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Dharmendra Pradhan Resignation Gen Z: क्या बदल गई Gen Z की तस्वीर, सोनाक्षी सिन्हा के वीडियो ने छेड़ी नई बहस

Dharmendra Pradhan Resignation Gen Z:  कुछ समय पहले तक Gen Z को लेकर एक आम धारणा थी कि यह पीढ़ी सोशल मीडिया, रील्स और ट्रेंडिंग कंटेंट तक सीमित है। लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने इस सोच को बदलने का काम किया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा का सोशल मीडिया पोस्ट इसी बदले हुए नजरिए की एक झलक के तौर पर सामने आया है।

सोनाक्षी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर करते हुए कहा कि वह पहले Gen Z को हल्के में लेती थीं, लेकिन अब उनकी सोच बदल गई है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कैमरे के सामने कान पकड़कर दंड-बैठक भी की और कहा कि अब वह भी Gen Z जैसी बनना चाहती हैं। उनके इस वीडियो को सिर्फ एक सेलिब्रिटी रिएक्शन के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे उस धारणा में बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें युवा पीढ़ी को अक्सर गंभीर मुद्दों से दूर माना जाता रहा है।

सोनाक्षी ने वीडियो में कहा, “मैं तो आर्टिस्ट हूं, लेकिन Gen Z आर्ट है। पता है, मैं Gen Z को बहुत हल्के में लेती थी।” उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर Gen Z की भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

सोशल मीडिया से सड़कों तक पहुंची Gen Z की आवाज

Gen Z की सबसे बड़ी ताकत उसकी डिजिटल पहुंच मानी जाती है। यह पीढ़ी किसी मुद्दे पर अपनी बात रखने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करती है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने यह भी दिखाया है कि डिजिटल एक्टिविज्म के साथ-साथ सड़क पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करने की क्षमता भी इस पीढ़ी में मौजूद है।

छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों ने इस बहस को और तेज किया। सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और लाइव अपडेट के जरिए युवाओं ने न सिर्फ अपनी बात रखी, बल्कि अपने मुद्दों को व्यापक जनसमर्थन तक पहुंचाने की कोशिश भी की।

यही वजह है कि अब Gen Z को केवल ‘रील्स और सोशल मीडिया की पीढ़ी’ कहकर खारिज करना आसान नहीं है। शिक्षा, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था और भविष्य से जुड़े सवालों पर इस पीढ़ी की सक्रियता ने यह दिखाया है कि उसके लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी आवाज उठाने का एक महत्वपूर्ण जरिया भी है।

सोनाक्षी के पोस्ट ने बदलती सोच को दिया सेलिब्रिटी चेहरा

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोनाक्षी सिन्हा ने लगातार कई सोशल मीडिया पोस्ट साझा किए। इनमें एक पोस्ट में उन्होंने सीधे तौर पर इस्तीफे का जिक्र किया, जबकि एक अन्य स्टोरी में प्रदर्शन कर रहे छात्रों की तस्वीर साझा की। उन्होंने छात्र आंदोलन से जुड़े लोगों और सोनम वांगचुक के समर्थन में भी अपनी प्रतिक्रिया दी।

सोनाक्षी का Gen Z को लेकर वीडियो इसी सिलसिले की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि उन्होंने खुद स्वीकार किया कि वह पहले Gen Z को कम आंकती थीं। ऐसे में उनका वीडियो उस व्यापक बदलाव की ओर इशारा करता है, जिसमें युवा पीढ़ी को लेकर बनी पारंपरिक धारणाएं धीरे-धीरे बदल रही हैं।

क्या Gen Z अब सिर्फ ट्रेंड नहीं, बदलाव की ताकत है?

Gen Z को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह पीढ़ी सिर्फ सोशल मीडिया ट्रेंड बनाने तक सीमित है या फिर वह सामाजिक और राजनीतिक बदलाव में भी भूमिका निभा सकती है?

इस पीढ़ी का व्यवहार पिछली पीढ़ियों से काफी अलग है। यह तेजी से जानकारी हासिल करती है, सवाल पूछती है और किसी मुद्दे पर अपनी राय सार्वजनिक करने में संकोच नहीं करती। सोशल मीडिया ने उसे अपनी बात सीधे लोगों तक पहुंचाने का मंच दिया है। यही वजह है कि किसी भी आंदोलन या सार्वजनिक बहस में Gen Z की डिजिटल मौजूदगी अब आसानी से नजरअंदाज नहीं की जा सकती।

हालांकि, सोशल मीडिया की सक्रियता को सीधे राजनीतिक प्रभाव या वास्तविक बदलाव के बराबर मानना भी जल्दबाजी होगी। किसी भी आंदोलन की सफलता कई दूसरे कारकों पर निर्भर करती है। लेकिन इतना जरूर है कि Gen Z ने यह धारणा चुनौती दी है कि युवा पीढ़ी सिर्फ मनोरंजन और सोशल मीडिया तक सीमित है।

सेलिब्रिटीज की प्रतिक्रियाओं ने बढ़ाई चर्चा

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोनाक्षी सिन्हा के अलावा कई अन्य फिल्मी हस्तियों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। आलिया भट्ट, प्रियंका चोपड़ा, शबाना आजमी, प्रकाश राज, स्वरा भास्कर और भूमि पेडनेकर समेत कई सेलेब्स के नाम इस चर्चा से जुड़े।

एक्ट्रेस और एंटरप्रेन्योर पारुल गुलाटी का पोस्ट भी सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा। उन्होंने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वह कथित तौर पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का जश्न मनाती नजर आईं।

इन प्रतिक्रियाओं ने एक तरफ छात्रों और युवाओं के मुद्दों पर सेलिब्रिटीज की भूमिका को चर्चा में ला दिया, वहीं दूसरी तरफ Gen Z की छवि पर भी बहस तेज कर दी।

Gen Z की बदली छवि की कहानी अभी बाकी है

सोनाक्षी सिन्हा का वीडियो भले ही मजाकिया अंदाज में बनाया गया हो, लेकिन इसके पीछे की बहस गंभीर है। सवाल सिर्फ यह नहीं है कि Gen Z ने क्या किया, बल्कि सवाल यह भी है कि समाज ने इस पीढ़ी को अब तक किस नजरिए से देखा।

जिस पीढ़ी को अक्सर गैर-गंभीर, सोशल मीडिया पर निर्भर और वास्तविक मुद्दों से दूर बताया जाता रहा, वही पीढ़ी अब शिक्षा और अपने भविष्य से जुड़े सवालों को लेकर सार्वजनिक बहस के केंद्र में दिखाई दे रही है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद Gen Z को लेकर बदली सोच इसी बदलाव की ओर इशारा करती है। हालांकि, किसी भी राजनीतिक या सामाजिक घटनाक्रम के प्रभाव का अंतिम आकलन समय के साथ ही किया जा सकता है। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि Gen Z ने अपनी आवाज को सिर्फ स्क्रीन तक सीमित रखने के बजाय उसे सार्वजनिक बहस का हिस्सा बनाने की कोशिश की है।

और शायद यही वजह है कि फिल्म अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा जैसी सेलिब्रिटीज को भी यह कहना पड़ा— “मैं Gen Z को बहुत हल्के में लेती थी।”

अब देखना यह होगा कि यह बदली हुई धारणा महज सोशल मीडिया की चर्चा बनकर रह जाती है या Gen Z आने वाले समय में सामाजिक और राजनीतिक विमर्श को वास्तव में नई दिशा देती है।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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