Jantar Mantar Protest: जंतर मंतर पर छात्रों का विरोध क्या अब भी छात्रों का विरोध रह गया है या फिर इसे स्वार्थी राजनीतिक पार्टियों ने हाईजैक कर लिया है। और मुद्दा इस मानसून सत्र में सरकार को घेरने का रह गया है। विपक्ष एकजुट होकर सरकार को घेरने में लगा है। मकसद सिर्फ एक है कि किसी भी तरह से संसद का कामकाज न हो पाए। इसीलिए प्रधान के इस्तीफे से कम कुछ भी स्वीकार नहीं जैसी बातें कही जा रही हैं। ये सवाल लोगों के बीच तेजी से उठ रहा है। जिस तरह से इस आंदोलन के लिए काकरोज जनता पार्टी ने छात्रों का जंतर मंतर पहुंचने का आहवान किया और फिर जिस तरह से वामपंथियों ने मंच पर कब्जा करके शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्रों और युवाओं के उग्र विरोध प्रदर्शनों के बीच देशविरोधी नारे लगाए अल्लाह का नारा दिया, हिन्दुत्व पर हमला किया, हिन्दुओं के देवी देवताओं के लिए अपशब्दों का उच्चारण कर माहौल खराब करने का प्रयास किया। भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे का आरोप कि ‘विदेशी ताकतों ने छात्रों के आक्रोश को हाईजैक कर लिया है और अब राष्ट्रविरोधी ताकतें इस आंदोलन को चला रही हैं’। काफी हद तक सही प्रतीत हो रहा है।
विदेशी ताकतों का हाथ
देश विरोधी ताकतों का मुख्य मकसद संसद से विदेशी अनुदान संशोधन विधेयक पारित होने से रोकना है। ताकि वह अपनी देश विरोधी गतिविधियों को निर्बाध रूप से जारी रख सकें। गोड्डा सांसद के अनुसार, प्रतिबंधित संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू का विरोध प्रदर्शन के लिए 10,000 करोड़ रुपये देने का बयान एक बेहद गंभीर मामला है। जो स्पष्ट संकेत है कि देश विरोधी ताकतें इस आंदोलन को चला रही हैं।
संसद परिसर में उन्होंने कहा, भारत के खिलाफ सक्रिय विदेशी ताकतें—जिनमें खालिस्तानी समूह, बांग्लादेश इस्लामिक पार्टी के संगठन, पाकिस्तान स्थित संगठन और सोरोस फाउंडेशन से जुड़े समूह शामिल हैं—पहले से ही देश में सक्रिय हैं। वही ताकतें और समूह जो धर्मांतरण में शामिल थे और जिनकी गतिविधियां प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री द्वारा एफसीआरए (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) को बंद किए जाने के बाद प्रतिबंधित कर दी गई थीं, अब इसे मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। दुबे ने विरोध प्रदर्शन के वित्तपोषण पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा, “पैसा कहाँ से आ रहा है? साजिश क्या है? पिछले 20 दिनों में राहुल गांधी अपनी विदेश यात्राओं के दौरान किससे मिले? असली खिलाड़ी कौन है?”
सिख निहंगों की एंट्री
एक दिन पहले, भाजपा सांसद ने जंतर-मंतर से सिख निहंगों का एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि खालिस्तान समर्थक और इस्लामी तत्व छात्र समर्थन की आड़ में देश को विभाजित करने की साजिश रच रहे हैं। दुबे के साथ भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय भी शामिल हुए, जिन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन की योजना पहले से ही बनाई गई थी।
तैयारी काफी पहले से थी
लगातार तीन दिनों तक चली सुनियोजित, बिना उकसावे वाली हिंसा से एक बात स्पष्ट हो जाती है पहले दिन की दंगे और पत्थरबाजी अचानक नहीं हुई थी। ऐसा लगता है कि इसकी पहले से ही योजना बनाई गई थी। यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम वास्तविक छात्रों को राजनीतिक विपक्ष के उन वर्गों द्वारा शोषण से बचाएं जो इस तोड़फोड़ और अराजकता को प्रायोजित कर रहे हैं। मालविया ने आगे कहा कि छात्रों के नाम पर हो रहे इन विरोध प्रदर्शनों में “कुछ बेहद भयावह” है। जो नारे लगाए गए उनका शिक्षा सुधारों या छात्रों के कल्याण से कोई लेना-देना नहीं था। इसके बजाय, वे निर्वाचित सरकार को मतपत्र के अलावा हर संभव तरीके से गिराने के इर्द-गिर्द घूमते थे। नेपाल और बांग्लादेश के बार-बार उल्लेख, चाहे वे कितने भी गलत क्यों न हों, इस लामबंदी के पीछे के राजनीतिक इरादे को स्पष्ट कर देते हैं। फिर बयानबाजी शुरू हुई। अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को धमकी देकर सारी हदें पार कर दीं। यह कोई छात्र आंदोलन नहीं है। यह अशांति पैदा करने और क्रांति का महिमामंडन करने का एक राजनीतिक प्रयास है। यह विफल होगा क्योंकि भारत की जनता लोकतंत्र में विश्वास करती है, अराजकता में नहीं।
संसद में चर्चा की अनसुनी
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों ने नीट (राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा) परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक को लेकर देश भर के छात्रों और अभिभावकों के बीच व्याप्त आक्रोश को उजागर किया है। नरेंद्र मोदी सरकार ने विपक्ष से इस मामले पर संसद में चर्चा करने का आग्रह किया है, जिसे वह ऐसे मुद्दों के लिए उपयुक्त मंच मानती है।
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सुप्रिया श्रीनाते कहती हैं कि यह भाजपा के लिए एक अनुमानित पैटर्न बन गया है और उन्हें इसकी उम्मीद थी। उन्होंने कहा, इसमें कुछ भी आश्चर्यजनक नहीं है—यह अनुमानित था, और हम इसका इंतजार कर रहे थे। भाजपा को बस एक नए लेखक की जरूरत है। जब भी कोई जवाबदेही तय करने की कोशिश करता है, भाजपा दावा करती है कि किसानों, महिला खिलाड़ियों और अब युवाओं को भड़काने वाली एक अंतरराष्ट्रीय साजिश है। वह यह मानने से इनकार करती है कि वह अपनी राह से भटक गई है।
जनआक्रोश की दुहाई
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता ने आगे कहा कि ऐसे समय में जब पूरे देश में व्यापक आक्रोश और असंतोष फैला हुआ है और लोग निराश हैं क्योंकि उन्हें भविष्य नजर नहीं आ रहा है और उन्हें लगता है कि जवाबदेही बिल्कुल नहीं है, भाजपा इसी कहानी को हवा देने में लगी है। उन्होंने कहा, सरकार ने NEET की तथाकथित सफल पुन: परीक्षा का जश्न भी मनाया, जबकि इतने सारे युवाओं की मौत हो चुकी थी… शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। युवा सड़कों पर उतर आए हैं जबकि मोदी और शाह अनुपस्थित हैं। इसके बजाय, भाजपा अब नड्डा को आगे बढ़ा रही है। सवाल यह है कि प्रधानमंत्री सदन में क्यों नहीं आ रहे हैं? निशिकांत दुबे तो वैसे भी महत्वहीन हैं, क्योंकि वे कई बार झूठ बोलते पकड़े जा चुके हैं।








