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India Water Crisis: भारत के शहरों में पैर पसारता पानी का संकट

क्या पानी की कमी मानव अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा?

India Water Crisis: भारत, जिसकी सभ्यता पानी के किनारे पनपी, आज पानी की गंभीर कमी का सामना कर रहा है।
शहरी क्षेत्रों में पीने योग्य पानी की उपलब्धता होंने का आंकड़ा सिर्फ लगभग 6% है, जबकि बाकी परिवारों को जल को गुणवत्ता मानने में भी संदेह है। शहरी इंडिया में 62% परिवार फिल्टर/RO मशीनों पर निर्भर हैं, क्योंकि नल का पानी सीधे पीने योग्य नहीं माना जाता।

India Water Crisis: सूखती नदियाँ और घटता भूजल

भारत की कई नदियाँ और स्रोत आज संकट में हैं:

  • हिमालय और पहाड़ी इलाकों में नदी मार्ग बदल रहे हैं,
    जिससे कृषि भूमि कम हो रही है और नदी पारिस्थितिकी बिगड़ रही है।
  • भूजल स्तर देश भर में गिर रहा है।
    खासकर उत्तर भारत में पिछले 20 सालों में लगभग 450 घन किलोमीटर भूजल खो चुका है, जो इंदिरा सागर बांध को 37 बार भरने जितना पानी है।
  • कृषि सिंचाई के लिए भूजल का अत्यधिक उपयोग पूरे देश में सामान्य हो गया है और इससे पुनर्भरण की क्षमता से कहीं अधिक पानी निकाला जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र और नीति आयोग के अनुमानों के अनुसार लगभग 60 करोड़ भारतीय पहले से ही जल संकट का सामना कर रहे हैं, और यह संख्या आगे बढ़ने की आशंका के साथ है।

🚱 शहरों में पानी की कमी — एक दैनिक वास्तविकता

बेंगलुरु जैसे बड़े आईटी-हब हर दिन लगभग 200 मिलियन लीटर पानी की कमी झेल रहे हैं। मुंबई, चेन्नई और अन्य महानगर भी बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति के कारण संकटग्रस्त हैं।

ग्रेटर नोएडा के कुछ सोसायटी क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति पूरी तरह रुक जाती है, जिससे 5000 से अधिक परिवारों का जीवन प्रभावित हुआ है और लोग टैंकर पर निर्भर हो गए हैं।

डोंबिवली जैसे शहरों में पानी की भारी कमी के कारण कुछ लोगों ने हताशा में आत्महत्या प्रयास तक किया है, यह दर्शाता है कि पानी की कमी अब सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि जीवन संकट बन चुकी है।

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🩺 स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव

पहले से दूषित भूजल की समस्या भी गंभीर है:
भारत में भूजल में फ्लोराइड, आर्सेनिक, नाइट्रेट और भारी धातुओं की अधिकता से फ्लोरोसिस, कैंसर, तंत्रिका और गुर्दा रोग जैसी बीमारियाँ फैल रही हैं।

https://tesariaankh.com/air-pollution-india-uttar-pradesh-aqi-analysis/

सुरक्षित पेयजल की कमी के कारण दुनिया में लगभग 2 लाख लोग हर साल मरते हैं, और यह भारत सहित कई विकसित-विकासशील देशों में एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा बन चुका है।

⚠️ मानव जाति के अस्तित्व पर बढ़ता संकट

क्या पानी की कमी मानव अस्तित्व को खतरे में डाल रही है?
वैज्ञानिक तथा सामाजिक शोध स्पष्ट कहते हैं कि:

  • पानी की उपलब्धता प्रति व्यक्ति घटती जा रही है जबकी मांग लगातार बढ़ रही है।
  • 2050 तक अनुमान है कि भारत के आधे से अधिक जिलों में गंभीर जल संकट हो सकता है।
  • वैश्विक स्तर पर भी बड़ी संख्या में लोग अब पानी-लचीले क्षेत्रों से बाहर हो रहे हैं।

असल खतरा यह नहीं कि पानी अचानक समाप्त हो जाएगा, बल्कि यह कि जल संकट धीरे-धीरे सामाजिक, स्वास्थ्य, कृषि और आर्थिक ढांचे को तोड़ देगा, जिससे मानव समुदाय की जीवन गुणवत्ता और टिकाऊ अस्तित्व नष्ट हो सकता है।

https://x.com/MahuaMoitraFans/status/2001836500598837539?s=20

🛠️ क्या समाधान संभव है?

भारत सरकार और कई संस्थाओं ने कई पहलें शुरू की हैं:

📌 सरकारी उपाय:

  • जल जीवन मिशन — हर घर तक स्वच्छ नल का पानी पहुंचाने की योजना। (Reddit)
  • नल से पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए बड़े बजट योजनाएँ। (Navbharat Times)

📌 वैज्ञानिक उपाय:

  • भूजल पुनर्भरण और रेनवाटर हार्वेस्टिंग
  • नदी पुनरुद्धार और जल संरक्षण तकनीक
  • कृषि में जल-प्रबंधन और सिंचाई दक्षता

📌 नागरिक स्तर पर:

  • पानी की बर्बादी रोकना
  • घरेलू पानी की दक्षता बढ़ाना
  • गंदे पानी से बचाव व साफ़ पानी का उपयोग

भारत का पानी आज सिर्फ़ प्राकृतिक संसाधन नहीं है—यह जन स्वास्थ्य, सामाजिक व्यवस्था और भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार भी है।
अगर समय रहते रणनीतिक कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट धीरे-धीरे मानव जीवन को उतना ही प्रभावित करेगा जितना कि कोई बड़ा प्राकृतिक आपदा।

पानी को बचाना अब पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी चुनौती है।

 

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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