वेब स्टोरी

ई-पेपर

लॉग इन करें

PM security row Om Birla: संसद के भीतर मोदी की सुरक्षा को महिला सांसदों से खतरा? बिरला के बयान पर सियासी संग्राम

PM security row Om Birla: संसद के हालिया सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक निर्धारित वक्तव्य का टलना अब गंभीर राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा दिए गए उस बयान ने विवाद को और गहरा कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री से सदन में उस समय न आने का आग्रह किया था, क्योंकि उन्हें सूचना मिली थी कि कुछ कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री की सीट तक पहुंचकर “अभूतपूर्व घटना” को अंजाम दे सकते हैं।

अध्यक्ष ने सदन में यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने उनकी सलाह मानकर सदन से अनुपस्थित रहकर “अप्रिय दृश्य” टाल दिए और इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया।

महिला सांसदों का तीखा प्रतिवाद

इस बयान के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महिला सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि उनके बारे में “झूठे, निराधार और मानहानिकारक” संकेत दिए गए। उन्होंने कहा कि सांसदों को संभावित हिंसक खतरे के रूप में प्रस्तुत करना संसदीय गरिमा और महिला प्रतिनिधित्व दोनों का अपमान है।

सुरक्षा आशंका या राजनीतिक संकेत?

विवाद का सबसे चर्चित पहलू यह रहा कि जिस खतरे की आशंका जताई गई, उसका स्वरूप क्या था। संसद परिसर देश के सबसे सुरक्षित स्थलों में से एक माना जाता है, जहां हथियार ले जाना असंभव है। ऐसे में राजनीतिक हलकों में यह व्यंग्यात्मक प्रश्न उठने लगा कि क्या निर्वाचित सांसदों से खतरा उनके “दांत और नाखून” जैसे प्रतीकात्मक अस्त्रों से था।

यह टिप्पणी भले ही व्यंग्य हो, लेकिन इसके पीछे गंभीर प्रश्न यह है कि क्या सांसदों को संभावित शारीरिक खतरे के रूप में चित्रित करना लोकतांत्रिक विमर्श के स्तर को गिराता है।

संसदीय इतिहास में दुर्लभ प्रसंग

संसदीय परंपराओं के जानकारों का कहना है कि भारतीय संसदीय इतिहास में ऐसा कोई स्थापित उदाहरण नहीं मिलता जब लोकसभा अध्यक्ष ने सुरक्षा कारणों से प्रधानमंत्री को सदन में आने से रोका हो। आमतौर पर अध्यक्ष की भूमिका सदन संचालन और व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित रहती है, जबकि प्रधानमंत्री की उपस्थिति राजनीतिक और संसदीय दायित्व का हिस्सा मानी जाती है।

https://x.com/manishbpl1/status/2023842404894457984?s=20

इसलिए इस घटना ने एक नई बहस को जन्म दिया है—क्या यह वास्तव में सुरक्षा प्रोटोकॉल का मामला था या राजनीतिक टकराव की तीव्रता का संकेत।

सियासत का नया प्रतीक प्रसंग

प्रधानमंत्री बाद में सदन में आए और कार्यवाही सामान्य हुई, लेकिन प्रारंभिक अनुपस्थिति और उस पर अध्यक्ष की टिप्पणी ने विपक्ष को यह कहने का अवसर दे दिया कि सरकार असहज सवालों से बच रही थी। वहीं सत्ता पक्ष इसे संभावित अव्यवस्था टालने का जिम्मेदार कदम बता रहा है।

https://tesariaankh.com/lifestyle-badalte-rishte-vishwas-ka-sankat-samaj-sawal/

इस पूरे विवाद ने संसद की गरिमा, महिला सांसदों की छवि और संसदीय परंपरा—तीनों को बहस के केंद्र में ला दिया है। एक प्रतीकात्मक प्रश्न अब भी तैर रहा है:
यदि संसद में हथियार नहीं जा सकते, तो निर्वाचित प्रतिनिधियों से खतरे की परिकल्पना आखिर किस रूप में की गई थी?

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

Leave a Comment

और पढ़ें
और पढ़ें