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Iran-Israel War India Oil Crisis: क्या भारत में गहराएगा तेल और गैस का संकट?

Iran-Israel War India Oil Crisis: दुनिया एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर खड़ी है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता तनाव केवल दो देशों की जंग नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की ‘लाइफलाइन’ पर हमला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कोरोना काल जैसी एकजुटता की अपील की है, जो संकेत है कि स्थिति गंभीर है। लेकिन क्या वाकई भारत में पेट्रोल-डीजल खत्म होने वाला है? आइए, आंकड़ों और कूटनीति के चश्मे से ‘तीसरी आंख’ का विश्लेषण देखते हैं।

1. होर्मुज की घेराबंदी: क्यों डरी है दुनिया?

दुनिया का लगभग 20-30% कच्चा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरता है। अगर युद्ध गहराता है और यह रास्ता बंद होता है, तो सप्लाई चेन पूरी तरह टूट जाएगी। कई देशों में तेल की कीमतें रातों-रात दोगुनी हो चुकी हैं।

https://x.com/CovertRecon_17/status/2036659737438110176?s=20

  • भारत की स्थिति: भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक तेल आयात करता है। हालांकि, ईरान के साथ भारत के प्रगाढ़ संबंधों के कारण अभी भारतीय टैंकरों को रास्ता मिल रहा है, लेकिन युद्ध की अनिश्चितता को नकारा नहीं जा सकता।

2. भारत की तैयारी: क्या हमारे पास ‘बैकअप’ है?

अनावश्यक पैनिक से बचने के लिए यह जानना जरूरी है कि भारत के पास 21 दिनों का ‘स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ (SPR) है। यह वह आपातकालीन स्टॉक है जो युद्ध जैसी स्थिति के लिए भूमिगत गुफाओं में रखा गया है। सरकार तेल कंपनियों के साथ मिलकर वैकल्पिक रास्तों पर भी काम कर रही है।

https://tesariaankh.com/current-affairs-iran-israel-tension-indian-stock-market-analysis/

3. वैश्विक सबक: जब साइकिल और ‘वर्क फ्रॉम होम’ बने हथियार

हाल के दिनों में हमने देखा है कि कई यूरोपीय और एशियाई देशों ने तेल संकट से निपटने के लिए कड़े कदम उठाए हैं:

  • अनिवार्य अवकाश और WFH: सरकारी दफ्तरों में बिजली और ईंधन बचाने के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ दोबारा लौट रहा है।

  • पब्लिक ट्रांसपोर्ट: जनता को निजी वाहनों के बजाय बस और मेट्रो के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

  • साइकिल का उपयोग: कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष स्वयं साइकिल पर चलकर जनता को ईंधन बचाने का संदेश दे रहे हैं।

4. कुकिंग गैस (LPG) और हमारे विकल्प

सिर्फ पेट्रोल ही नहीं, रसोई गैस पर भी संकट के बादल हैं। जैसा कि हमने अपने पिछले विश्लेषण में देखा था, मांग और आपूर्ति का अंतर बढ़ रहा है। अब समय आ गया है कि हम इंडक्शन कुकिंग (Induction) और सौर ऊर्जा (Solar Energy) जैसे विकल्पों को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना शुरू करें।

Iran Israel war crisis (Photo_ Social Media).jpg
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पैनिक नहीं, ‘प्रिपेयर्डनेस’ जरूरी है

यह समय अफवाहों पर ध्यान देने का नहीं, बल्कि संसाधनों के प्रति जागरूक होने का है। सरकार अपनी प्रतिबद्धता निभा रही है, लेकिन एक नागरिक के तौर पर हमारा कर्तव्य है कि हम ईंधन की बर्बादी रोकें। युद्ध कब खत्म होगा यह किसी को नहीं पता, लेकिन हमारी तैयारी ही हमें इस आर्थिक सुनामी से बचा सकती है।

Tesari Aankh
Author: Tesari Aankh

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