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चार घंटे धूप में खड़ा रखने पर तीसरी मंजिल से कूदी 16 वर्षीय छात्रा, मौत

चार घंटे तक धूप में खड़े होने की सजा नहीं झेल पायी छात्रा और इसके बाद स्कूल की छत से कूद कर दे दी जान। ये घटना अत्यंत दुखद और सिहरन पैदा कर देने वाली है। आरोप है कि स्कूल की महिला अध्यापिका ने छात्रा को चार घंटे तक धूप में खड़े रहने की सजा दी थी। इसके बाद तेज गर्मी की वजह से छात्रा का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और अपमान की वजह से छात्रा ने जान दे दी। ये घटना फरीदाबाद के दबुआ गाजीपुर रोड स्थित नवोदय विद्या निकेतन सीनियर सेकण्ड्री स्कूल की है। हालांकि प्रधानाचार्य आरोपों से इंकार कर रहे हैं। लेकिन पुलिस मामले की जांच कर रही है।

चार घंटे धूप में खड़ा रखने की सजा बनी काल

जानकारी के मुताबिक छात्रा स्कूल की छत पर जाती है और नीचे कूद जाती है। स्कूल के लोग उसे निकटवर्ती अस्पताल ले जाते हैं जहां से गंभीर हालत में उसे रेफर कर दिया जाता है इसके बाद उसे सिविल अस्पताल ले जाया जाता है जहां उसे मृत डिक्लेयर कर दिया जाता है। छात्रा कोई छोटी बच्ची नहीं थी 16 वर्षीय छात्रा कक्षा 11 में पढ़ती थी। उसने स्कूल की तीसरी मंजिल से कूद कर जान दी। परिवार के लोगों ने जब स्कूल में साथी छात्राओं से जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि स्कूल की महिला अध्यापिका ने उसे चार घंटे तक धूप में खड़े रहने की सजा दी थी जिसके बाद उसने यह आत्मघाती कदम उठाया।

अफसोस की बात यह है कि स्कूल में बच्चों को शारीरिक मानसिक प्रताड़ना के खिलाफ सख्त कानून होने के बावजूद स्कूलों में बच्चों के साथ इस तरह की अमानुषिक यातनाओं की खबरें आती रहती हैं। जबकि स्कूलों के भीतर किसी भी छात्र चाहे वह लड़का हो या लड़की को किसी भी प्रकार की कठोर, शारीरिक सजा देना या मानसिक रूप से प्रताड़ित करना कानूनन पूरी तरह से अपराध और प्रतिबंधित है।

क्या कहते हैं बच्चों की सुरक्षा के लिए बने कानून

शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 17(1) भी स्कूलों में बच्चों को शारीरिक दंड देने या मानसिक उत्पीड़न करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाती है। इसी धारा का खंड दो कहता है कि यदि कोई शिक्षक या स्कूल प्रशासन इसका उल्लंघन करता है, तो उस दोषी व्यक्ति के खिलाफ संबंधित सेवा नियमों के तहत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 भी इसकी पुष्टि करते हुए कहती है कि यदि बच्चे की देखरेख या उस पर नियंत्रण रखने वाला कोई भी वयस्क या शिक्षक उसे शारीरिक या मानसिक पीड़ा पहुँचाता है, तो उसे गंभीर अपराध माना जाता है। ऐसा करने पर दोषी को 3 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।

भारतीय न्याय संहिता भी कहती है कि यदि कोई शिक्षक किसी छात्र को पीटता है या चोट पहुँचाता है, तो उस पर सामान्य आपराधिक कानून लागू होते हैं। धारा 323 के तहत इसमें 1 साल तक की सजा या जुर्माना हो सकता है। धारा 352 कहती है कि कठोर सजा के दौरान किसी लड़की की गरिमा या सम्मान को ठेस पहुँचाने वाला दुर्व्यवहार किया जाता है, तो महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा से जुड़ी विशेष आपराधिक धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।

ऐसे में पुलिस जांच में शिक्षिका पर कठोर कार्रवाई हो सकती है लेकिन असली बात है क्या लड़की को न्याय मिल पाएगा।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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