NIA Action: राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने देश में आतंकी साजिशों और चुनावी हिंसा को लेकर चौतरफा बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने जहाँ एक तरफ पंजाब के जालंधर में आतंकी साजिश रचने वाले ‘अंसार गजवत-उल-हिंद’ (AGH) के तीन आतंकियों को विशेष कोर्ट से सजा दिलवाने में सफलता हासिल की है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल के मालदा और भांगड़ में चुनावी हिंसा व बम धमाकों के मामले में ताबड़तोड़ छापेमारी कर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी की इस कार्रवाई से देश विरोधी ताकतों और राजनीतिक हिंसा फैलाने वाले तत्वों में हड़कंप मच गया है।
पंजाब टेरर कॉन्स्पिरेशी केस: जालंधर हॉस्टल से चला रहे थे नेटवर्क, 3 आतंकियों को 10 साल तक की जेल
पंजाब के मोहाली स्थित विशेष एनआईए कोर्ट ने साल 2018 के जालंधर आतंकी साजिश मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद (AGH) से जुड़े तीन आतंकवादियों को दोषी करार देते हुए कड़ी सजा सुनाई है।
हॉस्टल के कमरे से बरामद हुए थे AK-56 और बारूद
यह मामला अक्टूबर 2018 का है, जब पंजाब पुलिस ने जालंधर के शाहपुर स्थित ‘सीटी इंस्टीट्यूट’ (CT Institute) के हॉस्टल में एक सर्च ऑपरेशन चलाया था। इस दौरान हॉस्टल के एक कमरे से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद हुए थे, जिसमें:
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एक AK-56 राइफल
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मैग्जीन और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस
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घातक विस्फोटक सामग्री शामिल थी।
केंद्र सरकार के निर्देश पर नवंबर 2018 में यह मामला एनआईए को सौंप दिया गया था। जांच में सामने आया कि आरोपी भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने और देश में आतंक फैलाने की बड़ी आपराधिक साजिश रच रहे थे।
कोर्ट ने सुनाई सख्त सजा, 64 गवाहों की हुई गवाही
विशेष अदालत ने इस मामले में जाहिद गुलज़ार, यासिर रफीक भट और मोहम्मद इदरीस शाह को दोषी पाते हुए भारतीय दंड संहिता (IPC), यूएएपीए (UAPA), आर्म्स एक्ट और एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत 5, 7 और 10 साल के कठोर कारावास (RI) की सजा सुनाई है। अधिकतम सजा 10 वर्ष की है। वहीं, एक अन्य आरोपी सुहैल अहमद भट को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है। इस पूरे ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 64 गवाहों के बयान दर्ज करवाए थे।
पश्चिम बंगाल: भांगड़ बम ब्लास्ट मामले में पूर्व TMC विधायक शौकत मोल्ला के घर NIA की रेड, गाड़ी का ड्राइवर गिरफ्तार
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भांगड़ और दक्षिण 24 परगना जिले में हुए भीषण बम धमाकों की जांच के सिलसिले में एनआईए ने गुरुवार सुबह एक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। केंद्रीय बलों की भारी तैनाती के बीच एनआईए की टीमों ने पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक और फरार आरोपी शौकत मोल्ला के कैनिंग ब्लॉक स्थित Jibantala गाँव वाले घर और दफ्तर सहित कुल 8 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
बम बनाने वालों को सुरक्षित भगाने वाला ड्राइवर गिरफ्तार
शौकत मोल्ला रेड के दौरान घर पर मौजूद नहीं था और वह फरार बताया जा रहा है, हालांकि एनआईए की टीम ने उसके बेटे इमरान मोल्ला, पत्नी और बेटी से लंबी पूछताछ की है। इस मामले में एनआईए ने तीसरी बड़ी गिरफ्तारी करते हुए सैनूर मोल्ला नाम के शख्स को दबोच लिया है। सैनूर उस स्कोर्पियो कार का ड्राइवर था, जिसका इस्तेमाल धमाके में मारे गए और घायल हुए बम बनाने वालों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए किया गया था। एनआईए ने तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी जब्त किए हैं।
कौन है शौकत मोल्ला? > शौकत मोल्ला कैनिंग पूर्व निर्वाचन क्षेत्र से 2016 और 2021 में दो बार टीएमसी का विधायक रह चुका है। हालांकि, हालिया विधानसभा चुनाव में उसने भांगड़ सीट से चुनाव लड़ा था, जहाँ उसे आईएसएफ (ISF) उम्मीदवार नौशाद सिद्दीकी से हार का सामना करना पड़ा।
मालदा चुनावी हिंसा: ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को बंधक बनाने वाले 2 और उपद्रवी गिरफ्तार
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में चुनावी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभ्यास के दौरान भड़की हिंसा और राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम करने के मामले में एनआईए ने दो और मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस टीम पर हमला और न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने का आरोप
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मौलाना इमरान अली और रिंकू एसके के रूप में हुई है। एनआईए के मुताबिक, इन दोनों ने गैर-कानूनी तरीके से भीड़ इकट्ठा कर कानून-व्यवस्था को हाथ में लिया, हाईवे जाम किया और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों व न्यायिक अधिकारियों (Judicial Officers) को अवैध रूप से बंधक बनाकर उन पर हमला किया था। इस हिंसक हमले में कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे, यहाँ तक कि एक पुलिस बस के ड्राइवर के सिर पर पत्थर लगने से उसने वाहन से नियंत्रण खो दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चल रही है जांच
सुप्रीम कोर्ट द्वारा मालदा हिंसा का स्वतः संज्ञान (Suo Moto) लिए जाने के बाद यह जांच एनआईए को सौंपी गई थी। इस पूरे मामले में अब तक कुल 12 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें से 4 मामलों में एनआईए ने कोलकाता की विशेष अदालत में 31 आरोपियों के खिलाफ पहले ही चार्जशीट दाखिल कर दी है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023, राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम और पश्चिम बंगाल सार्वजनिक व्यवस्था रखरखाव अधिनियम की सख्त धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। वर्तमान में इस हिंसा के संबंध में 35 आरोपी न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं।
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