Kirana Hills एक बार फिर सुर्खियों में है। इसे लेकर भारत और पाकिस्तान एक बार फिर आमने सामने आ गए लगते हैं। वास्तव में यह जानने की जरूरत है कि भारत की साफगोई से कही गई बात के बाद पाकिस्तान को मिर्च क्यों लगी। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किराना हिल्स को लेकर पाकिस्तान का ताजा खंडन उसके लिए भले ही जरूरी राजनीतिक सफाई हो, लेकिन पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान के विस्तृत बयान के सामने यह जवाब खुद में कई सवालों को जन्म देता हुआ दिखायी देता है।
खास बात यह है कि जनरल चौहान ने किराना हिल्स को भारत का जानबूझकर चुना गया लक्ष्य नहीं बताया है। उन्होंने इससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण बात कही है—सरगोधा के आसपास पाकिस्तानी रडारों की तलाश के लिए भेजे गए लोइटरिंग म्यूनिशन में से कोई मिशन पूरा न कर पाने के बाद ईंधन खत्म होने या किसी अन्य वजह से किराना हिल्स की किसी पहाड़ी से टकराया हो सकता है।
यानी भारत की ओर से यह दावा नहीं किया गया कि पाकिस्तान की किसी परमाणु सुविधा को निशाना बनाया गया था। इसके विपरीत, भारत की ओर से सामने आया विवरण यह बताता है कि लक्ष्य सरगोधा और उसके आसपास मौजूद सैन्य ठिकाने तथा रडार थे। ऐसे में पाकिस्तान का यह कहना कि उसकी कोई रणनीतिक संपत्ति या संवेदनशील संरचना प्रभावित नहीं हुई, मूल सवाल का जवाब नहीं देता।
पहले भारत ने क्या कहा, यह समझना जरूरी है
25 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के विमर्श कार्यक्रम में जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लिए गए सैन्य फैसलों पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। किराना हिल्स के संबंध में उन्होंने साफ किया कि भारतीय सैन्य नेतृत्व ने उसे लक्ष्य बनाकर हमला नहीं किया था। भारत के तत्कालीन एयर ऑपरेशंस प्रमुख एयर मार्शल ए.के. भारती ने भी 1 मई 2025 को स्पष्ट किया था कि किराना हिल्स को निशाना नहीं बनाया गया। जनरल चौहान ने इसके बाद उस घटना की संभावित व्याख्या दी, जिसने पाकिस्तान को अब सफाई देने के लिए मजबूर किया है।
रडार की तलाश का अभियान
उनके मुताबिक सरगोधा के आसपास रडारों की तलाश के लिए बड़ी संख्या में लोइटरिंग म्यूनिशन भेजे गए थे। किराना हिल्स सरगोधा से लगभग 10 किलोमीटर उत्तर में है। ऐसे म्यूनिशन कुछ समय तक लक्ष्य तलाश सकते हैं और यदि लक्ष्य नहीं मिलता तो अंततः नीचे आ सकते हैं। इसी आधार पर चौहान ने संभावना जताई कि कोई लोइटरिंग म्यूनिशन किराना हिल्स की किसी पहाड़ी से टकराया हो। उन्होंने यह भी बताया कि उस समय पाकिस्तानी मीडिया में किराना हिल्स से धुआं निकलने वाली तस्वीरें दिखाई गई थीं। यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें भारत ने न तो परमाणु ठिकाने पर हमला करने का दावा किया और न ही किराना हिल्स को अपने ऑपरेशन का घोषित लक्ष्य बताया।
पाकिस्तान का जवाब क्या कहता है?
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने जनरल चौहान के बयान को खारिज करते हुए कहा कि किराना हिल्स से संबंधित भारत के दावे स्वीकार्य नहीं हैं। उनका कहना था कि मई 2025 के सैन्य संघर्ष के दौरान पाकिस्तान की कोई रणनीतिक संपत्ति या संवेदनशील बुनियादी ढांचा प्रभावित नहीं हुआ। यहीं पाकिस्तान के जवाब की कमजोरी दिखाई देती है। क्योंकि जनरल चौहान ने यह दावा किया ही नहीं कि भारत ने पाकिस्तान की परमाणु संरचना को नष्ट कर दिया या उसे जानबूझकर निशाना बनाया। उनका बयान एक संभावित घटनाक्रम की व्याख्या है—कि रडार की तलाश में भेजा गया लोइटरिंग म्यूनिशन अपना लक्ष्य नहीं पा सका और संभवतः किराना हिल्स की किसी पहाड़ी से टकरा गया। ऐसे में पाकिस्तान का ‘कोई रणनीतिक संपत्ति प्रभावित नहीं हुई’ कहना उस सवाल का खंडन नहीं करता, जो जनरल चौहान ने उठाया है।
असली सवाल परमाणु ठिकाने का नहीं, भारत की पहुंच का है
किराना हिल्स को लेकर बहस को केवल इस सवाल तक सीमित करना कि वहां कोई परमाणु सुविधा क्षतिग्रस्त हुई या नहीं, पाकिस्तान के लिए सुविधाजनक हो सकता है। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि भारत ने सरगोधा के आसपास कितनी गहराई तक अपनी सैन्य क्षमताओं का इस्तेमाल किया और किस तरह के हथियारों के जरिए पाकिस्तान की वायु रक्षा तथा रडार नेटवर्क को चुनौती दी।
जनरल चौहान के बयान से यह तस्वीर सामने आती है कि भारत ने पारंपरिक बड़े पैमाने के हवाई हमले के बजाय लोइटरिंग म्यूनिशन और ड्रोन जैसी क्षमताओं के माध्यम से एक अलग ऑपरेशनल विकल्प अपनाया। इसे उन्होंने ‘तीसरा विकल्प’ बताया—ऐसा विकल्प जो संघर्ष की सीमा को नियंत्रित रखते हुए सफलता की संभावना और अचानक हमले का लाभ दे सके। यही वह बिंदु है जिसे पाकिस्तान के खंडन से अलग करके देखना होगा।
पाकिस्तान की सफाई से भारत की सैन्य उपलब्धि कम नहीं होती
यदि पाकिस्तान का तर्क यह है कि उसकी कोई रणनीतिक संपत्ति प्रभावित नहीं हुई, तो इससे भारत की कार्रवाई का सैन्य प्रभाव स्वतः समाप्त नहीं हो जाता। जनरल चौहान ने स्वयं बताया कि भारत ने सरगोधा पर हमला उस समय भी जारी रखा जब पाकिस्तान की ओर से बातचीत की इच्छा जताई गई थी। उनके अनुसार करीब सुबह 10 बजे पाकिस्तान ने संपर्क कर बातचीत की इच्छा जताई और उसी समय एयर चीफ ने उनसे सरगोधा पर प्रस्तावित कार्रवाई के बारे में पूछा। चौहान ने कार्रवाई आगे बढ़ाने को कहा।
इसके बाद दो और लक्ष्यों की पहचान करने को कहा गया। इनमें स्कार्दू भी शामिल था, लेकिन खराब मौसम के कारण योजना बदली और भोलारी को विकल्प बनाया गया। यह विवरण बताता है कि ऑपरेशन सिंदूर कोई जल्दबाजी में की गई एकल कार्रवाई नहीं थी। भारतीय सैन्य नेतृत्व के पास लक्ष्य, विकल्प और आगे की कार्रवाई के लिए स्पष्ट योजना थी।
आखिरी प्रहार भारत करेगा यह थी रणनीतिक सोच
जनरल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर के पीछे भारत की एस्केलेशन रणनीति का एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने रखा। उन्होंने बताया कि सैन्य नेतृत्व की सोच थी कि संघर्ष चाहे जिस स्तर तक जाए, अंतिम सैन्य प्रहार भारत की ओर से होना चाहिए। इसका अर्थ यह था कि भारत केवल पाकिस्तान की कार्रवाई का जवाब देने तक सीमित नहीं रहना चाहता था, बल्कि संघर्ष की गति और अगले कदम पर रणनीतिक नियंत्रण बनाए रखना चाहता था।
किराना हिल्स का घटनाक्रम भी इसी व्यापक सैन्य रणनीति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। भारत ने लक्ष्य चुने, परिस्थितियों के अनुसार लक्ष्य बदले, मौसम के अनुसार ऑपरेशन में बदलाव किया और लोइटरिंग म्यूनिशन जैसी क्षमताओं का इस्तेमाल किया। यह एक ऐसी सैन्य रणनीति की ओर संकेत करता है जिसमें लक्ष्य पर सटीक दबाव बनाते हुए संघर्ष को अनावश्यक रूप से व्यापक होने से रोकने की कोशिश की गई।
पाकिस्तान के खंडन को क्यों पढ़ना चाहिए सावधानी से?
आश्चर्य की बात है कि पाकिस्तान के खंडन को तमाम भारतीय मीडिया ने हाथों हाथ लिया लेकिन इसे पढ़ने में समझदारी नहीं दिखायी। पाकिस्तान का यह कहना कि कोई रणनीतिक संपत्ति प्रभावित नहीं हुई, अपने आप में यह साबित नहीं करता कि किराना हिल्स के आसपास कोई घटना हुई ही नहीं थी। इसी तरह भारत की ओर से भी उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर यह निर्णायक रूप से नहीं कहा जा सकता कि कोई भारतीय म्यूनिशन निश्चित रूप से उसी पहाड़ी से टकराया था।
लेकिन जनरल चौहान का बयान एक महत्वपूर्ण अंतर जरूर स्पष्ट करता है। भारत ने किराना हिल्स को लक्ष्य बनाने का दावा नहीं किया। इसलिए पाकिस्तान का जवाब एक ऐसे दावे का खंडन करता दिखाई देता है जिसे भारत ने किया ही नहीं। भारत की ओर से सामने आया बयान यह है कि वहां किसी लोइटरिंग म्यूनिशन के पहुंचने की संभावना थी और उसका संभावित कारण सरगोधा के आसपास रडार तलाशने वाला मिशन हो सकता है।
यही वजह है कि पाकिस्तान का ताजा बयान ज्यादा एक रणनीतिक सफाई की तरह दिखाई देता है, न कि जनरल चौहान की पूरी बात का ठोस खंडन।
ऑपरेशन सिंदूर की तस्वीर अब और साफ
जनरल चौहान के बयान का महत्व केवल किराना हिल्स तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में बेहतर परिस्थितिजन्य जागरूकता, तीनों सेनाओं के बीच बेहतर नेटवर्किंग और स्पष्ट राजनीतिक दिशा के कारण बेहतर निर्णय लेने की क्षमता हासिल की। उनका दावा है कि सेना, नौसेना और वायुसेना के पास एक साझा ऑपरेशनल तस्वीर थी। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हुई।
यानी ऑपरेशन सिंदूर की कहानी केवल मिसाइलों और विमानों के इस्तेमाल की कहानी नहीं है। यह लक्ष्य चयन, सूचना तंत्र, नेटवर्किंग, लोइटरिंग म्यूनिशन, ड्रोन, मौसम के अनुसार ऑपरेशन बदलने और एस्केलेशन को नियंत्रित करने की एक समन्वित रणनीति की कहानी भी है।
पाकिस्तान का खंडन सवाल खत्म नहीं करता
किराना हिल्स पर पाकिस्तान चाहे जितनी बार यह कहे कि उसकी कोई रणनीतिक संपत्ति प्रभावित नहीं हुई, इससे जनरल चौहान द्वारा बताई गई पूरी घटनाक्रम की तस्वीर खारिज नहीं होती। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि भारत ने किराना हिल्स को जानबूझकर निशाना बनाने का दावा नहीं किया। भारत के अनुसार सरगोधा के आसपास रडार की तलाश में भेजे गए लोइटरिंग म्यूनिशन में से कोई अपना लक्ष्य नहीं पा सका और संभव है कि वह बाद में किराना हिल्स की किसी पहाड़ी से टकराया हो। इसलिए पाकिस्तान का जवाब इस सवाल का निर्णायक उत्तर नहीं देता कि वहां वास्तव में क्या हुआ था।
एक नई तस्वीर
बल्कि जनरल चौहान के बयान से ऑपरेशन सिंदूर की एक ऐसी तस्वीर सामने आती है जिसमें भारत ने सीमित लेकिन तकनीकी रूप से सक्षम सैन्य विकल्पों के जरिए पाकिस्तान पर दबाव बनाया, लक्ष्य के अनुसार रणनीति बदली और संघर्ष की दिशा पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। किराना हिल्स पर पाकिस्तान का खंडन इस तस्वीर को मिटाने के बजाय एक और सवाल जरूर छोड़ जाता है—अगर वहां कुछ हुआ ही नहीं था, तो फिर उस घटनाक्रम की तस्वीरें और धुएं की खबरें उस समय सामने कैसे आईं?
इस सवाल का अंतिम उत्तर स्वतंत्र रूप से उपलब्ध सार्वजनिक साक्ष्यों से तय होना बाकी है। लेकिन इतना स्पष्ट है कि पाकिस्तान का ताजा खंडन जनरल चौहान के बयान में मौजूद उस मूल तथ्य को नहीं काटता कि किराना हिल्स भारत का घोषित लक्ष्य नहीं था और वहां संभावित प्रभाव सरगोधा के आसपास चल रहे रडार-हंट ऑपरेशन का अनपेक्षित परिणाम हो सकता था।
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