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Delimitation Bill Row: खड़गे का पीएम मोदी को पत्र; सर्वदलीय बैठक की मांग

Delimitation Bill Row: संसद में परिसीमन (Delimitation) को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 से जुड़े सरकार के संशोधित प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।

खड़गे ने अपने पत्र में कहा कि सरकार संसद में विधेयक दोबारा लाने की तैयारी कर रही है। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों को प्रस्तावों का विस्तार से अध्ययन करने का पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए और संसद में पेश किए जाने से पहले इस विषय पर सर्वदलीय बैठक आयोजित की जानी चाहिए।

खड़गे ने क्या कहा

सोशल मीडिया पर पत्र साझा करते हुए खड़गे ने लिखा कि उन्होंने एक बार फिर प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि सरकार के संशोधित परिसीमन प्रस्तावों पर सभी दलों के साथ चर्चा की जाए। उन्होंने याद दिलाया कि मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान उन्होंने कई बार संसदीय कार्य मंत्री को पत्र लिखकर इसी तरह की बैठक बुलाने का अनुरोध किया था, लेकिन उन अनुरोधों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

खड़गे ने यह भी कहा कि इसके बाद 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और स्पष्ट अंतर से पारित होने से रह गया। उनका कहना है कि अब यदि सरकार संशोधित प्रस्तावों के साथ विधेयक दोबारा लाती है तो सभी दलों को पहले उसकी जानकारी और अध्ययन का अवसर मिलना चाहिए।

कांग्रेस का आक्रामक रुख

कांग्रेस ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से खड़गे के पत्र का प्रमुख अंश साझा किया। पार्टी ने कहा कि विपक्ष की मांग केवल इतनी है कि सरकार अपने संशोधित परिसीमन प्रस्तावों पर सभी राजनीतिक दलों से संवाद करे और विधेयक संसद में लाने से पहले पर्याप्त समय उपलब्ध कराए।

इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश, पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया भारद्वाज और कांग्रेस नेता अरविंद गुनासेकर ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर खड़गे की मांग का समर्थन किया। नेताओं ने कहा कि परिसीमन जैसे संवेदनशील और दूरगामी प्रभाव वाले विषय पर व्यापक राजनीतिक सहमति और पारदर्शी चर्चा आवश्यक है।

फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से खड़गे के नए पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, सरकार के संशोधित परिसीमन प्रस्तावों को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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