MP M Mallesh Babu: कर्नाटक के कोलार जिले के कुम्बारहल्ली गांव से निकलकर देश की संसद तक पहुँचने वाले जनता दल (सेक्युलर) के सांसद एम. मल्लेश बाबू आज उन जनप्रतिनिधियों में गिने जाते हैं, जिनकी पहचान जमीन से जुड़ी सोच और व्यवहारिक राजनीति से बनती है। एक किसान परिवार में जन्मे मल्लेश बाबू की राजनीति केवल सत्ता का सफर नहीं, बल्कि जीवन के अनुभवों से गढ़ी गई सार्वजनिक जिम्मेदारी की कहानी है।
30 जून 1974 को जन्मे मल्लेश बाबू ने अपने पिता स्वर्गीय सी. मुनिस्वामी से श्रम और अनुशासन का संस्कार पाया। मां गंगम्मा से मिली सादगी आज भी उनके व्यक्तित्व में साफ झलकती है। पेशे से किसान और व्यवसायी, और शिक्षा से एमबीए, मल्लेश बाबू आधुनिक प्रबंधन और ग्रामीण यथार्थ—दोनों दुनियाओं को साथ लेकर चलते हैं।
केंद्रीय कॉलेज, बेंगलुरु से एमबीए करने के बाद उन्होंने व्यवसाय में कदम रखा, लेकिन खेती से नाता कभी नहीं टूटा। यही वजह है कि संसद में पहुंचने के बाद भी वे किसानों, ग्रामीण युवाओं और छोटे व्यापारियों के मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं। 2024 में 18वीं लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद उनकी जिम्मेदारियां और बढ़ीं।
आज वे कानून एवं न्याय, कार्मिक एवं लोक शिकायत, और अनुमान समिति जैसे महत्वपूर्ण संसदीय समितियों के सदस्य हैं। इसके अलावा संविधान संशोधन और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन से जुड़े अहम संयुक्त समितियों में उनकी भूमिका बताती है कि पार्टी और संसद—दोनों स्तरों पर उन पर भरोसा किया जा रहा है।
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राजनीति के बाहर मल्लेश बाबू एक पारिवारिक व्यक्ति हैं। 2005 में मंजुला मल्लेश से विवाह हुआ और एक पुत्र के पिता हैं। क्रिकेट और बैडमिंटन में उनकी रुचि बताती है कि वे शारीरिक सक्रियता और अनुशासन को भी जीवन का हिस्सा मानते हैं।
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दिल्ली के व्यस्त राजनीतिक गलियारों और कोलार के गांव—दोनों जगह समान सहजता से खड़े दिखने वाले मल्लेश बाबू आज उस पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं, जो डिग्री, जमीन और लोकतंत्र—तीनों को साथ लेकर चलना जानती है। उनकी राजनीति में न शोर अधिक है, न दिखावा—बल्कि एक शांत, कर्मशील और भरोसेमंद उपस्थिति है, जो जनरुचि का स्वाभाविक कारण बनती जा रही है।








