Aira tennis journey: लखनऊ की सुबह जब अभी पूरी तरह जागी भी नहीं होती, तब एक लड़की पहले ही कोर्ट पर पसीना बहा रही होती है। न कैमरा, न तालियाँ—सिर्फ गेंद की आवाज़, रैकेट की थाप और अगली बॉल के लिए तैयार होती आंखें। यही आयरा है—एक ऐसी टेनिस खिलाड़ी, जिसकी पहचान शोर नहीं, निरंतरता है।
आयरा की कहानी किसी अचानक मिली जीत की नहीं, बल्कि उस लंबे दौर की है, जहाँ एक खिलाड़ी जूनियर टेनिस से निकलकर वुमेंस ओपन सर्किट की सख़्त दुनिया में खुद को ढाल रही है। हाल ही में यूपी स्टेट टेनिस चैंपियनशिप में महिलाओं के सिंगल्स और डबल्स—दोनों खिताब जीतना महज़ ट्रॉफी नहीं, बल्कि एक संकेत था कि वह अब अगला स्तर खेलने को तैयार है।
ट्रेनिंग लाइफ बनाम टीनएज लाइफ
ला मार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज में कक्षा 10 की छात्रा आयरा की दिनचर्या सामान्य किशोरों से बिल्कुल अलग है। उसके लिए दिन की शुरुआत अलार्म से नहीं, फिटनेस ड्रिल से होती है और दिन का अंत सोशल मीडिया स्क्रॉल से नहीं, मैच एनालिसिस से। छह घंटे की रोज़ाना प्रैक्टिस, स्कूल असाइनमेंट और लगातार ट्रैवल—यह सब उसके लिए “त्याग” नहीं, बल्कि प्रोफेशनल बनने की कीमत है।

एक परिवार, जो बैकग्राउंड में रहता है
आयरा की ताकत उसके साथ हर फ्रेम में नहीं दिखती, लेकिन हर मैच में महसूस होती है। उसके माता-पिता—पत्रकार अनुराग शुक्ला और तनवीर फ़ातिमा—ने कभी करियर का दबाव नहीं बनाया, बल्कि अनुशासन और संतुलन सिखाया। हार के बाद विश्लेषण और जीत के बाद संयम—यह सीख वही घर से लेकर आई है।
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कोचिंग, जो सिर्फ तकनीक नहीं सिखाती
केसरी टेनिस अकादमी, लखनऊ में आयरा की ट्रेनिंग केवल फोरहैंड-बैकहैंड तक सीमित नहीं है। पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी और इंटरनेशनल कोच समित केसरी उसके खेल में मेंटल स्ट्रेंथ, मैच टेम्परामेंट और ट्रांज़िशन फेज़ पर खास फोकस करते हैं—वही फेज़ जहाँ कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी पीछे छूट जाते हैं।
आंकड़े जो चुपचाप बोलते हैं
आयरा को अपनी उपलब्धियाँ गिनाना पसंद नहीं, लेकिन नंबर खुद कहानी कहते हैं—
70 से अधिक स्टेट और नेशनल टाइटल्स,
15 ऑल इंडिया स्तर के खिताब,
महिला ओपन में टॉप 300 और अंडर-18 में टॉप 200 की रैंकिंग,
और उत्तर प्रदेश की टॉप 20 खिलाड़ियों में निरंतर मौजूदगी।
इसके साथ ही ITF और एशियन सर्किट में खेलने का अनुभव यह दिखाता है कि उसका सफर अब घरेलू सीमाओं से बाहर निकल चुका है।

कप्तानी: जब खेल से आगे बढ़ती है जिम्मेदारी
कोलकाता में आयोजित CISCE नेशनल स्कूल गेम्स 2024 में उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड जूनियर टीम की कप्तानी करते हुए आयरा सिर्फ अपना मैच नहीं खेल रही थी। वह टीम के लिए फैसले ले रही थी, दबाव संभाल रही थी और जूनियर खिलाड़ियों के लिए उदाहरण बन रही थी—यही वह दौर है जहाँ खिलाड़ी लीडर बनता है।
सपना, जो प्रैक्टिस शेड्यूल में बदल जाता है
आयरा का सपना बड़ा है—ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक। लेकिन वह इस सपने को पोस्टर या कोट में नहीं ढालती। उसके लिए सपना अगले टूर्नामेंट का ड्रा है, अगला फिटनेस टेस्ट है, और अगली कमजोर कड़ी पर काम करने का प्लान है।
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आगे की राह
भारतीय महिला टेनिस आज बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इसी दौर में लखनऊ से निकली यह शांत-स्वभाव की खिलाड़ी बिना शोर किए अपनी जगह बना रही है।
शायद आने वाले वर्षों में जब भारतीय टेनिस की अगली पीढ़ी की बात होगी, तो आयरा का नाम “अचानक उभरी खिलाड़ी” के तौर पर नहीं, बल्कि धीरे-धीरे, टिकाऊ तरीके से आगे बढ़ने वाली खिलाड़ी के रूप में लिया जाएगा।








