Breaking News: Election Commission of India (ईसीआई) ने स्पष्ट किया है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के प्रारूप पर दावे और आपत्तियों की सुनवाई के दौरान भूमि या मकान आवंटन प्रमाणपत्र के विकल्प के रूप में प्रस्तुत किए जाने वाले हाउसिंग फाइनेंस प्रमाणपत्रों को मान्य पहचान दस्तावेज नहीं माना जाएगा।
ईसीआई द्वारा निर्धारित कुल 13 वैध दस्तावेजों में “सरकार द्वारा जारी कोई भी भूमि/मकान आवंटन प्रमाणपत्र” 11वें स्थान पर सूचीबद्ध है। हालांकि, आयोग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इसके अलावा कोई अन्य भूमि या हाउसिंग फाइनेंस से संबंधित प्रमाणपत्र इस श्रेणी में स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
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मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ), West Bengal कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, आयोग के डाटाबेस में दस्तावेज अपलोड करने की प्रणाली इस प्रकार प्रोग्राम की गई है कि ईसीआई द्वारा निर्दिष्ट दस्तावेजों के अलावा कोई अन्य प्रमाणपत्र सिस्टम में अपलोड ही नहीं हो सकता। इसी कारण राज्य सरकार की “बंगला आवास (Banglar Bari)” योजना के तहत जारी प्रमाणपत्र स्वतः मान्य पहचान दस्तावेज नहीं माने जाएंगे।
सीईओ कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ईसीआई द्वारा मान्य भूमि या मकान आवंटन प्रमाणपत्र में संबंधित मतदाता को किसी विशिष्ट भूमि या मकान का आवंटन स्पष्ट रूप से दर्शाया जाता है। जबकि “बंगला आवास” योजना केवल एक हाउसिंग फाइनेंस स्कीम है, जिसमें लाभार्थी को मकान निर्माण या खरीद के लिए धनराशि दी जाती है। इस योजना के अंतर्गत जारी प्रमाणपत्र में किसी खास भूमि या मकान की पहचान नहीं होती, इसलिए इसे भूमि या मकान आवंटन प्रमाणपत्र के समकक्ष नहीं माना जा सकता।
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गौरतलब है कि मतदाता सूची से संबंधित दावे और आपत्तियों की सुनवाई 27 दिसंबर से शुरू हो चुकी है। अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी। इसके तुरंत बाद ईसीआई राज्य में अगले वर्ष होने वाले महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों की मतदान तिथियों की घोषणा करेगा।








