तेलंगाना की राजनीति में स्मत. डी.के. अरुणा का नाम केवल एक सांसद के रूप में नहीं, बल्कि साहस, संवेदनशीलता और सेवा के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। महबूबनगर लोकसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी की सांसद डीके अरुणा ने अपने राजनीतिक जीवन में यह साबित किया है कि जनप्रतिनिधि का असली मूल्य संकट के समय सामने आता है।
जड़ों से जुड़ी नेता
4 मई 1960 को नारायणपेट में जन्मीं डीके अरुणा का पालन-पोषण सामाजिक मूल्यों से समृद्ध परिवार में हुआ। पिता चित्तेम नरसी रेड्डी और माता चित्तेम सुमित्रा देवी से उन्हें सेवा और अनुशासन की सीख मिली। शिक्षा उन्होंने हैदराबाद के आर.बी.वी.आर.आर. कॉलेज से प्राप्त की।
निजी जीवन और व्यक्तित्व
21 जून 1975 को डी.के. भारत सिम्हा रेड्डी से विवाह के बाद भी उनका सार्वजनिक जीवन पूरी सक्रियता के साथ आगे बढ़ा। एक बेटी की मां डीके अरुणा मोटरिंग की शौकीन हैं और ड्राइविंग को अपना पसंदीदा शौक मानती हैं। विभिन्न देशों—मॉरीशस, सिंगापुर, दुबई, अमेरिका और ब्रिटेन—की यात्राओं ने उनके वैश्विक दृष्टिकोण को और व्यापक बनाया।
सेवा का साहसिक उदाहरण
डीके अरुणा को सबसे अलग पहचान 2009 की बाढ़ के दौरान मिली, जब उन्होंने न केवल व्यक्तिगत संसाधनों से राहत सामग्री उपलब्ध कराई, बल्कि बाढ़ में फंसी एक गर्भवती महिला की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर सहायता की। इसी असाधारण सेवा के लिए उन्हें 2012 में मॉरीशस में ‘प्राइड ऑफ इंडिया अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया।
संसद में सक्रिय भूमिका
2024 में 18वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद डीके अरुणा संसद की कई अहम समितियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वे:
- विदेश मामलों की स्थायी समिति की सदस्य हैं
- महिला सशक्तिकरण समिति में कार्यरत हैं
- वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 की संयुक्त समिति की सदस्य हैं
- संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) और केंद्र शासित प्रदेश (संशोधन) विधेयक 2025 से जुड़ी संयुक्त समिति की सदस्य हैं
इन भूमिकाओं के जरिए वे राष्ट्रीय नीतियों में महिला सशक्तिकरण, संघीय ढांचे और विदेश नीति जैसे विषयों पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।
खेल और सामाजिक जुड़ाव
खेलों में भी उनकी सक्रिय रुचि रही है—शटल, टेनिकोइट, लॉन्ग जंप और हाई जंप जैसे खेल उनके अनुशासन और प्रतिस्पर्धी भावना को दर्शाते हैं। सामाजिक स्तर पर वे आपदा के समय सहायता, महिलाओं की सुरक्षा और बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए जानी जाती हैं।
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नेतृत्व की पहचान
डीके अरुणा की राजनीति भाषणों से अधिक कर्म पर आधारित रही है। वे सत्ता को सेवा का माध्यम मानती हैं और यही दृष्टिकोण उन्हें महबूबनगर ही नहीं, बल्कि तेलंगाना की राजनीति में एक भरोसेमंद चेहरा बनाता है।
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सांसद डीके अरुणा की कहानी यह बताती है कि राजनीति केवल पद नहीं, बल्कि संकल्प, संवेदना और साहस का नाम है। संकट में खड़े होकर नेतृत्व करना ही असली नेतृत्व है—और डीके अरुणा इसी कसौटी पर खरी उतरती हैं।








