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Sonam Wangchuk Protest Analysis: सोनम वांगचुक, जंतर-मंतर और आंदोलन की बदलती दिशा

Sonam Wangchuk Protest Analysis: कई बार मुंह की खा चुके टुकड़े टुकड़े गैंग के सदस्य जो भारत के हजार टुकड़े होने की बात करते हैं और भारत में रहने में डरने वाले लोग, हिन्दू कहलाना कलंक मानने वाले लोग, हिन्दू देवी देवताओं का मजाक उड़ाने वाले और दूसरे धर्म पर अपने सिसकी को भी दबा ले जाने वाले लोग। बड़ी मुश्किल से डरते डरते जंतर मंतर पर डेरा डाले थे। ओट बन गए थे सोनम वांगचुक। बिल्कुल उसी तरह से जैसे कभी अन्ना हजारे ओट बन गए थे। आतंकवादियों के समर्थक, उनके दोस्त, दंगे भड़काने में नामजद लोगों के।

बीस दिन में ऐसे नारों से दिल्ली न जाने कितनी बार मरी होगी। इन लोगों की तैयारी पूरी हो गई थी कि सोनम वांगचुक की अंतिम यात्रा कैसे निकलेगी। उस शव यात्रा में किस तरह से तख्तियों पर शायरी लिखकर सजाया जाएगा। वामपंथी जिनका न तो कोई दीन धर्म है और न मजहब ले दे कर उनके गले से एक ही गूंज आती है अल्लाह अल्लाह, नाम हिन्दू हैं लेकिन हिन्दू कहलाने में शर्म आती है। मुसलमान या इसाई बने नहीं तो इन्हें किस खांचे में रखा जाए।

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आंदोलन की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, धर्मेंद्र प्रधान के विरोध से हुई लेकिन सोनम वांगचुक के आते ही मंच का परिदृश्य बदल गया। अल्लाह अल्लाह होने लगा। राम लक्ष्मण को चोर बताया जाने लगा। राम को गाली दी जाने लगी। ब्राह्णणों का विरोध शुरू हो गया। करोड़ों हिन्दुओं को गाली दी जाने लगी। क्योंकि इनका मकसद मोदी का विरोध नहीं था। इनका मकसद परीक्षा की अव्यवस्था पर ध्यान दिलाना नहीं था इनका मकसद तो देश तोड़ना था। गटर की गंदगी में पनपने वाले काकरोजों के साथ नाली के सारे कीड़े जमा हो गए। और किस्मत से गटर में गिरे सोनम वांगचुक की शहादत की इबारत आधी लिखकर रुक गई। सरकार के सूचना मिल गई लिहाजा सोनम बच गए। अस्पताल पहुंच गए। जरूरत किसी भी सार्वजनिक मंच से ऐसी आवाज उठाने वालों पर एक्शन लेने की है ताकि फिर कोई ऐसा दुस्साहस न कर पाए।

नागभूषण 

राजनीतिक विश्लेषक, ये लेखक के निजी विचार हैं

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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