढ़ावों से भरा रहा है।
शांत और सौम्य स्वभाव के लिए पहचानी जाने वाली शनीमोल छह चुनाव लड़ चुकी हैं। उन्होंने 2019 में अलप्पुझा लोकसभा सीट से भी चुनाव लड़ा था। उन्हें पहली बार 2019 के अलप्पुझा विधानसभा उपचुनाव में जीत मिली थी, हालांकि 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने 2026 के विधानसभा चुनाव में अरूर सीट से जीत दर्ज कर दोबारा सदन में वापसी की।
उनका निर्वाचन केरल के संसदीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय को भी पुनर्जीवित करता है। इससे पहले कांग्रेस की ए. नफीसथ बीवी वर्ष 1960 में उपाध्यक्ष चुनी गई थीं। केरल की पहली विधानसभा में सीपीआई की के.ओ. आयशा बाई इस पद पर रहीं, जबकि 1987 में सीपीआई की भार्गवी थंकप्पन इस पद पर पहुंचने वाली आखिरी महिला थीं।
करीब चार दशक बाद केरल विधानसभा को फिर एक महिला उपाध्यक्ष मिली है, जिसे राज्य की संसदीय परंपरा और महिला प्रतिनिधित्व के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
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