मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अचानक दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक में संगठन और राज्य से जुड़े अहम मुद्दों के साथ-साथ आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों पर चर्चा हुई होगी। हालांकि, बैठक के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। मुख्यमंत्री के इस दिल्ली दौरे पर राजनीतिक और प्रशासनिक, दोनों स्तरों पर बारीकी से नजर रखी जा रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संक्रमण का दौर है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अयोध्या और मंदिर में हुई चोरी के मुद्दे के इर्द-गिर्द केंद्रित होगा, जिसमें भाजपा को बैकफुट पर आकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ेगी।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का लखनऊ दौरा और संगठन से लेकर सरकार में बैठे लोगों तक एकजुट होकर मुकाबला करने का संदेश भी इसी दिशा की ओर इशारा करता है। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिल्ली जाकर अमित शाह से करीब 40 मिनट तक हुई मुलाकात ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है।
भाजपा और संघ की रणनीति में क्या हो सकता है बदलाव?
एक चूक ने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, दोनों अपने-अपने स्तर पर विपक्ष के आक्रामक रुख का जवाब तलाशने में जुटे हैं। रणनीति बनाई जा रही है कि इस मुद्दे का प्रभावी ढंग से मुकाबला कैसे किया जाए। संघ घर-घर जनसंपर्क अभियान चलाकर लोगों के बीच स्थिति स्पष्ट करने और जनता की आस्था को पहुंची चोट की भरपाई करने की रणनीति पर भी विचार कर रहा है।
कहते हैं वक्त बदलते देर नहीं लगती। एक ओर भगवा पार्टी लगातार तीसरी बार उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी की रणनीति बना रही थी और पिछली बार हारी 61 सीटों पर जीत की तैयारी कर रही थी, वहीं अब आस्था से जुड़े इस मुद्दे के बाद हिले विश्वास को दोबारा मजबूत करने की चुनौती से जूझती दिखाई दे रही है।
अयोध्या स्थित जन्मभूमि मंदिर में चोरी की घटना से अवगत पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने राज्य इकाइयों, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश संगठन, को निर्देश दिया है कि वे लोगों के बीच यह बात प्रमुखता से रखें कि केंद्र और राज्य सरकार ने इस मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कितनी तेजी से कार्रवाई की। साथ ही विपक्ष पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए उसे घेरने की रणनीति भी बनाई जाए।
चूक और विपक्ष के पैने हमले में फंसी भाजपा
हाल ही में उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने पार्टी नेताओं से कहा कि हालांकि एक “चूक” हुई है, लेकिन नेताओं को “एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने” की कोई आवश्यकता नहीं है।
दिल्ली के एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि विपक्ष इसे चुनावी मुद्दा बनाना चाहता है। उनका कहना है कि विपक्ष प्रशासनिक मुद्दों पर भाजपा सरकार को घेरने में विफल रहा है, इसलिए वह एक राजनीतिक विवाद खड़ा करना चाहता है। दुर्भाग्य से उसने ऐसा मुद्दा चुना है, जो लोगों की भावनाओं और आस्था से जुड़ा हुआ है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंगलवार को गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात को किसी बड़े फैसले के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि भाजपा ऐसी रणनीति पर काम करना चाहती है जिससे इस मुद्दे से लोगों का ध्यान भी हटे और पार्टी तथा सरकार पर जनता का विश्वास भी बना रहे। हालांकि विपक्ष संसद के 20 जुलाई से शुरू हो रहे सत्र में इस मुद्दे को जोरदारी से उठाने की तैयारी कर रहा है। वह चुनाव तक इस मुद्दे को गरमाए रखना चाहता है।
कुल मिलाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अचानक दिल्ली जाना राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमित शाह और योगी आदित्यनाथ की मुलाकात के बाद संगठन में बड़े बदलाव की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। हालांकि, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन पदाधिकारियों को आठ कार्यक्रमों का होमवर्क देकर गए हैं। ये सभी कार्यक्रम चुनाव तक लगातार संचालित किए जाएंगे। इसी क्रम में 19 से 22 जुलाई तक सभी विधानसभा क्षेत्रों में बूथ सम्मेलन आयोजित करने की योजना है, ताकि चुनावी स्तर पर संगठन को और मजबूत किया जा सके।








