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Reza Pahlavi Return to Iran: सत्ता के लिए कितनी बड़ी चुनौती

Reza Pahlavi Return to Iran: ईरान में रज़ा पहलवी जूनियर की वापसी के मायने

क्या बदल सकती है इस्लामिक रिपब्लिक की सियासी तस्वीर?

ईरान एक बार फिर उबाल पर है। सड़कों पर गुस्सा है, नारों में आक्रोश है और सत्ता के गलियारों में बेचैनी। इसी उथल-पुथल के बीच ईरान के पूर्व क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी जूनियर का यह ऐलान कि वे “वतन लौटने की तैयारी कर रहे हैं”, देश की राजनीति में भूचाल जैसा माना जा रहा है। सवाल सिर्फ उनकी वापसी का नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक, प्रतीकात्मक और रणनीतिक मायनों का है।

1. सत्ता को खुली चुनौती का संकेत

रज़ा पहलवी का बयान ऐसे समय आया है जब ईरान में पिछले कई वर्षों की सबसे बड़ी जन-असंतोष की लहर देखी जा रही है। महंगाई, बेरोज़गारी और राजनीतिक दमन के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शन अब सीधे सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और इस्लामिक शासन प्रणाली को चुनौती दे रहे हैं।
ऐसे में पहलवी की वापसी की घोषणा को मौजूदा सत्ता के लिए सीधी सियासी चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।

2. राजशाही नहीं, विकल्प की राजनीति

हालांकि रज़ा पहलवी खुद यह स्पष्ट कर चुके हैं कि वे बलपूर्वक राजशाही बहाल करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि ईरान के भविष्य का फैसला जनता करे और इसके लिए राष्ट्रीय जनमत संग्रह (रेफरेंडम) हो।
यानी वे खुद को राजा के रूप में नहीं, बल्कि एक लोकतांत्रिक विकल्प और संक्रमणकालीन नेतृत्व के प्रतीक के तौर पर पेश कर रहे हैं।

3. प्रदर्शनकारियों के लिए एक चेहरा, एक उम्मीद

ईरान में लंबे समय से सत्ता विरोधी आंदोलनों की एक कमजोरी रही है—कोई सर्वमान्य नेतृत्व नहीं
रज़ा पहलवी की घोषणा इस खालीपन को भरती दिखाई दे रही है। सड़कों पर “पहलवी को वापस बुलाओ” जैसे नारे यह संकेत देते हैं कि एक वर्ग उन्हें राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में देख रहा है, खासकर वे लोग जो इस्लामिक रिपब्लिक से पूरी तरह मोहभंग कर चुके हैं।

4. अर्थव्यवस्था और हड़ताल का आह्वान

पहलवी ने सिर्फ भावनात्मक अपील नहीं की, बल्कि रणनीतिक दिशा भी दी।
तेल, गैस, ऊर्जा और परिवहन जैसे अहम क्षेत्रों में राष्ट्रव्यापी हड़ताल की अपील यह बताती है कि उनका फोकस सत्ता की रीढ़—अर्थव्यवस्था—पर दबाव बनाने का है।
यह आंदोलन को सड़कों से आगे ले जाकर सिस्टम-लेवल चैलेंज में बदलने की कोशिश है।

5. सुरक्षा बलों को संदेश: निर्णायक मोड़?

पहलवी का सबसे संवेदनशील संदेश ईरान की सुरक्षा एजेंसियों और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के जवानों के लिए था।
उन्होंने उनसे दमन की मशीन को “धीमा और निष्क्रिय” करने की अपील की।
यदि सुरक्षा बलों का एक हिस्सा भी तटस्थ होता है या जनता के साथ खड़ा होता है, तो यह ईरानी सत्ता संरचना के लिए निर्णायक झटका साबित हो सकता है।

6. अंतरराष्ट्रीय समीकरण भी होंगे प्रभावित

ईरान पहले ही अमेरिका, इज़राइल और पश्चिमी देशों के साथ तनाव में है।
रज़ा पहलवी की संभावित वापसी को तेहरान विदेशी साज़िश बताकर पेश कर सकता है, लेकिन यह भी सच है कि उनकी मौजूदगी से ईरान संकट पर वैश्विक ध्यान और दबाव और बढ़ेगा।

प्रतीक से परे, एक राजनीतिक मोड़

रज़ा पहलवी जूनियर की वापसी फिलहाल सत्ता परिवर्तन की गारंटी नहीं है, लेकिन यह तय है कि यह घोषणा

  • आंदोलनों को एक चेहरा,
  • विपक्ष को एक वैकल्पिक धुरी,
  • और सत्ता को एक गंभीर चुनौती देती है।

ईरान एक ऐतिहासिक चौराहे पर खड़ा है। अब सवाल यह नहीं कि रज़ा पहलवी लौटेंगे या नहीं,
असल सवाल यह है कि क्या ईरान खुद को बदलने के लिए तैयार है?

Reza Pahlavi Jr, Supreme Leader Khamenei(image Social Media)) (1).jpg
Reza Pahlavi Jr, Supreme Leader Khamenei(image Social Media)) (1).jpg

ईरान के सर्वोच्च नेता की सत्ता सबसे कठिन दौर में

ईरान इस समय अपने हालिया इतिहास के सबसे संवेदनशील और अस्थिर दौर से गुजर रहा है। सड़कों पर जारी जनआंदोलन, आर्थिक बदहाली, अंतरराष्ट्रीय दबाव और अब पूर्व क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी जूनियर की संभावित वापसी—इन सबने मिलकर सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई की स्थिति को गंभीर चुनौती में डाल दिया है। सवाल यह नहीं है कि रज़ा पहलवी लौटेंगे या नहीं, बल्कि यह है कि उनकी घोषणा खामनेई की सत्ता को कितनी गहराई तक झकझोर रही है

1. खामनेई की सत्ता: ताकतवर लेकिन कमजोर होती पकड़

अयातुल्ला खामनेई पिछले तीन दशकों से ईरान की राजनीति के केंद्र में हैं। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स, न्यायपालिका, मीडिया और धार्मिक संस्थानों पर उनकी मजबूत पकड़ रही है।
लेकिन मौजूदा हालात में यह पकड़ पहले जैसी अडिग नहीं दिखती

  • लगातार बढ़ती महंगाई

  • तेल और गैस सेक्टर पर दबाव

  • युवाओं और महिलाओं में गहरा असंतोष

  • इंटरनेट बंदी और दमन के बावजूद थमते न दिखते प्रदर्शन

इन सबने खामनेई की “अपरिहार्य शक्ति” की छवि को कमजोर किया है।

2. रज़ा पहलवी: सत्ता के लिए वैचारिक खतरा

रज़ा पहलवी की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वे खुद को राजशाही के उत्तराधिकारी से ज्यादा लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं।
वे खुलकर कह रहे हैं कि फैसला जनता करे—राजशाही हो या गणराज्य।

यही बात खामनेई के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
क्योंकि इस्लामिक रिपब्लिक की वैधता इस दावे पर टिकी है कि 1979 की क्रांति ने जनता की इच्छा पूरी की
अगर आज फिर जनता से फैसला पूछने की बात जोर पकड़ती है, तो यह खामनेई की वैचारिक नींव पर सीधा हमला है।

3. नेतृत्व का संकट और पहलवी का उभरना

अब तक ईरान के आंदोलनों की सबसे बड़ी कमजोरी रही है—कोई एक चेहरा नहीं
रज़ा पहलवी इस खालीपन को भरते दिख रहे हैं।

  • प्रदर्शनकारियों द्वारा उनकी वापसी की मांग

  • खुले तौर पर हड़ताल और सिविल अवज्ञा का आह्वान

  • सुरक्षा बलों से दमन धीमा करने की अपील

यह सब खामनेई के लिए खतरनाक संकेत हैं, क्योंकि सत्ता के खिलाफ आंदोलन अब सिर्फ गुस्से का नहीं, दिशा का भी रूप ले रहा है

https://x.com/Tina_tina_7777/status/2010186429763375537?s=20

4. सुरक्षा बलों पर खामनेई की निर्भरता

खामनेई की सत्ता का सबसे मजबूत स्तंभ रहा है—इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC)
लेकिन जब रज़ा पहलवी सुरक्षा बलों को खुला संदेश देते हैं और उनसे सहयोग की अपील करते हैं, तो यह संकेत देता है कि

सत्ता के भीतर भी दरार की उम्मीद की जा रही है।

यदि सुरक्षा तंत्र का छोटा सा हिस्सा भी तटस्थ हुआ, तो खामनेई की स्थिति तेजी से कमजोर पड़ सकती है

5. अंतरराष्ट्रीय दबाव और घरेलू अस्थिरता

ईरान पहले से ही पश्चिमी प्रतिबंधों, इज़राइल और अमेरिका के साथ टकराव और क्षेत्रीय संघर्षों में उलझा है।
ऐसे में आंतरिक अस्थिरता खामनेई के लिए दोहरी चुनौती बन रही है—

  • बाहर से दबाव

  • अंदर से विद्रोह

रज़ा पहलवी की मौजूदगी इस संकट को वैश्विक मंच पर और अधिक दृश्य बना देती है।

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 चुनौती वास्तविक है, लेकिन निर्णायक नहीं

रज़ा पहलवी की वापसी फिलहाल खामनेई की सत्ता को गिराने की गारंटी नहीं है।
लेकिन यह साफ है कि—

  • खामनेई अब अजेय नहीं दिखते

  • सत्ता का नैतिक और वैचारिक आधार कमजोर हो रहा है

  • और ईरान एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ एक चिंगारी बड़ा परिवर्तन ला सकती है

खामनेई के लिए यह सिर्फ एक राजनीतिक संकट नहीं,
यह उनके नेतृत्व की वैधता और भविष्य का सबसे बड़ा इम्तिहान है

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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