School Vehicle: नगराम में स्कूल वाहन के हादसे ने एक बार फिर राजधानी में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ईश्वर का शुक्र है कि स्कूल वाहन में सवार दस बच्चों में से किसी को गंभीर चोट नहीं आई। लेकिन हादसे के बाद स्कूल वाहन चालक का मौके से भाग जाना अपने आप में कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
सवाल इसलिए भी बड़ा है क्योंकि प्रदेश में 1 से 15 जुलाई तक स्कूल वाहनों के निरीक्षण का विशेष अभियान चलाया गया था। बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल वाहनों में परिचालक रखने के निर्देश भी दिए गए थे। और ये निर्देश किसी और ने नहीं, बल्कि प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिए थे। इसके बावजूद राजधानी में स्कूल वाहनों की जमीनी हकीकत इन निर्देशों की पोल खोलती नजर आ रही है।
राजधानी में 1931 स्कूल वाहन, तमाम में परिचालक नहीं
ताजा स्थिति यह है कि राजधानी में चल रहे करीब 1931 स्कूल वाहनों में तमाम ऐसे हैं, जिनमें परिचालक तक नहीं हैं। सवाल यह है कि जब बच्चों की सुरक्षा के लिए परिचालक रखने के स्पष्ट निर्देश हैं तो फिर इन वाहनों को सड़क पर चलने की अनुमति कैसे मिल रही है?
ऐसा लगता है कि बच्चों की सुरक्षा से ज्यादा स्कूल प्रबंधन के लिए कमाई की दुकान महत्वपूर्ण हो गई है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद परिवहन विभाग की कार्रवाई फिलहाल नोटिस-नोटिस के खेल तक सीमित दिखाई दे रही है, जबकि स्कूल प्रबंधन आंखों पर पट्टी बांधकर और कानों में रूई ठूंसकर बैठा है। अगर यही स्थिति रही तो सिर्फ नोटिस जारी करने से व्यवस्था में कोई बदलाव आने वाला नहीं है।
600 से ज्यादा स्कूल, फिर भी स्कूल के नाम पर सिर्फ 1931 वाहन
राजधानी में 600 से अधिक स्कूल हैं, लेकिन स्कूलों के नाम पर पंजीकृत स्कूल वाहनों की संख्या करीब 1931 बताई जा रही है। वहीं, बड़ी संख्या में स्कूलों ने बच्चों को लाने और ले जाने के लिए निजी वाहन स्वामियों से अनुबंध कर रखा है। ऐसे वाहनों की संख्या करीब 2962 बताई जाती है। यह व्यवस्था अपने आप में बड़ा सवाल खड़ा करती है।
दरअसल, स्कूल प्रबंधन का एक बड़ा हिस्सा बच्चों को लाने-ले जाने की जिम्मेदारी निजी वाहन स्वामियों पर डालकर खुद अपनी जवाबदेही से बचना चाहता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या निजी वाहन से बच्चों को भेज देने भर से स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है? नियमों के मुताबिक स्कूल के बच्चों के साथ किसी तरह की दुर्घटना होने की स्थिति में स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। ऐसे में सिर्फ वाहन मालिक या चालक पर जिम्मेदारी डालकर स्कूल प्रबंधन अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकता।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और केंद्रीय मोटर वाहन नियम भी बेअसर
स्कूल वाहनों की सुरक्षा को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत से लेकर केंद्र सरकार तक स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर चुकी है। इसके बावजूद राजधानी की सड़कों पर इन नियमों की अनदेखी सवाल खड़े कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के 1997 के आदेश में स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था और चालक-परिचालक की नियुक्ति को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। वहीं केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में स्कूल वाहनों में परिचालकों के लिए निर्धारित ड्रेस कोड तथा छात्राओं की सुरक्षा को देखते हुए महिला परिचालक की व्यवस्था जैसे प्रावधान हैं।
इसके अलावा स्कूल वाहनों की फिटनेस और दस्तावेजों को लेकर भी सवाल लगातार उठते रहे हैं। राजधानी में कुछ स्कूल वैन ऐसी भी बताई जा रही हैं, जिनका नियमानुसार ट्रांसफर तक नहीं कराया गया है। स्कूल वाहनों की अधिकतम गति 40 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित होने के बावजूद रफ्तार और सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। यानी नियमों की कमी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश हैं, केंद्रीय मोटर वाहन नियम हैं और मुख्यमंत्री के आदेश भी हैं। कमी अगर है तो सिर्फ उनके ईमानदार और प्रभावी अनुपालन की।
आखिर किसके भरोसे सुरक्षित हैं स्कूली बच्चे?
नगराम की घटना में दस बच्चों का सुरक्षित बच जाना राहत की बात जरूर है, लेकिन इसे व्यवस्था की सफलता नहीं कहा जा सकता। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? जब स्कूल वाहनों की जांच के लिए विशेष अभियान चल चुका है, मुख्यमंत्री खुद बच्चों की सुरक्षा को लेकर निर्देश दे चुके हैं और नियमों की पूरी व्यवस्था मौजूद है, तो फिर सड़कों पर नियमों की धज्जियां क्यों उड़ रही हैं?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति की बात करती है। ऐसे में राजधानी में स्कूल वाहनों की यह हालत उसी जीरो टॉलरेंस नीति की परीक्षा है। सवाल सीधा है बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूल प्रबंधन और वाहन संचालकों पर सिर्फ नोटिस की कार्रवाई होगी या वास्तव में जिम्मेदारी भी तय होगी? क्योंकि बच्चों की सुरक्षा कोई कागजी आदेश नहीं, बल्कि सीधे तौर पर जिंदगी और मौत का सवाल है।








