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बेसिक स्कूलों में अब आसान नहीं होगा ‘मजाक’, यूट्यूबर्स और मीडिया की एंट्री पर लगी रोक

अब बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों का मजाक बनाना आसान नहीं रहा, क्योंकि अब इन स्कूलों में मीडिया के विभिन्न माध्यमों की एंट्री बैन हो गई है। उत्तर प्रदेश के अलग अगल जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारी इस आशय के आदेश जारी कर रहे हैं। बेसिक शिक्षा परिषद का यह कदम काकरोच जनता पार्टी के सरकारी स्कूलों का 15 अगस्त से शुरू किये गए सोशल आडिट अभियान के नजरिये से महत्वपूर्ण है। हालांकि इस पर एनपीएस कर्मचारी संघ पहले ही कह चुका है कि वह सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना ऐसे किसी आडिट का विरोध करेगा।

बलरामपुर जिले में अनधिकृत बाहरी लोगों की एंट्री बैन हो गई है। अब बिना परमीशन के यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया यूजर्स इन स्कूलों में नहीं घुस पाएंगे। इसके लिए उन्हें सक्षम अधिकारी की परमीशन लेनी होगी। इस तरह से इन स्कूलों की आलोचना करना सामाजिक संगठनों के लिए अब आसान नहीं होगा।

क्या है आदेश

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विकास चंद्र श्रीवास्तव ने 17 अगस्त को जारी एक आदेश में कहा है कि कुछ यूट्यूबर्स और बाहरी लोग परिषद के संचालित स्कूलों में बिना परमीशन घुस रहे हैं और स्कूल के फोटोग्राफ और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। इस तरह की गतिविधियां शिक्षण पढ़ाई और परिषद की छवि को नुकसान पहुंचा रही हैं। अधिकारियों को जिला और ब्लाक स्तर पर समय समय पर स्कूलों का निरीक्षण करने को कहा गया है। इसलिए परिषद द्वारा संचालित स्कूलों में बाहरी तत्वों, यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों के प्रवेश को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाता है।

शिक्षकों से कहा गया है कि किसी भी बाहरी व्यक्ति, यूट्यूबर को सक्षम अधिकारी की अनुमति के बगैर स्कूलों में प्रवेश न दें उन्हें फोटोग्राफ और वीडियो न बनाने दें। आदेश में यह भी कहा गया है कि अधिकारी जो स्कूलों का निरीक्षण करेंगे वह विजिटर रजिस्टर पर साइन भी करेंगे।

शिक्षा की गुणवत्ता का होगा बंटाधार

इस कदम की तमाम शिक्षाविदों ने आलोचना करते हुए कहा है कि इससे शिक्षा की पारदर्शिता प्रभावित होगी। मां पाटेश्वरी यूनिवर्सिटी के पूर्व डीन राजेश कुमार सिंह ने कहा है कि यह तानाशाहीपूर्ण आदेश है, परिषद के स्कूलों की मिड डे मील जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन और शिक्षा की गुणवत्ता के लिए जनता द्वारा निरीक्षण आवश्यक है।

दूसरी ओर परिषद ने भी इंटरनेट मीडिया पर नकारात्मक पोस्टों का जवाब देने के लिए कमर कस ली है। और वह इंटरनेट मीडिया पर किसी भी नकारात्मक पोस्ट का तत्काल काउंटर करेगा। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी इस संबंध में खासतौर पर सक्रिय हैं।

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परिषद को ऐसे वीडियो से मिर्ची लगी

इससे पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने काकरोच जनता पार्टी के “स्कूल ठीक करो” अभियान पर व्यंग्य करते हुए लोगों से कहा था, “जाओ, वीडियो बनाओ और स्कूलों को दिखाओ।”

इस पर एक एक्स यूजर ने वीडियो पोस्ट करते हुए हकीकत दिखायी थी। और वीडियो में ये सब दिख रहा है: गिरती छतें, टखनों तक पानी से भरे क्लासरूम, बच्चों को परोसा जा रहा घटिया खाना और बुनियादी सुविधाओं की दयनीय हालत। अगर सरकार चाहती है कि लोग उसके स्कूलों के वीडियो बनाएं, तो लोग खुशी-खुशी सच्चाई दिखाएंगे।  क्योंकि व्यंग्य से गिरती छत ठीक नहीं होगी। राजनीतिक भाषणों से पानी से भरे क्लासरूम खाली नहीं होंगे। और बहाने से बच्चों को बेहतर खाना नहीं मिलेगा। बेहतर सरकारी स्कूलों की मांग करने वालों का मज़ाक उड़ाने के बजाय, शायद सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए। “स्कूल ठीक करो” समस्या नहीं है। इन स्कूलों की हालत समस्या है।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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