Nipah Virus Explained: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस (Nipah Virus – NiV) के दो लैब-कन्फर्म मामलों की पुष्टि ने एक बार फिर इस घातक लेकिन कम चर्चित वायरस को वैश्विक सुर्खियों में ला दिया है। भले ही शुरुआती रिपोर्ट्स में पांच मामलों की आशंका जताई गई थी, लेकिन भारतीय स्वास्थ्य एजेंसियों और WHO की पुष्टि के अनुसार फिलहाल केवल दो ही संक्रमण प्रमाणित हुए हैं।
क्या है ताज़ा मामला?
WHO के अनुसार, 26 जनवरी 2026 को भारत के राष्ट्रीय IHR फोकल प्वाइंट ने पश्चिम बंगाल के बारासात (नॉर्थ 24 परगना) स्थित एक निजी अस्पताल में कार्यरत दो स्वास्थ्यकर्मियों के निपाह संक्रमित होने की सूचना दी।
इनमें से एक मरीज अब भी वेंटिलेटर सपोर्ट पर है, जबकि दूसरा गंभीर न्यूरोलॉजिकल लक्षणों से उबर रहा है। संक्रमण की पुष्टि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे में की गई।
https://x.com/airnewsalerts/status/2017443407082492023?s=20
क्या स्थिति नियंत्रण में है?
अब तक 190 से अधिक संपर्कों (Contacts) की पहचान कर जांच की जा चुकी है और सभी रिपोर्ट निगेटिव आई हैं। NIV द्वारा तैनात मोबाइल BSL-3 लैब ने जांच प्रक्रिया को तेज़ और सटीक बनाया।

WHO का आकलन है कि:
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सब-नेशनल स्तर पर जोखिम: मध्यम
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राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर जोखिम: कम
यानी फिलहाल यह स्थिति आउटब्रेक से आगे नहीं बढ़ी है, लेकिन निगरानी कड़ी कर दी गई है।
निपाह वायरस: बीमारी कितनी खतरनाक?
निपाह वायरस एक ज़ूनोटिक संक्रमण है, जो:
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संक्रमित चमगादड़ों या जानवरों से
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दूषित फल, भोजन या तरल पदार्थ से
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और कभी-कभी मानव से मानव में भी फैल सकता है
इसका इन्क्यूबेशन पीरियड आमतौर पर 3 से 14 दिन का होता है, लेकिन दुर्लभ मामलों में यह 45 दिन तक भी हो सकता है।
लक्षणों में शामिल हैं:
बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, गले में खराश — जो आगे चलकर दिमागी सूजन (एन्सेफेलाइटिस), दौरे, कोमा और मृत्यु तक पहुंच सकते हैं।
अब तक निपाह की मृत्यु दर 40–75% तक देखी गई है, जो इसे सबसे खतरनाक वायरसों में शामिल करती है।
इलाज और वैक्सीन: क्या विकल्प हैं?
फिलहाल निपाह वायरस के लिए:
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❌ कोई लाइसेंस प्राप्त दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं
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✅ केवल सपोर्टिव केयर से ही मरीज की जान बचाई जा सकती है
लेकिन उम्मीद की एक बड़ी किरण सामने आई है।
ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन ट्रायल: एक ऐतिहासिक कदम
यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड ने हाल ही में दुनिया का पहला Phase-II क्लिनिकल ट्रायल शुरू किया है।
इस ट्रायल में:
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18–55 वर्ष के 306 स्वस्थ प्रतिभागी
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बांग्लादेश में परीक्षण (जहां निपाह बार-बार फैलता है)
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वैक्सीन: ChAdOx1 NipahB
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फंडिंग: CEPI
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निर्माण: सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह ट्रायल न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से अहम है, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा और समान वैक्सीन पहुंच की दिशा में भी बड़ा कदम है।
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भारत और दुनिया के लिए क्या सबक?
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निपाह जैसे वायरस स्थानीय लग सकते हैं, लेकिन वैश्विक असर की क्षमता रखते हैं
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हेल्थकेयर वर्कर्स सबसे अधिक जोखिम में होते हैं
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अर्ली डिटेक्शन, ट्रांसपेरेंट रिपोर्टिंग और इंटरनेशनल सहयोग ही सबसे बड़ा हथियार है
WHO ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल मानव-से-मानव संक्रमण में वृद्धि का कोई सबूत नहीं है, लेकिन सतर्कता ही सुरक्षा है।

निपाह को लेकर ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया भी सतर्क
भारत में निपाह वायरस के ताज़ा मामलों के बाद अब इसका असर एशिया-प्रशांत क्षेत्र तक दिखने लगा है। ऑस्ट्रेलिया के स्वास्थ्य मंत्री मार्क बटलर ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार निपाह वायरस की स्थिति पर करीबी निगरानी रखे हुए है।
ऑस्ट्रेलियाई टीवी चैनल नाइन नेटवर्क से बातचीत में बटलर ने कहा कि निपाह वायरस का अब तक ऑस्ट्रेलिया में कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन भारत में दिसंबर से शुरू हुए प्रकोप को देखते हुए सरकार किसी भी खतरे को हल्के में नहीं ले रही।
उनके शब्दों में, “भारतीय अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने इस आउटब्रेक को काबू में कर लिया है, लेकिन इसके बावजूद हम स्थिति पर बेहद गंभीरता से और बारीकी से नज़र रख रहे हैं, क्योंकि यह एक बहुत खतरनाक वायरस है।”
अंतरराष्ट्रीय यात्रियों पर कड़ी निगरानी
निपाह के संभावित वैश्विक प्रसार की आशंका के बीच इंडोनेशिया ने भी एहतियाती कदम उठाए हैं। समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, बाली स्थित I Gusti Ngurah Rai अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विदेश से आने वाले यात्रियों की निगरानी सख्त कर दी गई है। यह एयरपोर्ट ऑस्ट्रेलियाई पर्यटकों के लिए सबसे लोकप्रिय अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों में से एक है।
ऑस्ट्रेलियाई स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी साफ किया कि देश में विदेश से आने वाले बीमार यात्रियों के लिए पहले से ही स्पष्ट और मजबूत स्वास्थ्य प्रोटोकॉल मौजूद हैं और फिलहाल उन्हें बदलने की कोई सलाह सरकार को नहीं मिली है।
क्यों वैश्विक चिंता का कारण है निपाह?
निपाह वायरस को WHO ने ‘प्रायोरिटी पैथोजन’ की श्रेणी में रखा है, क्योंकि:
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यह जानवरों से इंसानों में फैल सकता है
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कुछ मामलों में मानव-से-मानव संक्रमण भी होता है
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इसकी मृत्यु दर बेहद ऊंची है
स्वास्थ्य संस्थानों में, खासकर भीड़भाड़ और खराब वेंटिलेशन वाले अस्पतालों में, संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ जाता है—विशेषकर तब, जब संक्रमण नियंत्रण उपायों (PPE, साफ-सफाई, हाथों की स्वच्छता) का ठीक से पालन न हो।
https://x.com/7NewsMelbourne/status/2017437844193874345?s=20
निपाह का इतिहास और भारत की भूमिका
निपाह वायरस की पहचान पहली बार 1998 में मलेशिया में हुई थी, जब सूअर पालकों में संक्रमण फैला। इसके बाद 1999 में सिंगापुर में मामले सामने आए, लेकिन तब से वहां कोई नया प्रकोप नहीं देखा गया।
2001 से भारत और बांग्लादेश में निपाह के मामले सामने आने लगे। बांग्लादेश में यह लगभग हर साल रिपोर्ट होता है, जबकि भारत में समय-समय पर अलग-अलग राज्यों में इसके मामले सामने आते रहे हैं—ताज़ा कड़ी 2026 का पश्चिम बंगाल मामला है।








