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FIR पर सरकार के रुख से भड़की काकरोच जनता पार्टी, 2 दिन का अल्टीमेटम

काकरोच जनता पार्टी ने भारत सरकार पर इस देश के युवाओं के साथ विश्वासघात करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए दो दिन के अंदर वादे पूरे करने की मांग करते हुए एक बार फिर से राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ने का अल्टीमेटम दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने तीन बार सूची मांगी फिर सरकार फेल क्यों

कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक और स्वयं को खोजी पत्रकार होने का दावा करने वाले सौरव दास ने अपने ट्वीटर हेंडिल से आज शाम एक लम्बा बयान पोस्ट किये है जिसमें उन्होंने कहा है आज की सुनवाई के दौरान, सर्वोच्च न्यायालय ने अपना इरादा स्पष्ट कर दिया है, उसने केंद्र सरकार से देश भर में छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर की सूची मांगी ताकि अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए वह उन सभी को एक साथ रद्द कर सके।

न्यायालय ने यह जानकारी एक बार नहीं, दो बार नहीं, बल्कि तीन बार मांगी है। फिर भी, केंद्र सरकार के वकील ने ऐसी सूची उपलब्ध कराने का वादा नहीं किया है और इसके बजाय सक्रिय रूप से इसका विरोध किया। लेकिन क्यों?

हमारी सद्भावना का क्या सिला मिला

सौरव दास लिखते हैं कि काकरोच जनता पार्टी ने सद्भावनापूर्वक 25 जुलाई को अपना राष्ट्रव्यापी आंदोलन समाप्त कर दिया, जब भारत सरकार ने काकरोच जनता पार्टी के साथ एक राष्ट्रीय प्रेस कॉन्फ्रेंस में एफआईआर वापस लेने, प्रदर्शनकारियों को दंडात्मक कार्रवाई से बचाने और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने के संबंध में ठोस प्रतिबद्धताएं जताईं। आज, सर्वोच्च न्यायालय ने स्वयं उन प्रतिबद्धताओं में से एक को लागू करने का स्पष्ट मार्ग दिखाया है।

दरअसल, एफआईआर की समेकित सूची उपलब्ध कराने से केंद्र सरकार और भाजपा/एनडीए शासित राज्यों के लिए 25 जुलाई को देश को दिए गए आश्वासन को पूरा करना आसान हो जाएगा। लेकिन भारत सरकार इसका विरोध कर रही है।

सरकार बताए वादा निभाएगी या नहीं

काकरोच जनता पार्टी के सह संयोजक लिखते हैं कि न्यायालय ने केंद्र सरकार को एक विकल्प भी दिया, जिसमें कहा गया कि यदि ऐसे मामले हैं जिनमें जघन्य अपराधों का इतिहास रखने वाले कुख्यात अपराधी शामिल हैं, जिन पर विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा करने का आरोप है, तो सरकार उन एफआईआर को अलग से चिह्नित कर सकती है ताकि ऐसे मामलों पर उनके गुण-दोष के आधार पर विचार किया जा सके।

अब इस देश के युवाओं को यह पूछने का पूरा अधिकार है कि क्या भारत सरकार का अपने वचन का पालन करने का कोई इरादा था, या 25 जुलाई को दो केंद्रीय मंत्रियों द्वारा राष्ट्र के समक्ष दिए गए आश्वासन केवल एक शांतिपूर्ण राष्ट्रव्यापी आंदोलन को समाप्त करने के लिए थे।

अल्टीमेटम छात्रों के विश्वास से खिलवाड़ की इजाजत नहीं

सौरव दास ने कहा हम सरकार को भारत के छात्रों, जेनरेशन-जेड और युवा नागरिकों के विश्वास के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं देंगे। काकरोच जनता पार्टी ने धैर्य दिखाया है। हमने सद्भावनापूर्वक बातचीत की है। हमने सद्भावनापूर्वक अपना आंदोलन समाप्त किया है। और हमने सरकार को सद्भावनापूर्वक अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करने के लिए पर्याप्त अवसर दिया है।

अब हमारा धैर्य समाप्त हो रहा है। इसलिए हम अब सरकार को चेतावनी देते हैं। यदि सरकार 25 जुलाई की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए तुरंत ठोस कदम नहीं उठाती है, तो कॉकरोच जनता पार्टी अगले दो दिनों के भीतर अपनी राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक बुलाएगी ताकि देशव्यापी कार्रवाई की अगली रणनीति तय की जा सके।

सह संयोजक ने पुनः कहा कि हमें उम्मीद है कि सरकार इस समय की गंभीरता को समझेगी। संयम को आत्मसमर्पण न समझें। सद्भावना को कमजोरी न समझें। और पूरी पीढ़ी के भरोसे के साथ खिलवाड़ न करें। आगे सीजेपी क्या करेगी, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत सरकार अब क्या निर्णय लेती है।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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