New Income Tax Law 2025 केंद्र सरकार ने आयकर अधिनियम, 2025 के तहत प्रस्तावित नियमों और फॉर्म्स पर आमजन और हितधारकों से सुझाव मांगकर एक ओर जहाँ परामर्श की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है, वहीं दूसरी ओर यह बहस भी तेज हो गई है कि क्या यह नया कानून वास्तव में करदाताओं को सुविधा देगा या फिर टैक्स सिस्टम को और जटिल बनाकर अधिक वसूली की घेराबंदी साबित होगा।
सरकार के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए आयकर कानून के नियमों और फॉर्म्स को अंतिम रूप देने से पहले इन्हें सार्वजनिक किया गया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने चार प्रमुख बिंदुओं पर सुझाव मांगे हैं—भाषा का सरलीकरण, मुकदमों में कमी, अनुपालन बोझ कम करना और पुराने/अनावश्यक नियमों की पहचान। यह सुनने में करदाता–हितैषी कदम लगता है, लेकिन इसके निहितार्थ इससे कहीं गहरे हैं।
सरकार का दावा: सरल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि आयकर कानून 2025 और नए फॉर्म्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि “साधारण नागरिक बिना कठिनाई के अनुपालन कर सके।” बीमा पर ब्याज पुरस्कार को कर-मुक्त करना, छोटे करदाताओं के लिए निल डिडक्शन सर्टिफिकेट और नॉन-ऑडिट मामलों में ITR की अंतिम तिथि 31 अगस्त तक बढ़ाना—ये सभी कदम राहत देने वाले प्रतीत होते हैं।
सरकार यह भी कह रही है कि 1961 के आयकर कानून की व्यापक समीक्षा रिकॉर्ड समय में पूरी की गई है और उद्देश्य “Ease of Living” को बढ़ाना है।
आशंका: सुविधा के नाम पर निगरानी और वसूली?
हालांकि, कर विशेषज्ञों और करदाताओं के बीच यह चिंता भी है कि नया कानून सरलीकरण से अधिक डिजिटलीकरण और डेटा-आधारित निगरानी की ओर इशारा करता है। नियमों और फॉर्म्स का पुनर्गठन यदि सही ढंग से न हुआ, तो यह:
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आम करदाताओं के लिए नई तकनीकी जटिलताएं पैदा कर सकता है
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छोटे और मध्यम करदाताओं पर अनजाने अनुपालन उल्लंघन का खतरा बढ़ा सकता है
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कर विभाग को अधिक सूक्ष्म स्तर पर जांच और वसूली का अवसर दे सकता है
OTP-आधारित सुझाव प्रणाली और विस्तृत नियम-उप-नियमों का उल्लेख यह भी दर्शाता है कि सिस्टम पहले से अधिक केंद्रीकृत और निगरानी-प्रधान होगा।
मुकदमे घटेंगे या नए विवाद बढ़ेंगे?
सरकार का दावा है कि नया कानून मुकदमों को कम करेगा, लेकिन भारत का अनुभव बताता है कि:
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नियम जितने अधिक तकनीकी होते हैं,
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व्याख्या उतनी ही विवादित हो जाती है।
यदि भाषा वास्तव में सरल नहीं हुई और विभागीय विवेक (discretion) बढ़ा, तो लिटिगेशन घटने के बजाय बढ़ भी सकता है।
https://x.com/FinMinIndia/status/2013454328267448412?s=20
जनता के लिए असली कसौटी क्या होगी?
नया आयकर कानून 2025 जनता के लिए राहत बनेगा या बोझ—यह इस पर निर्भर करेगा कि:
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क्या नियम सचमुच सरल भाषा में होंगे या सिर्फ शब्द बदले जाएंगे
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क्या छोटे करदाताओं को डर-मुक्त अनुपालन मिलेगा या नोटिस-संस्कृति और तेज होगी
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क्या कर प्रणाली सेवा-आधारित होगी या केवल राजस्व-केंद्रित
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सरकार द्वारा सुझाव मांगना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन अंतिम फैसला नोटिफिकेशन के बाद लागू होने वाले नियमों की प्रकृति तय करेगी। यदि नया आयकर कानून पारदर्शिता और भरोसे पर आधारित रहा, तो यह करदाताओं के लिए सुविधा बनेगा। लेकिन यदि यह डेटा, तकनीक और नियमों के जरिए अधिकतम वसूली की घेराबंदी में बदला, तो जनता के लिए यह नई मगजमारी और शोषण का औजार भी बन सकता है।
आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि आयकर अधिनियम 2025 Ease of Living की दिशा में कदम है या Ease of Collection की ओर एक और छलांग।








