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उमर अब्दुल्ला के बयान से जम्मू-कश्मीर पर फिर सियासी घमासान

जम्मू और कश्मीर में सबकुछ सामान्य नहीं है। यह बात आज राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपना जहरीला बयान देकर साबित कर दी। अलगाववादी पाक परस्त ताकतें सिर उठाने के अवसर की तलाश में हैं। और स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री का अलगाववादी बयान इसी हताशा को दर्शाता है। उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को स्वतंत्रता दिवस समारोह के मौके पर कहा कि अगर केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त न किया होता और इस क्षेत्र से राज्य का दर्जा न छीना होता, तो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के लोग जम्मू-कश्मीर में विलय के लिए विद्रोह कर देते। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इस तरह की ओछी राजनीति करना निंदनीय है।

चाहते क्या हैं उमर अब्दुल्ला

ऐसा लगता है कि उमर अब्दुल्ला को विशेष दर्जे की आड़ में राज्य में आतंकवाद चाहिए। जब कश्मीरी पंडितों को राज्य से लूटकर निकाला गया उस समय उमर अब्दुल्ला की कश्मीरियत नहीं जगी थी। भारतीय सेना ने बहादुरी से कबाइलियों को खदेड़ा न होता तो आज कश्मीर पर पाकिस्तान का कब्जा हो चुका होता। और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीरियों की तरह उमर अब्दुल्ला भी आज बिलबिला रहे होते तो शायद ज्यादा सही होता।

अब्दुल्ला ने कहा कि पीओके की स्थिति ने कश्मीर के लोगों के उस फैसले को सही साबित कर दिया है, जिन्होंने 1947 में पाकिस्तान से आए कबायली हमलावरों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और भारत का हिस्सा बनने का विकल्प चुना। अब्दुल्ला ने कहा कि पीओके की स्थिति से उन्हें गहरा दुख हुआ है, जहां दर्जनों लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग करने के लिए जेल में डाल दिए गए। उन्होंने अपने दादा और जम्मू-कश्मीर के पहले प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद अब्दुल्ला को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने 1947 में पाकिस्तानी हमलावरों के खिलाफ लड़ाई में कश्मीर के लोगों का नेतृत्व किया और भारतीय सेना के कश्मीर पहुंचने से पहले ही अपनी मातृभूमि की रक्षा की।

स्वतंत्रता दिवस पर उमर अब्दुल्ला का विलाप

उमर अब्दुल्ला ने कहा सीमा पार की स्थिति देखकर मुझे एहसास होता है कि हमारे पूर्वज, जिन्होंने कहा था ‘हमलावर खबरदार, हम कश्मीरी हैं तैयार’, सही थे। उन्होंने कहा कि पीओके की स्थिति देखकर मुझे बहुत दुख होता है। मुझे पूरा यकीन है कि अगर 2019 में जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा और विशेष दर्जा समाप्त न किया गया होता, तो आज पीओके के लोग जम्मू-कश्मीर में अपने पुनर्मिलन के लिए उठ खड़े होते। हमने विधानसभा में दूसरी तरफ के लोगों के लिए सीटें खाली रखी हैं, इस उम्मीद में कि एक दिन ये सीटें भरी जाएंगी।

भाजपा ने अब्दुल्ला की टिप्पणियों पर पलटवार करते हुए उन्हें गैरजिम्मेदाराना बताया है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भाजपा नेता और विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा, मुख्यमंत्री का यह बयान गैरजिम्मेदाराना है। राष्ट्रीय दिवस पर, जब हमें अपने ध्वज का जश्न मनाना चाहिए, वे राजनीति कर रहे हैं। उन्हें इस अवसर का उपयोग अपने प्रदर्शन और भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करने के लिए करना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य से उन्होंने इसका इस्तेमाल राजनीति के लिए किया।

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उमर अब्दुल्ला ने दोहराया कि उनकी सरकार जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा और अन्य संवैधानिक गारंटी बहाल कराने के लिए प्रतिबद्ध है, जिन्हें अगस्त 2019 में रद्द कर दिया गया था। अब्दुल्ला ने अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में कहा, हमारी सरकार राज्य का दर्जा और संवैधानिक गारंटी बहाल कराने और जम्मू-कश्मीर को विकास के पथ पर अग्रसर करने के लिए प्रतिबद्ध है। हम इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए काम करेंगे।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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